यूपी-बिहार बाहुबली का गठजोड़ चुनाव में भी दिखा !

बिहार के मोकामा क्षेत्र से बाहुबली नेता अनंत सिंह को छोटे सरकार भी कहा जाता है। उनका यूपी से गहरा रिश्ता रहा है। गोंडा के बाहुबली बृजभूषण शरण सिंह उनके खास दोस्तों में शुमार हैं। करीब 2 महीने पहले अनंत सिंह और बृजभूषण शरण सिंह की वीडियो कॉल पर लंबी बात हुई थी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया था।
हत्या के मामले में जेल जाने के बाद अनंत सिंह का प्रचार करने के लिए पूर्व सांसद और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह भी मोकामा पहुंचे। अनंत के पक्ष में प्रचार किया। वहीं, जदयू के नेता और पूर्वांचल के बाहुबली धनंजय सिंह भी जदयू प्रत्याशी के पक्ष में वोट मांगने बिहार पहुंचे।
ऐसे में सवाल पैदा होता है कि बिहार के मोकामा में हुई हत्या के मामले में गिरफ्तारी के बाद चर्चा में आए बाहुबली अनंत सिंह का यूपी कनेक्शन क्या है? दोनों के बीच कितनी नजदीकी है? बिहार और यूपी के बाहुबलियों का गठजोड़ कब-कब रहा? क्या किसी घटना में दोनों राज्यों के अपराधियों का नाम साथ आया था?
क्या है अनंत सिंह का यूपी कनेक्शन

मोकामा के अनंत सिंह का जन्म 1967 में बाढ़ विधानसभा क्षेत्र में हुआ था। पड़ोसी राज्य होने के चलते दोनों राज्यों के नेता हों या बाहुबली… गठजोड़ होना भी यहां आम बात रही है। अनंत सिंह से अधिक उनके भाई दिलीप सिंह का दबदबा बिहार के साथ यूपी में भी था। दिलीप को बड़े सरकार के तौर पर जाना जाता था। दिलीप सिंह 1985, 1990 और 1995 के बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। वह मोकामा सीट से विधायक चुने गए थे।
रेलवे के ठेकों के लिए गोरखपुर में उनका नेटवर्क काम करता था। दिलीप के दुश्मनों में प्रमुख नाम था राजन तिवारी का, जो यूपी के कुख्यात डॉन श्रीप्रकाश शुक्ल का करीबी था। साल- 2000 के चुनाव में सूरजभान सिंह ने उन्हें हरा दिया था। 2006 में दिल का दौरा पड़ने से दिलीप सिंह का निधन हुआ। इसके बाद छोटे सरकार के नाम से जाने जाने वाले अनंत सिंह ने राजनीतिक कमान संभाल ली। उसी के बाद से सूरजभान अनंत सिंह के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हो गए।
बृजभूषण और अनंत का है दोस्ताना भौकाल
सितंबर, 2025 में वायरल हुए 5 मिनट के वॉट्सऐप वीडियो कॉल ने अनंत और बृजभूषण शरण सिंह के बीच की नजदीकी सबके सामने ला दी। जिम में वर्कआउट करते बृजभूषण ने अनंत से बिहार चुनाव, राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ और PM मोदी की मां पर कथित अभद्र टिप्पणी पर चर्चा की।
अनंत ने राहुल पर तंज कसा कि भौकाल बनाने आए थे, लेकिन असर शून्य रहा। यात्रा में पैसे से जुटाई गई भीड़ थी। दोनों ने काफी देर तक हंसी-मजाक किया। बृजभूषण ने ये भी बोला था कि अगर भाजपा भेजेगी, तो मोकामा आकर मिलेंगे।

बृजभूषण ने अनंत को कहा- बड़ा भाई मोकामा चुनाव प्रचार करने पहुंचे बृजभूषण ने कहा कि आज हमारा बड़ा भाई जेल के अंदर है। आज वो बाहर होते तो शायद हम न आते। आज इसलिए हम अपील कर रहे हैं। वो जेल में बैठकर के एक-एक चेहरे को याद कर रहे होंगे। अपने एक-एक कार्यकर्ता को याद कर रहे होंगे। वहीं से पढ़ रहे होंगे कि कौन सा कार्यकर्ता क्या कर रहा? इसलिए मेरे भाइयों मैं आप सभी का धन्यवाद देना चाहता हूं। उन्होंने अनंत सिंह को जिताने की अपील करते हुए कहा था कि तट पर बैठकर लहर गिनने से नौका पार नहीं होती।
बृजभूषण शरण सिंह से रिश्ते
अनंत सिंह और बृजभूषण शरण सिंह के बीच व्यक्तिगत और राजनीतिक दोस्ती है। दोनों बाहुबली छवि वाले हैं। अनंत सिंह पर हत्या, हथियार और रंगदारी के केस, जबकि बृजभूषण पर भी हत्या और माफिया गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं।
पूर्वांचल के बाहुबली भी उतरे मैदान
में पूर्वांचल के बाहुबली धनंजय सिंह भी बिहार चुनाव के दूसरे चरण के प्रचार के आखिरी दिन बिहार में उतरे। उन्होंने कैमूर के चैनपुर में जदयू प्रत्याशी और मंत्री जमा खां के पक्ष में प्रचार किया। यहां उन्होंने नीतीश कुमार की तारीफ की और एनडीए की जीत का दावा किया। धनंजय सिंह यूपी में 2019 के लोकसभा और 2022 के विधानसभा चुनाव में जौनपुर से जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन हार गए थे। वे यूपी में जेडीयू की राजनीति करते हैं।

पुराना है यूपी और बिहार के बाहुबलियों का गठजोड़
बिहार-यूपी सीमा पर अपराधी गठजोड़ करीब 40 साल पुराना है। 1990 के दशक में ये गैंगवार जमीन, ठेके और वोट के लिए रचे गए। यूपी के गोरखपुर डॉन श्रीप्रकाश शुक्ल गुट ने मोकामा टाल में अनंत सिंह के खिलाफ गैंगवार छेड़ा। रेलवे ठेकों के लिए गोलीबारी हुई। श्रीप्रकाश शुक्ल सूरजभान का करीबी माना जाता था।
बिहार के पूर्व मंत्री की पटना के एक अस्पताल में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सूरजभान सिंह पर साजिश का आरोप लगा, जिन्होंने यूपी डॉन श्रीप्रकाश शुक्ल को मुन्ना शुक्ला से मिलवाया। दोनों राज्यों के माफिया ने मिलकर यह कांड रचा। सीवान के शहाबुद्दीन जैसे बिहारी डॉन का यूपी माफिया से आपराधिक गठजोड़ जगजाहिर रहा है।
अनंत के विरोधी की भी यूपी के माफियाओं से साठगांठ अनंत सिंह के विरोधी सूरजभान सिंह की भी यूपी के माफियाओं से गहरी साठगांठ रही है। सूरजभान भी मोकामा के ही रहने वाले हैं और बिहार के मशहूर बाहुबली नेता हैं। वे विधायक और सांसद रह चुके हैं। उनके खिलाफ भी 24 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।
1990 के दशक में सूरजभान ने यूपी के कुख्यात डॉन श्रीप्रकाश शुक्ल के साथ हाथ मिलाया। शुक्ल, जो यूपी पुलिस के साथ एनकाउंटर में मारा गया, सूरजभान से मदद मांगता था। बिहार-यूपी में जमीन, रेलवे ठेके और रंगदारी के लिए हुई हत्याओं में इन दोनों का नाम आया था।
पूर्व आईजी बोले- यूपी-बिहार के माफियाओं के बीच प्रोफेशनलिज्म का रिश्ता
आईजी के पद से रिटायर हुए और पूर्वी यूपी के अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाने वाले आरके चतुर्वेदी बताते हैं कि यूपी और बिहार के माफियाओं के बीच का रिश्ता प्रोफेशनलिज्म का ही रहा है। दोनों ओर के माफिया बड़ी घटनाओं को अंजाम देने के लिए एक-दूसरे को शूटर उपलब्ध कराते रहे हैं।

चतुर्वेदी बताते हैं कि यूपी और बिहार की सीमा जहां-जहां लगती है, वहां-वहां अपराध अधिक रहता था। 1990 के दशक में ये चरम पर था। इसकी वजह थी कोयले की तस्करी और रेलवे के ठेके। इन दोनों ही कामों में पूर्वी यूपी के माफिया पूरी तरह से लिप्त रहते थे।
गोरखपुर के वीरेंद्र शाही और हरिशंकर तिवारी एक दूसरे के धुर विरोधी थे। दोनों के ही नेटवर्क बिहार में भी फैले हुए थे। वीरेंद्र शाही की हत्या हुई तो इसमें भी बिहार के सूरजभान का नाम आया। सूरजभान की पत्नी मोकामा में अनंत सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं। कोयले के काम और रेलवे के ठेके को लेकर दोनों ही राज्यों के माफियाओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई बरसों बरस तक चलती रही।
चतुर्वेदी कहते हैं कि माफिया गिरी की शुरुआत ही कोयले और रेलवे के ठेकों से शुरू हुई। यूपी में मुख्तार अंसारी और ब्रजेश सिंह का उदय भी इन्हीं रेलवे के ठेकों और कोयले के कारोबार से हुआ।
यूपी के इन बाहुबलियों के प्रोफाइल पर नजर डालिए…



