इटावा के ऐतिहासिक पचनद के संगम पर बनेगा डैम …!

आईआईटी रुड़की ने ड्रोन से शुरू किया सर्वे, योगी सरकार ने 100 करोड़ की दी थी स्वीकृति …!

इटावा में स्तिथ ऐतिहासिक पचनद के संगम पर केंद्र एवं राज्य सरकार की डैम बनाने की परीयोजना को लेकर सर्वे शुरू हो गया है। चंबल नदी पर 120 किलोमीटर के इलाके में ड्रोन के जरिए नदी का सर्वे कई दिनों से किया जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी 1976 में पचनद पर डैम बनाने की घोषणा की थी।

वर्तमान बीजेपी सांसद की पहल पर योगी सरकार ने पूर्व के बजट में 100 करोड़ की स्वीकृति दी थी। भारत सरकार को डैम बनाने को सौंप दिया था। जिसके बाद अब आईआईटी रुड़की की टीम ने ड्रोन के माध्यम से डैम के लिए सर्वे शुरू कर दिया है। सर्वे होते ही डैम बनाने का खाका तैयार करके काम शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।

आईआईटी रुड़की की टीम ने ड्रोन के माध्यम से डैम के लिए सर्वे शुरू कर दिया है।
आईआईटी रुड़की की टीम ने ड्रोन के माध्यम से डैम के लिए सर्वे शुरू कर दिया है।

यहा है पांच नदियों का संगम
बताते चलें इटावा जिले में स्तिथ पचनद जोकि पांच नदियों का संगम है। देश ही नही बल्कि पूरे विश्व में कही भी पांच नदियों का संगम नही पाया जाता है। इसलिए इटावा में स्तिथ पचनद अपने आप में एक खास पहचान रखता है। इस पांच नदियों के संगम में चंबल, यमुना, क्वारी, सिंध, पहुच नदी शामिल है। इस अनोखे पांच नदियों के संगम पर कई दशकों से डैम बनाने की घोषणाएं, दावे वादें किए जाते रहे है।

सांसद प्रो रामशंकर कठेरिया ने उठाया था मुद्दा
सरकारें बदलती रही और दावे वादों और घोषणाएं सिर्फ अखबार, मीडिया में छपती रही और समय बदलता रहा, लेकिन डैम के नाम पर यहां सिर्फ राजनीति होती रही। लेकिन हकीकत में कभी कोई पहल होती नजर नहीं आई। लेकिन कई दशक बीत जाने के बाद इसके लिए फिर से आवाज उठी और बीजेपी से वर्तमान में इटावा लोकसभा सांसद प्रो रामशंकर कठेरिया ने इस पांच नदियों के अनोखे संगम पर डैम बनवाने के लिए पहल की संसद में मुद्दा उठाया पीएम ओर सीएम से वार्तालाप की। जिसके बाद योगी आदित्यनाथ की पहली सरकार में इसके लिए प्रस्ताव भेजा गया। कई मुश्किलों अड़चनों के बाद यूपी सरकार ने अपने बजट में इस डैम का खाका तैयार करने के लिए सौ करोड़ की स्वीकृति दे दी। हालांकि इस डैम के निर्माण में कई हजार करोड़ खर्चे का अनुमान लगाया जा रहा है।

कई गांवों को मिलेगा लाभ
इस डैम के लिए प्रारंभिक कार्य जमीनी स्तर पर शुरू होता देख लोगों को लगने लगा की अब शायद इस अनोखे संगम पर डैम बनकर तैयार हो जाएगा। उसके बाद चंबल, यमुना नदी में बारिश के समय पानी छोड़े जाने के च्लते इटावा, औरैया, जालौन जिले के कई गांव के गांव जलमग्न हो जाते हैं, उससे तो निजात मिलेगी ही, लेकिन ऊंचे नीचे बसे गांवों को खेती किसानी के लकी पानी की आपूर्ति भी होने लगेगी। भाजपा सांसद डॉक्टर रामशंकर कठेरिया ने पचनद डैम परियोजना के कार्य शुरू होने को सबसे पहले खुशी जाहिर की। उसके बाद कांग्रेस से लेकर सपा की तत्तकालीन सरकारों पर निशाना साधा।

दो बार लोकसभा में उठाया मुद्दा
भाजपा सांसद ने कहा कि इस जनपद से सपा के चार बार मुख्यमंत्री रहे, लेकिन किसी ने पचनद पर डैम बनाने की बात नहीं की। 1976 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पचनद पर चुनावी जनसभा में यहां डैम बनाने की घोषणा की थी, लेकिन कुछ नही हुआ लंबे समय तक कांग्रेस को देश प्रदेश में सरकार रही, जिसका नतीजा है कि कांग्रेस प्रदेश से खत्म हो गई।

आईआईटी रुड़की ड्रोन से कर रही सर्वे
हमने दो बार लोकसभा में मुद्दा उठाया प्रधानमंत्री जी से बात की मुख्यमंत्री जी से बात की, जिसके बाद पिछली सरकार के बजट में सौ करोड़ स्वीकृति कर दिए और इस डैम बनाने का काम भारत सरकार को सौंप दिया। एक वर्ष से आईआईटी रुड़की इस पर ड्रोन से सर्वे का काम कर रही है। सर्वे का काम पूरा होते ही डैम बनाने का काम शुरू हो जाएगा। जिससे आसपास के जिलों समेत बुंदेलखंड के किसानो को खुशहाली आएगी।

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