प्रशासन का भू-रिकार्ड गड़बड़ !
Bhopal News: प्रशासन का भू-रिकार्ड गड़बड़, 30 हजार लोग लगा रहे चक्कर पर चक्कर
पिछले 25-30 सालों से जिन जमीनों पर लोग घर-दुकान बना चुके हैं, उनके पास दस्तावेज हैं, लेकिन राजस्व के रिकार्ड में वह जमीन सरकारी अथवा किसी और के नाम से दर्ज मिल रही है। कोलार और हुजूर तहसीलों में इस तरह की स्थितियां अधिक हैं।

- भोपाल में ही 30 हजार लोग हैं पटवारी।
- तहसीलदार के चक्कर लगाने को मजबूर।
- इसका आरसीएमएस पोर्टल तय किया हुआ है।
भोपाल। जिले के राजस्व कार्यालयों में भू-रिकार्ड में कुछ गड़बड़ है। अभी केवाइसी शुरू हुई तो लोगों को दस्तावेजों में गड़बड़ी की बात पता चली। ऐसे 30 हजार से अधिक भू-स्वामी अब परेशान हैं। उनके पास मालिकाना दस्तावेज हैं, लेकिन सरकारी रिकार्ड में जो दस्तावेज हैं, उनकी कहानी कुछ और निकल रही है।
- मामला एक – हिनोतिया आलम में एक निजी स्कूल से लगी जमीन 2010 तक निजी नाम से चढ़ी हुई थी। यहां करीब 50 हजार वर्गफीट जमीन दस लोगों को विक्रय भी हुई। 2011 में भूमि रिकार्ड सुधार में इस जमीन को सरकारी दर्ज कर दिया गया। अब ये लोग जमीन को अपने नाम दर्ज कराने पटवारी से लेकर अधिकारियों तक के चक्कर लगा रहे हैं।
- मामला दो – राजहर्ष कालोनी के सनखेड़ी रोड किनारे के क्षेत्र में करीब तीस साल बाद यहां लोगों को नोटिस दिए जा रहे हैं। बताया जा रहा कि 2011 में ये जमीन अन्य किसी के नाम दर्ज हो गई, जबकि लोगों के पास अपने घरों की रजिस्ट्री व अन्य दस्तावेज है। तहसीलदार कोर्ट में इन्हें इसी माह उपस्थित होकर जवाब देना है।
फैक्ट फाइल –
- 2.99 लाख भूमि स्वामी की जमीनें उनके आधार से लिंक करने का लक्ष्य तय किया था।
- 2.70 लाख से अधिक भूमि स्वामी अब भी जमीन से अपनी पहचान नहीं जुड़वा पाएं।
- .60 लाख प्रकरण नक्शा तरमीम और रिकार्ड दुरुस्त करने के प्रकरण हैं।
- 1.48 लाख प्रकरण अभी लंबित है।
भूमि रिकार्ड से संबंधित जो भी मामले आते हैं, उनको तहसीलों में भेजकर जल्द से जल्द निराकृत करवाया जाता है।लंबित प्रकरणों को लेकर काम किया जा रहा है।जमीन से जुड़ा पूरे रिकार्ड का आनलाइन किया जा रहा है, जिससे जल्द ही समस्याओं का समाधान होगा।
दुर्गा पटले, एसएलआ, भूअभिलेख