इंदौर : हड़बड़ी सूची …?

बीएलओ ने छह दिन में निपटा दिया छह महीने का काम 10 साल बाद भी बिना सत्यापन ही जारी कर दी गई सूची….

  • आखिर क्यों 60 हजार से ज्यादा वैध मतदाता नगर निगम चुनाव में वोट ही नहीं डाल पाए

नगर निगम चुनाव में बुधवार को 60 हजार से ज्यादा मतदाता वोट नहीं डाल पाए। भास्कर पड़ताल में खुलासा हुआ कि इसकी सबसे बड़ी वजह हड़बड़ी में जारी की गई मतदाता सूची है। निगम की सूची 10 वर्ष से अपडेट ही नहीं की गई थी। ऐनवक्त पर चुनाव घोषित हुए तो सभी बीएलओ ने बिना सत्यापन ही सूची अपडेट घोषित कर दी। उसी का खामियाजा मतदाताओं को भुगतना पड़ा।.

दरअसल निर्वाचन आयोग के आदेशानुसार 10 मई तक अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन करना था। इसके लिए 85 वार्ड में 81,951 नामों का सत्यापन होना था। इनमें कई वार्ड में तीन हजार तक नाम जांचने थे। सत्यापन 15 अप्रैल के बाद शुरू हुआ और 6 दिन बाद रोकना पड़ा, क्योंकि 25 अप्रैल तक सूची अपडेट कर मई के पहले सप्ताह में मतदाताओं के अवलोकानार्थ रखना थी। निर्वाचन सुपरवाइजर जितेंद्र सिंह चौहान का दावा है, 50 हजार नाम हटाए हैं, लेकिन हकीकत में इससे दो गुना नाम काट दिए गए।

  • जिला निर्वाचन कार्यालय ने शहर के 85 वार्डों से 81,951 नाम हटाने का लक्ष्य तय किया था।
  • वार्ड 50 में सबसे अधिक 3010 एवं वार्ड 84 में सबसे कम 108 वोटर का होना था सत्यापन।
  • 2500 बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) सत्यापन नहीं कर पाए। 18 लाख वोटर को चेक करने का जिम्मा मात्र 255 कर्मियों के पास था।
  • मतदाताओं की ओर से भी सूची को लेकर सिर्फ 300 आपत्तियां आई।

रोज आठ घंटे भी काम करते तो सूची के सत्यापन में 6 महीने लग जाते

सत्यापन के लिए मतदाता का घर ढूंढकर उसकी जानकारी वैरीफाई करना थी। सत्यापन का पंचनामा बनाने के लिए आसपास के 5 लोगों के साइन लेना जरूरी था। मतदाता की डिटेल वाला फॉर्म निवास पर चस्पा करना था। एक वोटर के सत्यापन में कम से कम 15 मिनट लगते।

यदि रोज 8 घंटे भी काम करते तो एक दिन में 15 मतदाताओं का सत्यापन भी मुश्किल था। जिस वार्ड में 3000 मतदाताओं का सत्यापन करना था, वहां 200 दिन यानी 6 महीने से ज्यादा लग जाते। टीम ने बिना भौतिक सत्यापन एवं पंचनामा सूची अपडेट बता दी।

पोस्टल बैलेट तक समय पर जारी नहीं कर पाए
28, 29, 30 जून एवं 1 जुलाई को पोस्टल बैलेट की तारीख थी। होलकर कॉलेज में दो-दो हजार कर्मचारियों की ट्रेनिंग चल रही थी। ट्रेनिंग के बाद वोट डालने थे। भीड़ के कारण सैकड़ों कर्मचारी वोट नहीं डाल सके। विरोध के बाद 3 जुलाई को मौका दिया, लेकिन शाम तक बैलेट जारी नहीं किए। 17 जुलाई तक का समय है, लेकिन बैलेट नहीं होने से किसी काम नहीं।

वोटर आपत्ति लेते तो सुधार हो जाता 10 अप्रैल को प्रारंभिक सूची पार्टियों को सौंप कर दावे-आपत्ति मंगाए थे। मतदाताओं के लिए भी सूची रखी थी। आपत्ति आती तो सुधार हो जाता। – मुनीश सिकरवार, उप जिला निर्वाचन अधिकारी, इंदौर

गलती कर्मचारियों की
9000 में से 5337 कर्मचारियों ने ही वोट डाले। 2000 कर्मचारी अन्य क्षेत्र व जिलों के थे। ट्रेनिंग खत्म होने के बाद कर्मचारी बारी का इंतजार किए बिना घर चले गए। -अंशुल खरे, एसडीएम, ट्रेनिंग प्रभारी

हमें कोई शिकायत नहीं मिली
हमें अभी तक इस बारे में कोई शिकायत नहीं मिली है। फिर भी मामले की जानकारी निकलवाकर आवश्यक कार्रवाई करेंगे। – बसंत प्रताप सिंह, मुख्य निर्वाचन आयुक्त, मप्र

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