इंदौर : शिक्षा अनीति: 70 हजार विद्यार्थी, परीक्षा तो दूर पढ़ाई भी संकट में
शिक्षा अनीति:सेकंड ईयर में मेजर विषय नहीं बदल पा रहे 70 हजार विद्यार्थी, परीक्षा तो दूर पढ़ाई भी संकट में
दिशा-निर्देश नहीं मिलने और स्पष्टीकरण नहीं हाेने से बढ़ी परेशानी
नई शिक्षा नीति में विषय बदलने की आजादी विद्यार्थियों के लिए मुसीबत बन गई है। जो विद्यार्थी सेकंड ईयर में आकर मेजर विषय बदला चाह रहे हैं, उन्हें नियमानुसार उस विषय की फर्स्ट और सेकंड ईयर की पढ़ाई साथ करना होगी। परीक्षा भी दोनों पेपर की देना होगी, लेकिन कॉलेजों को अब तक इस बारे में कोई दिशा-निर्देश ही नहीं है। इस वजह से वे अनुमति देने को तैयार नहीं हैं। इससे प्रदेश के करीब 70 हजार विद्यार्थियों की पढ़ाई और डिग्री दोनों संकट में आ गई है।
नियम के मुताबिक ग्रेजुएशन के विद्यार्थी सेकंड ईयर में विषय बदल सकते हैं। भास्कर की पड़ताल में खुलासा हुआ कि सरकार ने घोषणा तो कर दी पर कॉलेजों को दिशा-निर्देश जारी नहीं किए। मार्च में परीक्षा होना है लेकिन विद्यार्थी विषय ही नहीं बदल सके हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति इंदौर की नोडल अधिकारी अंजना सक्सेना ने बताया, छात्र ओपन इलेक्टिव विषयों में तो बदलाव कर रहे हैं क्योंकि इसका एक-एक ही पेपर पढ़ना है लेकिन मेजर व माइनर विषयों को लेकर कोई दिशा-निर्देश नहीं हैं।
मेजर विषय बदला तो सेकंड ईयर में फर्स्ट ईयर की पढ़ाई भी करना होगी
केस- 1 खंडवा जीडीसी की छात्रा कुमकुम नंदमेर ने बताया, पहले साल में मेजर विषय के रूप में बिजनेस मैथ्स लिया था, विषय कठिन है इसलिए बिजनेस इकोनॉमिक्स लेना चाहती हूं। तीन माह से प्राचार्य डॉ. अशोक चौरे से पूछ रही हूं। वे कहते हैं दिशा-निर्देश ही नहीं हैं।
केस- 2 इंदौर की काजल कुशवाह ने बताया, मेरा मेजर विषय हिंदी साहित्य था, अब मुझे साइकोलॉजी लेना है। कॉलेज से जानकारी मांगी तो उन्होंने यूनिवर्सिटी में बात करने को कहा। यूनिवर्सिटी में अधिकारी बोले- भोपाल से दिशा-निर्देश आएंगे तब हो सकेगा। ऐसे में अब हम क्या करें?
कॉलेज तैयार ही नहीं, परीक्षा पर भी असमंजस
विद्यार्थी को मेजर विषय में 2 पेपर पढ़ना होते हैं। यदि किसी विद्यार्थी ने सेकंड ईयर में मेजर सब्जेक्ट बदला तो उसे समस्या आएगी। क्योंकि पहले साल में उसने बाकी विषयों के एक-एक पेपर ही पढ़े हैं, ऐसे में नए मेजर विषय का एक पेपर छूट गया। अब वह इसे कैसे पूरा करेगा। दूसरे साल में उसे बचा हुआ पेपर पढ़ना है तो कॉलेज में व्यवस्था ही नहीं। इसके क्रेडिट छूट जाएंगे तो वे कैसे पूरे होंगे? इन सवालों के जवाब अस्पष्ट हैं।
- 14 लाख विद्यार्थी हैं प्रदेश में 2021-22 सत्र में
- 1365 कॉलेजों में पढ़ रहे
- 40 क्रेडिट जरूरी है हर वर्ष
- 02 पेपर हैं मेजर विषय के
कॉलेजों को ही करनी है परीक्षा की व्यवस्था
छात्रों को विषय बदलने में समस्या आ रही है? क्या दिशा-निर्देश नहीं दिए?
हमने सभी दिशा निर्देश जारी किए थे, अगस्त तक कई छात्रों ने विषय बदलें हैं।
दूसरे वर्ष में मेजर विषय का एक पेपर छूट गया, उसका क्या?
छूटा हुआ पेपर दूसरे वर्ष में ही देना होगा।
कॉलेजों को जानकारी ही नहीं है?
कॉलेजों को ही व्यवस्था करना है, अब भी छात्र यूनिवर्सिटी से विषय बदल सकते हैं।
प्रवेश समिति की नोडल अधिकारी डॉ. मीना जैन व प्राचार्य छात्राओं से कहते हैं, भोपाल से आदेश आएगा तभी कुछ करेंगे। डॉ. धीरेंद्र शुक्ला भी महीनेभर से टाल रहे हैं और अभद्रतापूर्ण बातें कर रहे हैं।
केंद्रीय प्रवेश समिति सहसंयोजक