सरकार के ‘पैरोकार’ रह चुके हाई कोर्ट के 43% जज

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति का मौजूदा चेहरा एक अहम सवाल खड़ा करता है- क्या हाई कोर्ट तक पहुंचने के रास्ते सभी के लिए समान हैं? यह सवाल इसलिए क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि इस समय हाई कोर्ट में पदस्थ कुल 42 न्यायाधीशों में से 26 जजों की नियुक्ति वकील कोटे से हुई है। यानी हर दूसरा जज वकील कोटे से है। इन 26 न्यायाधीशों में से तीन अन्य हाई कोर्ट से ट्रांसफर होकर मप्र हाई कोर्ट आए हैं।
ऐसे में मप्र हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले कुल 23 वकील बतौर जज पदस्थ हैं। इसमें भी 18 ऐसे हैं, जिन्होंने जज बनने से पहले मप्र या केंद्र सरकार की पैरवी की। इनमें कुछ तो ऐसे भी हैं, जिनके नाम पर केंद्र सरकार ने जब मुहर लगाई तब वे सरकार की ओर से ही पैरवी कर रहे थे।
यानी हाई कोर्ट में मौजूदा जजों में 43% ऐसे हैं, जो सरकार के पैरोकार के रूप में अदालत में पेश हुए। यह आंकड़ा महज संयोग है या एक स्पष्ट और स्थापित ट्रेंड की ओर इशारा करता है, ये कहना जल्दबाजी होगा। बता दें कि हाई कोर्ट के मौजूदा 42 जजों में से जो सर्विस कोटे के 16 जज हैं, उनमें से भी 4 एडिशनल जज हैं।
जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव जब हाईकोर्ट जज नियुक्त हुए, तब वे मप्र के महाधिवक्ता थे। वे 8 अक्टूबर 2021 को जज बने व जून 2022 में उनका दिल्ली हाईकोर्ट ट्रांसफर हो गया।

एनालिसिस – इसका असर क्या?
अगले 15 साल में ऐसा होगा हाई कोर्ट का चेहरा
बार से नियुक्ति लगातार…
हालिया नियुक्तियों में बार का प्रतिनिधित्व तेजी से बढ़ा है। वकील कोटे के मौजूदा जजों में से 11 की नियुक्तियां 2023 से 2025 के बीच हुई है। नई बेंच का चेहरा बार-ड्रिवन बनता जा रहा है। हाल में नियुक्त हर दूसरा जज वकील कोटे से है।
2016 में 9 वकील मप्र हाई कोर्ट जज बने: 2016 में 9 वकील हाई कोर्ट जज बनाए गए। इनमें से अधिकांश अभी मप्र हाई कोर्ट में ही पदस्थ हैं। शेष का या तो स्थानांतरण हो गया या फिर वे रिटायर हो गए।
बार से जज बने, उनका कार्यकाल लंबा
हालिया बार-कोटे के जजों की रिटायरमेंट 2037 से 2041 के बीच है। वहीं, सर्विस कोटे से आने वाले ज्यादातर जजों का कार्यकाल 2026 से 2029 के बीच का है। यानी आने वाले 10 से 15 साल तक बेंच का असर बार से तय होगा।
वकील कोटे और न्यायिक कोटे के जजों के अलग-अलग मत
वकील कोटे और न्यायिक कोटे के जजों के अलग-अलग मत
मैं हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच में कुछ समय एडिशनल एडवोकेट जनरल रहा। फिर हाई कोर्ट जज बना, कॉलेजियम का सदस्य व एक्टिंग चीफ जस्टिस भी रहा। सरकार की मंशा रहती है कि कोर्ट में उनका पक्ष मजबूती से रखा जाए। जज के चयन का जिम्मा कॉलेजियम का होता है। सभी से परामर्श, कानूनी ज्ञान एवं तर्क क्षमता के आधार पर नामों का चयन किया जाता है। हाई कोर्ट में वकील कोटे से बने अधिकांश जज कभी केंद्र या राज्य शासन के वकील रहे, ये महज संयोग है।’ -जस्टिस (रिटा.) मप्र हाई कोर्ट
आईएएस की तरह ज्यूडिशियल सर्विसेज से हो जजों का चयन
- एक रिटायर हाई कोर्ट जज (जिला जज कोटा) ने कहा- इस विषय पर कोई मत नहीं दूंगा। मैं जो कहूंगा वो सच है और बेहद कड़वा है। आप नाम प्रकाशित करेंगे, जो मेरे लिए ठीक नहीं होगा।
- एक रिटायर जज ने कहा- राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम को 10 साल पहले खारिज कर दिया गया। अभी काॅलेजियम सिस्टम से जजों का चयन होता है। ये पारदर्शी नहीं है।
- एक अन्य रिटायर जज ने कहा- आईएएस, आईपीएस की तर्ज पर इंडियन ज्यूडिशियल सर्विसेस से जजों का चयन होना चाहिए।

