केरवा-कलियासोत वेटलैंड पर अवैध कब्जे ….एनजीटी ने पूछा- आदेश पढ़े भी या नहीं????

केरवा और कलियासोत वेटलैंड, ग्रीन बेल्ट और सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों के मामले में प्रशासन की सुस्ती एक बार फिर एनजीटी की सुनवाई में उजागर हुई। ट्रिब्यूनल ने 17 सितंबर को 15 दिन के भीतर कारण सहित कार्ययोजना और एक्शन टेकन रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार यह रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर सकी।
सरकार के वकील प्रशांत एम. हरने ने दलील दी कि अधिकारी और अमला एसआईआर में व्यस्त थे। इस पर ट्रिब्यूनल ने कड़ा रुख लेते हुए पूछा कि क्या पिछला आदेश पढ़ा भी गया था? सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से अंतरिम आवेदन दायर करने वाले वकील भी मौजूद नहीं थे।
एनजीटी ने चेतावनी दी कि अगली तारीख पर वकील अनुपस्थित रहे तो आवेदन खारिज कर दिए जाएंगे। याचिकाकर्ता ने सरकार पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया। कहा कि स्थगन आवेदन में 33 मीटर ग्रीन बेल्ट से अतिक्रमण हटाने का उल्लेख है, जबकि आदेश में ऐसा कोई निर्देश नहीं है। अगली सुनवाई 30 जनवरी 2026 को होगी।
2022 से अब तक 35 सुनवाई, हर बार टाल रही सरकार
- 11 फरवरी 2022 को पहली बार केरवा और कलियासोत क्षेत्र में हुए अतिक्रमण को लेकर एनजीटी में याचिका लगाई गई
- 2 मार्च 2022 को इस मामले में सुनवाई हुई, सुनवाई के दौरान पहली बार सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया
- 13 अप्रैल 2022 मामले में सुनवाई नहीं हुई, सुनवाई के लिए डेट आगे बढ़ते रही।
- 23 नवंबर 2022 को पहली बार इस मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया गया।
- दिसंबर 2023 में अतिक्रमण चिन्हित हुए, लेकिन आज तक इस मामले में सुनवाई आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार बहाने बनाती रही।
- 21 सितंबर 2023 को इस मामले में मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस पर 5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगा है।

