यूपी में नकली दवाएं…. मेडिकल स्टोर का लाइसेंस सरेंडर कराने वालों पर कसेगा शिकंजा ?
यूपी में नकली दवाएं: मेडिकल स्टोर का लाइसेंस सरेंडर कराने वालों पर कसेगा शिकंजा, ऐसे चलता है कारोबार
औषधि निरीक्षकों की मानें तो नशे का कारोबार करने वाले मेडिकल स्टोर संचालकों को धीरे-धीरे अकूत मुनाफा मिलने लगता है। इसके बाद वे लाइसेंस समर्पण कर देते हैं। कुछ स्टोर संचालकों के यहां कमियां मिलने पर विभाग लाइसेंस रद्द कर देता है। लाइसेंस रद्द अथवा समर्पण होने के बाद ये मेडिकल स्टोर विभाग की सूची से हट जाते हैं। सूची में नाम न होने से ये विभाग की नजर से बच जाते रहे हैं। आसपास के लोग भी इसलिए ध्यान नहीं देते हैं क्योंकि वे पहले से ही दवा का कारोबार कर रहे हैं। इससे नशे के कारोबारियों को सुरक्षित माहौल मिलता है। इसके बाद वे थोक कारोबारियों के नेटवर्क को अपने कारोबार को बढ़ावा देने के लिए प्रयोग करने लगते हैं। ये पुराने लाइसेंस नंबर को अपने बिल बाउचर में भी दर्ज करते हैं।
10 साल में सरेंडर और निरस्त लाइसेंस की बनेगी सूची
कारोबारियों के नए पैंतरे को देखते हुए अब विभाग ने भी इस कारोबार को खत्म करने के लिए नई रणीनति बनाई है। इसके तहत 10 साल में सरेंडर और निरस्त किए गए लाइसेंस की अलग से सूची बनेगी। इस सूची के आधार पर जिलेवार जांच की जाएगी और इस कारोबार में शामिल लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
इस तरह केस के जारिए समझिए मामले
लखीमपुर खीरी की फर्म न्यू राय मेडिकल स्टोर का लाइसेंस वर्ष 2023 में निरस्त कर दिया गया था। इस स्टोर को नशे में प्रयोग होने वाले कफ सिरप फेंसिपिक टी की आपूर्ति 10 अक्तूबर 2025 तक की गई। यह आपूर्ति इधिका लाइफसाइंसेज की गोदाम से हुआ।
कौशांबी की फर्म विकास मेडिसिन वर्ष 2022 से बंद है। इसके बाद भी यहां 21 नवंबर 2024 तक कोडिन कफ सिरप की आपूर्ति की गई है। कुछ ऐसी ही स्थिति उन्नाव और प्रतापगढ़ में भी सामने आई है।
ये है कोडीन
कोडीन एक दर्द निवारक दवा है जिसका उपयोग अल्पकालिक दर्द से राहत पाने के लिए किया जाता है। लेकिन ये हर किसी पर कारगर नहीं होता है। लंबे समय तक इसका प्रयोग करना खतरनाक है। यही वजह है कि इसकी बिक्री डॉक्टर के पर्चे पर ही होती है। चिकित्सकों के मुताबिक कोडीन मतिष्क की तंत्रिकाओं को सीधे प्रभावित करता है। इसकी ज्यादा खुराक लेने से नशा होता है।

