मध्य प्रदेश

बैतूल में गंभीर मामलों की फाइलें गुम !!

बैतूल में गंभीर मामलों की फाइलें गुम
कोर्ट में पेश नहीं हुए चालान, SI पवन कुमार सस्पेंड, SP का एक्शन, 7 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट
बैतूल एसपी ने चार केस डायरी गायब होने और कोर्ट में चालान पेश न करने के मामले में सख्त एक्शन लिया है। कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप में एसआई पवन कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है।
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 मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक लापरवाही सामने आई है। कोतवाली थाने में पदस्थ रहे एक उप निरीक्षक (एसआई) द्वारा चार अहम केस डायरी गायब करने और उनका चालान समय पर कोर्ट में पेश न करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इसे कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही मानते हुए बैतूल एसपी वीरेंद्र जैन ने एसआई को सस्पेंड कर लाइन अटैच कर दिया है।

लापता हुईं 4 आपराधिक केस डायरी

बैतूल जिला पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने पुलिस विभाग में अनुशासन और जिम्मेदारी को लेकर सख्त तेवर दिखाए हैं। मामला कोतवाली थाने में पदस्थ रहे उप निरीक्षक (एसआई) पवन कुमार से जुड़ा है। एसआई पर आरोप है कि उनके पास मौजूद जिन केसों की डायरियां गायब हुई हैं, उनमें जबरन वसूली, शासकीय कार्य में बाधा, मारपीट और धमकी जैसे संगीन अपराध शामिल थे। कायदे से इन मामलों की जांच पूरी कर समय सीमा के भीतर चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया जाना था, लेकिन डायरी गायब होने की वजह से न्यायिक प्रक्रिया अधर में लटक गई।

एमपी ने एसआई को किया सस्पेंड

एसपी वीरेंद्र जैन ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पवन कुमार का यह कृत्य गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। वर्तमान में पवन कुमार थाना गंज, बैतूल में कार्यरत थे। निलंबन के बाद उन्हें रक्षित केंद्र (लाइन) बैतूल भेज दिया गया है। निलंबन की इस अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा।

एएसपी सुनील लाटा करेंगे जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) सुनील लाटा को इस पूरे प्रकरण की प्रारंभिक जांच सौंपी है। उन्हें सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे 7 दिनों के भीतर जांच पूरी करें और यह पता लगाएं कि डायरियां कैसे गायब हुईं और इसके पीछे क्या मंशा थी।

न्यायालय में लटकी सुनवाई

केस डायरी या चालान पुलिस केस की रीढ़ होते हैं। इनके न्यायालय में पेश न होने का सीधा फायदा आरोपियों को मिलता है और पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है। एसपी ने इस बिंदु को संज्ञान में लेते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह की चूक किसी भी अधिकारी द्वारा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

विभागीय कार्रवाई की चेतावनी

सूत्रों की मानें तो यदि सात दिन की जांच में एसआई की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है या डायरियां जानबूझकर गायब करने का तथ्य सामने आता है, तो उन पर और भी कड़ी विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

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