सगा बहनोई तस्कर-सगा भाई तस्कर… मंत्री ‘मासूम’, कहती हैं-उनसे जबरन रिश्ता न जोड़ें!!!
नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने गांजा तस्करी के आरोप में पकड़े गए भाई अनिल बागरी और बहनोई शैलेंद्र सिंह से पल्ला झाड़ लिया है। खजुराहो में मंगलवार को कैबिनेट की बैठक के दौरान मीडिया ने जब उनसे सवाल-जवाब किए वे यह कहकर किनारा कर गईं कि – ‘कोई भी अपने आप से रिश्तेदार बना लेता है।
मेरा अनुरोध है कि पहले आप उसकी पुष्टि कर लें। तथ्यों की जानकारी के बाद ही बात करें।’ महाराज कन्वेंशन सेंटर से निकलते समय जब उनसे इसी संबंध में सवाल किया गया तो वे झल्ला गईं और कहा – ‘आप लोग फालतू की बात करते हैं।’ हालांकि बाद में बागरी ने सुर बदले… उन्होंने कहा कि पुलिस अपना काम कर रही है। जो भी गलत करने वाला अपराधी होगा, नाते-रिश्तेदार कोई भी, पुलिस प्रशासन अपनी कार्रवाई करेगा। दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी।
हालांकि पार्टी की पूछताछ में उन्होंने सफाई दी है कि भाई तो उनका है, बहनोई से रिश्तेदारी नहीं। जबकि बहनोई के बारे में भी कहा गया है कि वे उनके ही रिश्तेदार हैं। पार्टी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की ओर से इस पूरे मामले से राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष को अवगत करा दिया गया है।
4 धान की बोरियों में 48 पैकेट गांजा बरामद हुआ था
एडिशनल एसपी प्रेमलाल धुर्वे के अनुसार, मुखबिर की सूचना पर रामपुर बघेलान पुलिस ने 7-8 दिसंबर की रात मरौहा गांव में पंकज सिंह के घर पर दबिश दी। घर के बाहर टीन शेड में धान की बोरियों के नीचे छिपाकर रखी 4 बोरियों से 48 पैकेट गांजा बरामद हुआ, जिसकी कीमत 9 लाख 22 हजार 680 रुपये आंकी गई।
पंकज की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उसने यह गांजा अनिल बागरी और उनके बहनोई शैलेन्द्र सिंह का होना बताया। पुलिस ने सोमवार को अनिल बागरी को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों को एनडीपीएस एक्ट की विशेष अदालत में पेश कर 19 दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया। 3 दिसंबर को यूपी की बांदा पुलिस ने शैलेन्द्र सिंह को इसी आरोप में पकड़ा था।
कांग्रेस ने कहा– यही भाजपा का परिवारवाद…
कांग्रेस ने प्रतिमा बागरी पर हमला बोला है। पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रतिमा बागरी का इस्तीफा मांगते हुए कहा कि नशे में डूबा हुआ, यही भाजपा का परिवारवाद है।
गांजे की मात्रा के आधार पर सजा
NDPS एक्ट, 1985 के तहत गांजा तस्करी की सजा उसकी मात्रा पर निर्भर करती है।
- कम मात्रा: 1 किलो तक। बरामद होने पर आरोपी को 1 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
- मध्यम मात्रा: 1 किलो से 20 किलो तक। इस पर सजा 10 साल तक जेल और जुर्माना 1 लाख रुपए तक हो सकता है।
- व्यावसायिक मात्रा : 20 किलो से अधिक। इस पर 10 साल-20 साल की कठोर कैद। 2–5 लाख रुपए जुर्माना।


