भ्रष्टाचार का नया ट्रेंड ?
भदौरिया के यहां छापे में 25 करोड़ की चल-अचल संपत्ति का पता चला तो मेहरा के घर से 3 करोड़ का सोना और लग्जरी फार्म हाउस समेत एक फैक्ट्री का खुलासा हुआ। लोकायुक्त ने ये भी खुलासा किया कि आबकारी के रिटायर्ड अफसर धर्मेंद्र भदौरिया ने 38 साल की सर्विस में 829 फीसदी अनुपातहीन संपत्ति इकट्ठा की।
अब यहां सवाल उठता है कि इन्होंने इतनी अकूत संपत्ति भ्रष्टाचार के किस तरीके से हासिल की? भास्कर ने इस सवाल का जवाब जानने के लिए आबकारी और पीडब्ल्यूडी के रिटायर्ड अफसरों से बात की। उन्होंने दोनों ही विभागों में भ्रष्टाचार के नए ट्रेंड के बारे में बताया।
38 साल की नौकरी में 800 फीसदी अनुपातहीन संपत्ति
15 अक्टूबर, 2025 को लोकायुक्त पुलिस ने रिटायर्ड जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया के इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन स्थित 8 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा था। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। भदौरिया के पास 25 करोड़ रुपए से ज्यादा की चल-अचल संपत्ति के दस्तावेज मिले।
यह उसकी पूरी सेवा के दौरान हुई कुल वैध आय (लगभग 2 करोड़ रुपए) से 829% ज्यादा थी। जांच में यह भी सामने आया है कि भदौरिया के बेटे सूर्यांश ने विशाल पंवार के शिवा चाइनीज वॉक में साझेदारी की है और अन्नपूर्णा व विजयनगर की दुकानों में 40% हिस्सेदारी ली है, जिसके बदले 25 लाख रुपए का भुगतान किया गया था।
महंगी गाड़ियों और सुपर बाइक्स का शौकीन
धर्मेंद्र सिंह भदौरिया महंगी गाड़ियों का भी शौक रखता है। उसके यहां से अधिकारियों को एक वॉल्वो, एक फॉरच्यूनर, दो इनोवा सहित चार लग्जरी बाइक मिल चुकी हैं। बताया जा रहा है कि अधिकारियों को उसके फ्लैट से दो महंगी सुपर बाइक मिली हैं, जिन्हें मोडिफाइड कराया गया है। भदौरिया ने अपनी अधिकांश गाड़ियों का नंबर 0045 लिया है।
इंदौर में 10 करोड़ का आलीशान मकान बन रहा
लोकायुक्त को इस कार्रवाई के दौरान भदौरिया के आलीशान बंगले के बारे में भी पता चला। इंदौर के मालवा काउंटी टाउनशिप में स्थित प्लॉट नंबर सी-35 पर ये आलीशान मकान इंदौर की आर्किटेक्ट कंपनी द डिजाइन चैरेट तैयार कर रही है।
इस कंपनी में धर्मेंद्र सिंह भदौरिया की बेटी अपूर्वा सिंह भदौरिया के पार्टनर होने का पता चला। लोकायुक्त को पता चला कि इस बंगले के इंटीरियर के लिए उसने विदेशी सामान लगाने की प्लानिंग की थी और 4 करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी में था।

इटालियन डिजाइन में बन रहा बंगला
भदौरिया ने बंगले को इटालियन डिजाइन में तैयार करने की प्लानिंग की थी। इसमें मुख्य हॉल में 22 लाख रुपए से ज्यादा कीमत का झूमर लगाने की प्लानिंग थी। साथ ही 50 लाख की लागत से होम थिएटर भी बनाया जा रहा था।
चार बेडरूम वाले बंगले के साइड में एक गार्डन तैयार हो रहा था जिसमें लग्जरी फाउंटेन लगाने की तैयारी थी। सूत्रों की मानें तो भदौरिया ने इस आलीशान बंगले के लिए करीब 1.5 करोड़ रुपए का फर्नीचर चीन से इम्पोर्ट करने की प्लानिंग की थी।

2 किलो सोना और 5 किलो चांदी मिली थी
लोकायुक्त पुलिस ने 9 अक्टूबर को लोक निर्माण विभाग (PWD) के पूर्व चीफ इंजीनियर गोविंद प्रसाद (जीपी) मेहरा के भोपाल स्थित आवास समेत 4 ठिकानों पर छापा मारा था। छापे के दौरान मण्पुरम कॉलोनी के निवास से लगभग 8.79 लाख नकद, 50 लाख के सोने-चांदी के आभूषण, 56 लाख की फिक्स डिपॉजिट जानकारी और अन्य कीमती दस्तावेज मिले थे।
इसके अलावा ओपल रीजेंसी (दाना पानी, भोपाल) स्थित फ्लैट से 26 लाख नकद, लगभग 2.649 किलोग्राम सोना (अनुमानित कीमत 3.05 करोड़) और 5.523 किलो चांदी (कीमत 5.93 लाख) बरामद हुई।
फार्म हाउस से 17 टन शहद और लग्जरी वाहन
ग्राम सैनी (सोहागपुर) स्थित फार्महाउस से लोकायुक्त टीम को 17 टन शहद, कृषि भूमि, 6 ट्रैक्टर, 32 निर्माणाधीन कॉटेज, 7 तैयार कॉटेज, 2 मछली पालन केंद्र, 2 गोशालाएं और कई महंगे कृषि उपकरण मिले। मेहरा परिवार के नाम पर 4 लग्जरी कारें (फोर्ड एंडेवर, स्कोडा स्लाविया, किया सोनेट और मारुति सियाज) रजिस्टर्ड पाई गईं।

अब जानिए क्या है आबकारी और पीडब्ल्यूडी में भ्रष्टाचार का नया ट्रेंड
आबकारी विभाग: हिस्सेदारी और तस्करी का खेल
विभाग से सेवानिवृत्त हुए एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘पहले अधिकारी केवल फिक्स रिश्वत लेते थे, लेकिन पिछले एक दशक में ट्रेंड बदल गया है। अब अधिकारी ठेके के बदले सीधे हिस्सेदारी लेते हैं।’
पूर्व अफसर ने बताया कैसे काम करता है यह मॉडल
रिटायर्ड अधिकारी बताते हैं कि अफसर अपने बच्चों या रिश्तेदारों के नाम पर ठेकेदार की फर्म में हिस्सेदारी ले लेते हैं। इसके बाद वे साल भर ठेकेदार को हर तरह का संरक्षण देते हैं। नियमों को ताक पर रखकर शराब की बिक्री, अवैध परिवहन और ओवर-रेटिंग की खुली छूट दी जाती है।
ठेकेदार जितना अधिक कमाता है, अधिकारी का मुनाफा भी उतना ही बढ़ता है। इस ‘पार्टनरशिप’ मॉडल में दोनों का फायदा होता है, इसलिए यह फिक्स रिश्वत से ज्यादा लोकप्रिय हो गया है।

1 से 1.5 प्रतिशत में ‘कमाऊ’ पोस्टिंग ये दूसरा ट्रेंड है। ये सिस्टम इतना संगठित है कि जिलों में पोस्टिंग का रेट तक तय है। अधिकारी बताते हैं कि किसी जिले के शराब ठेके की कुल कीमत का 1 से 1.5 प्रतिशत उस जिले में पोस्टिंग का रेट होता है।
उदाहरण के लिए, अगर आलीराजपुर जिले का ठेका 300 करोड़ रुपए का है, तो वहां जिला आबकारी अधिकारी के पद पर बैठने के लिए 3 करोड़ रुपए देने होंगे। धार, आलीराजपुर और इंदौर संभाग के अन्य जिले सबसे महंगे माने जाते हैं।
गुजरात बॉर्डर पर हर बोतल पर कमीशन
इंदौर संभाग की सीमा गुजरात से लगी है, जहां शराबबंदी है। यहां से गुजरात में अवैध शराब की तस्करी बड़े पैमाने पर होती है। विभागीय जानकार बताते हैं कि गुजरात जाने वाले हर ट्रक में अधिकारियों का हिस्सा बंधा होता है। एक ट्रक में करीब 800 पेटी यानी लगभग 10,000 बोतलें होती हैं।
हर बोतल पर छोटे से लेकर बड़े अधिकारी का 1 से 3 रुपए तक का कमीशन तय होता है। इस तरह, एक ट्रक पर एक अधिकारी को 10 से 20 हजार रुपए तक मिलते हैं। हर दिन ऐसे कई ट्रक बॉर्डर पार करते हैं, जिससे यह अवैध कमाई करोड़ों में पहुंच जाती है।

PWD विभाग में जमीन से लेकर गड्ढे भरने तक में लूट
PWD प्रदेश के सबसे कमाऊ विभागों में से एक है। यहां भी कमीशनखोरी का तरीका बदल गया है। एक अधिकारी के अनुसार, ‘पहले सिर्फ बड़े ठेकों में पैसा लिया जाता था, लेकिन अब हर छोटे-बड़े काम में बिना लेन-देन के फाइल आगे नहीं बढ़ती।’
प्रोजेक्ट की जानकारी लीक कर कमाई
PWD में कमाई का सबसे बड़ा जरिया है प्रोजेक्ट की जानकारी लीक करना। विभाग के उच्च अधिकारी किसी बड़े प्रोजेक्ट, जैसे हाईवे या बायपास की घोषणा से पहले ही इसकी जानकारी अपने करीबी नेताओं और प्रॉपर्टी डीलरों को दे देते हैं।
यह गठजोड़ प्रोजेक्ट के रास्ते में आने वाली जमीनें किसानों से कौड़ियों के दाम पर खरीद लेता है। जैसे ही प्रोजेक्ट की आधिकारिक घोषणा होती है, जमीन की कीमतें आसमान छू लेती हैं और उसे कई गुना मुनाफे पर बेचा जाता है। इस मुनाफे में अधिकारी की तय हिस्सेदारी होती है।

वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट: जब खुला खेल, तो रद्द हुआ प्रोजेक्ट
इस खेल का सबसे बड़ा उदाहरण 41 किलोमीटर का वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट है। 31 अगस्त, 2023 को 3000 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलते ही नेताओं और अधिकारियों ने आसपास की जमीनें खरीदनी शुरू कर दी थीं। पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने इसकी शिकायत सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से की।
शिवराज सरकार ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 31 अगस्त 2023 को कैबिनेट में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। इसके तहत फोर लेन रोड के साथ 6 लेन स्ट्रक्चर और दोनों तरफ टू लेन सर्विस रोड का निर्माण होना था।
नवंबर 2025 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का टारगेट रखा गया था। जोशी की शिकायत के बाद मामले की जांच हुई और जब यह गठजोड़ सामने आया, तो सरकार को पूरा प्रोजेक्ट ही रद्द करना पड़ा।

ब्लैक लिस्टेड फर्मों और गड्ढों में कमीशन
कमाई के अन्य तरीकों में ब्लैक लिस्ट हो चुकी कंपनियों को मोटी रकम लेकर काम देना शामिल है। इसके अलावा, सड़कों के गड्ढे भरने के नाम पर भी बड़ा खेल होता है। कागजों पर सैकड़ों गड्ढे भरने का ठेका दिया जाता है, लेकिन असल में 15-20 प्रतिशत काम ही होता है। बाकी की रकम अधिकारी और ठेकेदार आपस में बांट लेते हैं।
रिटायर्ड अधिकारी कहते हैं कि धर्मेंद्र भदौरिया और जीपी मेहरा पर हुई कार्रवाई महज एक बानगी है। प्रदेश में भ्रष्टाचार अब केवल व्यक्तिगत लालच नहीं, बल्कि एक संगठित और सुनियोजित उद्योग बन चुका है, जिसके अपने नियम, रेट और मॉडल हैं।
वे कहते हैं कि जब तक इस पूरे इकोसिस्टम पर वार नहीं किया जाएगा, तब तक कुछ ‘धनकुबेरों’ के पकड़े जाने के बावजूद नए धनकुबेर पैदा होते रहेंगे।

