विश्वगुरु का ताज और सदनों में गोबर ?

विश्वगुरु का ताज और सदनों में गोबर,जलेबी और ठोकने की बात से देश नाराज

भारत  में फाल्गुन के दौरान गुजिया की मिठास और गुलाल की महक का महत्व है. इससे परे हरियामा में फागोत्सव से पहले विधानसभा के पटल पर गोबर की दुर्गंध और जलेबी कड़वाहट बिखेरना माननीयों की संवेदनहीनता का प्रचंड उदाहरण पेश कर गया. देश की सबसे बड़ी पंचायत से लेकर हरियाणा विधानसभा में माननीयों के बर्ताव की चर्चा लाजिमी है. इस तरह के संवादों पर पीड़ा उनकी भी है, जिनके कार्यकाल में पार्टी स्तर पर जुतम पैजार सदन की मर्यादा के तार-तार होने के अनगिनत किस्से ज्यादा पुराने नहीं. अगर मर्यादा को भंग करने की गलती कोई माननीय करे यह स्वीकार्य नहीं है.

चंद घंटों में सदन के पटल को गोबर से छींटम छींट करने वाले हरियाणा के दो माननीयों और कांग्रेस के वर्तमान पितामह सांसद माल्लिकार्जुन खरगे के ठोकने वाले असंसदीय संवाद भारत की सबसे बड़ी पंचायत में खड़े होकर बोले गए. मीडिया, सोशल मीडिया से लेकर मार्केट और मुहल्लों तक जलेबी, गोबर और ठोकने वाले संवादों की चर्चा है. यह सब उस भारत में हो रहा है जो विश्वगुरु का खोया ताज हासिल करने की मैराथन जीतने को आतुर है.

देश के हालात ऊपर से नीचे तक सुधरेंगे या नीचे से ऊपर तक,इस दिशा का अंदाजा दो सदनों के संवाद से खूब लगाया जा सकता है. सदन के पटल पर परिपक्व राजनीतिज्ञों की भाषा शैली युवा पीढ़ी को क्या प्रेरणा दे रही होगी,माननीयों पर सवाल यह उठ रहा है. असंसदीय भाषा के इस्तेमाल के बाद सदन कार्रवाई से तो बाहर किया जा सकता है,लेकिन जो पब्लिक डुमीन में पहुंच चुका है, उसका क्या ? 

सच यह है कि निचले और ऊपरी सदनों में यह पहली बार नहीं हुआ. मर्यादा पहले भी कई बार तार तार हुई है. राजनीति के क्षेत्र से जुड़े लोग भी भली प्रकार जानते हैं कि युवा पीढ़ी में उनकी प्रासंगिकता हाशिये पर है. समाज का एक बड़ा राजनीति के क्षेत्र और राजनीतिज्ञों से नजर चुराता है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण है लाख प्रयासों के बावजूद मतदान प्रतिशत का गिरता ग्राफ.

सदनों में प्राय: सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों में तीखी बहस के दृश्य और संवाद तो अक्सर सामने होते हैं, मगर किसी कद्दावर मंत्री और सत्तारूढ़ दल के ही वयोवृद्ध विधायक के बीच स्तरहीन टीका टिप्पणी के प्रसंग कम रहते है. यह सब हुआ भगवान हरि की भूमि हरियाणा में. वैसे हरियाणा के कुछ इलाकों में करोड़े वाली होली बरसों से विख्यात है. 

यदा कदा इसके दृश्य फाल्गुन मास में होली पर्व के इर्द-गिर्द दिखाई दे जाते हैं, मगर इस बार बाजार फागोत्सव से पहले गुलाल की महक को छोड़, एक माननीय की दूसरे माननीय पर दस लीटर गोबर और वयोवृद्ध माननीय द्वारा प्रतित्तौर में भी गोबर की दुर्गंध उछालने की प्रतिक्रिया सामने आ गई.

अब इसका इंपेक्ट य है कि हरियाणा में रसातल में चल रहे विपक्षी दलों को बैठे बिठाए भाजपा को घेरने का फुल मसाला मिल गया. सदन की मर्यादा पर बोलने के लिए विपक्षियों को मिले इस ढोल की गूंज अब होली फाग के दौरान ही नहीं,बल्कि अगले कई दिनों तक लंबे समय तक सुनाई देने वाली.

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि….न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही ज़िम्मेदार है.] 

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