नक्सलियों के पास हथियार कहां से आते हैं?
नक्सलियों के पास हथियार कहां से आते हैं? बस्तर में अचानक खुल गया सबसे बड़ा राज
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में पुलिस और सुरक्षा बलों ने नक्सलियों की एक भूमिगत हथियार फैक्ट्री और डंप को ध्वस्त कर दिया. भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और निर्माण सामग्री की बरामदगी को माओवाद के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है.

अक्सर लोगों के मन में एक सवाल उठता है कि घने जंगलों में छिपे नक्सलियों के पास इतने घातक हथियार आखिर आते कहां से हैं? क्या ये हथियार सुरक्षाबलों पर हमलों और मुठभेड़ों में लूटे जाते हैं, क्या किसी बाहरी नेटवर्क के जरिए इनकी सप्लाई होती है, या फिर नक्सली खुद जंगल के भीतर ही हथियार बनाना जानते हैं?
छत्तीसगढ़ के बस्तर से सामने आई ताज़ा कार्रवाई ने इन सभी सवालों का जवाब एक साथ दे दिया है. नारायणपुर पुलिस की इस बड़ी सफलता ने नक्सलियों के हथियार नेटवर्क की उस सच्चाई को उजागर किया है, जो अब तक सिर्फ आशंका मानी जाती थी.

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दरअसल, छत्तीसगढ़ के बस्तर में लाल आतंक अब अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है. भारत में नक्सलियों के पूर्ण खात्मे के लिए केंद्र सरकार द्वारा तय की गई ‘मार्च 2026′ की डेडलाइन जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे-वैसे सुरक्षाबलों का प्रहार और भी घातक होता जा रहा है.
5 फरवरी 2026 को छत्तीसगढ़ की नारायणपुर पुलिस ने एक ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसे माओवाद के ताबूत में ‘आखिरी कील’ माना जा रहा है.

नारायणपुर के सोनपुर इलाके में पुलिस नक्सलियों के ‘पाताल लोक’ तक पहुंच गई. जंगल के ऊंचे पहाड़ी इलाके के गर्भ में छिपी नक्सलियों की एक विशाल हथियार फैक्ट्री और डंप को ध्वस्त कर दिया गया. जमीन के नीचे से जो सामान निकला, उसे देखकर सभी दंग रह गए. वहां देसी ग्रेनेड से लेकर SLR रायफल की मैगजीन तक बनाई जा रही थी. सामग्रियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यह नक्सलियों की कोई संगठित फैक्ट्री थी, जहां आतंक के हथियार निर्मित किए जाते थे.

कुरुसकोड़ो में फहरा तिरंगानारायणपुर का कुरुसकोड़ो इलाका, जो कल तक नक्सलियों का अभेद्य किला माना जाता था, आज वहां तिरंगा लहरा रहा है. नारायणपुर पुलिस और बीएसएफ ने यहां जन-सुविधा और सुरक्षा कैंप की स्थापना की है.
इसी बीच पुलिस को सटीक खुफिया इनपुट मिला था कि सोनपुर थाना क्षेत्र के कुरुसकोड़ो, पांगुड और कंदुलपार की पहाड़ियों में नक्सलियों ने भारी मात्रा में सामग्री डंप कर रखी है.

जमीन के नीचे ‘मौत का कारखाना’सूचना मिलते ही डीआरजी (DRG) और पुलिस बल ने विशेष सर्च ऑपरेशन शुरू किया. संदिग्ध स्थानों पर जमीन खोदने पर प्लास्टिक के ड्रमों और बोरियों में बंद एक पूरा ‘छोटा कारखाना’ सामने आया.
यह केवल हथियारों का जखीरा नहीं, बल्कि हथियार बनाने की पूरी यूनिट थी. नक्सली यहां एल्युमिनियम और लोहे के पाइपों से BGL और हैंड ग्रेनेड तैयार कर रहे थे.
सबसे चौंकाने वाली बरामदगी हैंडमेड SLR मैगजीन की रही. इससे स्पष्ट है कि बाहरी सप्लाई लाइन टूटने के बाद नक्सली अब जंगल में ही अत्याधुनिक हथियारों के पार्ट्स बनाने को मजबूर हो गए हैं.

क्या-क्या मिला नक्सलियों के डिपो से?पुलिस को मौके से भारी मात्रा में सामग्री बरामद हुई, जिसमें शामिल हैं:
हथियार और गोला-बारूद
- 61 BGL सेल
- 21 छोटे BGL सेल
- 46 तीर-धनुष बम
- 14 SLR खाली मैगजीन
- 1 पिस्टल मैगजीन

फैक्ट्री उपकरण
- इलेक्ट्रिक कटर मशीन
- 310 कटर व्हील
- वेल्डिंग इलेक्ट्रोड होल्डर
- ग्राइंडर मशीन
- ड्रिल मशीन
- टुलू मोटर
- इलेक्ट्रॉनिक वजन मशीन

कच्चा माल
- करीब 1000 किलो एल्युमिनियम
- 1200 से अधिक लोहे के पाइप
- भारी एल्युमिनियम छड़ें (22.5 किलो तक)
- कीलें, छर्रे और रेतमल

‘माड़ बचाओ अभियान’ का असरनारायणपुर पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन गुरिया ने इस कार्रवाई को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान लगातार जारी है और सुरक्षा बलों की यह सफलता क्षेत्र में शांति और विकास का रास्ता खोलेगी.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बरामदगी नक्सलियों की कमर तोड़ने वाली है. जिन सामग्रियों से सैकड़ों IED और BGL बनाए जा सकते थे, वे अब पुलिस के कब्जे में हैं.

