संपदा-2.0 की जल्दी क्यों ?

संपदा-2.0 की जल्दी क्यों ?:50% प्रॉपर्टी के खसरे लिंक नहीं, न नक्शे अपडेट किए; दिसंबर से पहले घर बैठे रजिस्ट्री असंभव

प्रदेश में पिछले हफ्ते संपदा-2.0 लॉन्च किया गया था। पंजीयन विभाग का दावा था कि घर बैठे रजिस्ट्री हो सकेगी। लेकिन हकीकत यह है कि जमीन की खरीद-फरोख्त के लिए अब भी लोगों को रजिस्ट्री कार्यालय के चक्कर लगाना पड़ रहे हैं। वजह- संपदा का सॉफ्टवेयर तो तैयार है।

लेकिन अभी भी पूरे प्रदेश की 50% प्रॉपर्टी के खसरे आधार से लिंक नहीं हैं। यानी इनकी केवाईसी नहीं हुई है। वहीं, राजस्व के भू-लेखा अधिकार के रिकॉर्ड में 1.38 करोड़ नक्शे भी अपडेट नहीं हैं। भोपाल में यह आंकड़ा 1.34 लाख है। इसके चलते लोगों को दिसंबर तक ऑनलाइन रजिस्ट्री का लाभ नहीं मिलेगा।

मकसद- ऑनलाइन काम होंगे, सच- दफ्तरों के चक्कर लग रहे

अभी ये ऑनलाइन : मॉर्गेज, समझौता, वसीयत

  • पंजीयन कार्यालय से राजस्व अधिकारी तक कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। अफसरों का कहना है कि राजस्व के रिकॉर्ड का काम पटवारी को करना है।
  • मॉर्गेज, समझौता, वसीयत, पॉवर ऑफ अटॉर्नी, किरायानामा और ज्वांइट वेंचर जैसे काम ही अभी ऑनलाइन किए जाएंगे।

भोपाल की 600 अवैध कॉलोनी में पुराना नक्शा

  1. पूरे प्रदेश में अब तक 4.61 करोड़ प्रॉपर्टी के खसरों में से सिर्फ 2.56 करोड़ खसरे ही आधार से लिंक हो पाए हैं।
  2. प्रदेशभर से वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल 10 हजार 325 करोड़ का राजस्व मिला।
  3. भोपाल में रजिस्ट्री कार्यालय से सरकार को करीब 1389 करोड़ का राजस्व मिला।
  4. भोपाल में ही 600 से ज्यादा अवैध कॉलोनी हैं। इनमें कई जगह तो पुराना नक्शा चल रहा है।

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