भिण्ड. जिला अस्पताल : ओपीडी में क्लास वन डॉक्टरों की बजाय जिम्मेदारी संभाल रहे प्रशिक्षु डॉक्टर

जिला अस्पताल में मरीजों को ओपीडी के बाहर लाइन न लगाने के लिए लगा क्यूआर सिस्टम फेल ….

भिण्ड. जिला अस्पताल की ओपीडी व्यवस्थित न होने से मरीज भ्रमित हो रहे हैं। क्लास वन तो दूर क्लास टू चिकित्सक भी अपने चैंबरों में नहीं बैठ रहे हैं। इनकी जगह मेडिकल कॉलेज ग्वालियर से पीजी के प्रशिक्षण पर आए डॉक्टर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से उपचार नहीं मिल रहा है। मामले को लेकर जब सिविल सर्जन डॉ अनिल गोयल से बात की तो उन्होंने गोलमोल जवाब दिया।

27 क्लास वन के डॉक्टरों की है कमी

जिला अस्पताल में वर्तमान में 12 क्लास वन और 10 मेडिकल आफिसर डाक्टर हैं। जबकि इसके अतिरिक्त क्लास वन में 27 और क्लास टू में 16 डाक्टरों की आवश्यकता है। वहीं जिले को 18 अन्य डॉक्टर मिले थे, जिन्होंने ज्वॉइन नहीं किया है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज से मिले पीजी के 7 प्रशिक्षक डॉक्टर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

नेम प्लेट तक नहीं बदली

अस्पताल के ट्रामां सेंटर में दूसरी मंजिल पर 12 कक्षों में ओपीडी चलती है। इनमें वरिष्ठ डॉक्टरों की नेम प्लेट लगी है, लेकिन वह कम ही बैठते हैं। शनिवार को सुबह साढ़े दस बजे जब अस्पताल का जायजा लिया तो केवल डॉ डीके शर्मा और डॉ विनीत गुप्ता के चैंबर में डॉक्टर बैठे थे। वहीं अन्य चैंबर खाली पड़े थे। मरीजों की शिकायत पर हवाला दिया गया कि डॉक्टर राउंड पर गए हैं, जबकि ओपीडी में जिन डॉक्टरों की जिम्मेदारी है, वह राउंड पर नहीं जाते हैं। जबकि क्लास वन के 12 डॉक्टरों की ड्यूटी राउंड पर रहती है।

क्यूआर सिस्टम फेल

जिला अस्पताल में ओपीडी की व्यवस्था को सुधारने के लिए तीन माह पूर्व मशीन लगाकर टोकन सिस्टम से मरीज ओपीडी में देखे जाने थे। लेकिन अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते न तो ऑपरेटर ने मशीन चालू की और न हीं मरीजों को लाइन से छुटकारा मिला है। ओपीडी काउंटर पर टोकन मशीन के साथ बड़ा एलईडी डिस्प्ले बोर्ड लगाया गया है। मशीन से मिलने वाले टोकन के बाद मरीज अपना पर्चा कटवाएगा। डिस्प्ले के माध्यम से मरीजों को डॉक्टर व रूम नंबर की जानकारी दी जाएगी। फिलहाल यह सिस्टम विफल हो गया है।

जिला अस्पताल में ओपीडी की व्यवस्था को सुधारने के लिए तीन माह पूर्व मशीन लगाकर टोकन सिस्टम से मरीज ओपीडी में देखे जाने थे। लेकिन अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते न तो ऑपरेटर ने मशीन चालू की और न हीं मरीजों को लाइन से छुटकारा मिला है।

फैक्ट फाइल

300 बिस्तर की जिला अस्पताल में सुविधा है।

800 से 1000 मरीजों की रोजाना ओपीडी रहती है।

200 मरीज तक रोजाना वार्डों में होते हैं भर्ती।

07 मेडिकल कॉलेज से मिले पीजी डॉक्टर।

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