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‘सांसद-विधायक के सम्मान में सीट से खड़े हो जाएं’…

‘सांसद-विधायक के सम्मान में सीट से खड़े हो जाएं’… फडणवीस सरकार का अधिकारियों को निर्देश

महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश के मुताबिक, अगर कोई विधायक या सांसद किसी सरकारी कार्यालय में आते हैं तो अधिकारियों को खड़े होकर उनकी बात ध्यान से सुननी चाहिए. अधिकारियों और कर्मचारियों को नेताओं से फोन पर बात करते समय विनम्र भाषा का प्रयोग करना चाहिए.

'सांसद-विधायक के सम्मान में सीट से खड़े हो जाएं'... फडणवीस सरकार का अधिकारियों को निर्देश

देवेंद्र फडणवीस सरकार ने जारी किए निर्देश.

महाराष्ट्र में अब अगर कोई विधायक या सांसद सरकारी दफ्तर में आता है तो सरकारी अधिकारियों को न सिर्फ सतर्क रहना होगा, बल्कि विशेष ध्यान भी देना होगा. उन्हें इस बात का पूरा ध्यान रखना होगा कि नेताओं का न सिर्फ बॉडी लैंग्वेज से, बल्कि उनकी वाणी से भी अनादर न हो, क्योंकि राज्य सरकार इस संबंध में विशेष दिशा-निर्देश लेकर आई है. अब सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के सामने सवाल यह है कि क्या ये नए निर्देश हैं या नेताओं की आरती उतारने की कवायद?

सांसद-विधायक की बात ध्यान से सुनेंमहाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश के मुताबिक, अगर कोई विधायक या सांसद किसी सरकारी कार्यालय में आते हैं तो अधिकारियों को खड़े होकर उनकी बात ध्यान से सुननी चाहिए. अधिकारियों और कर्मचारियों को नेताओं से फोन पर बात करते समय विनम्र भाषा का प्रयोग करना चाहिए. सरकार के फैसले में इन नियमों का उल्लंघन या असम्मानजनक व्यवहार करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.

मुख्य सचिव ने जारी किए दिशा-निर्देश

महाराष्ट्र के मुख्य सचिव राजेश कुमार ने गुरुवार को इस नए सरकारी फैसले को जारी किया. उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को उचित सम्मान देना प्रशासन के प्रति विश्वास और जिम्मेदारी की भावना पैदा करने का एक अहम हिस्सा है. सरकारी कर्मचारियों से आम आदमी के साथ अच्छा व्यवहार करने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन असल स्थिति क्या है, यह बताने की जरूरत नहीं है, लेकिन इस नए फैसले से पता चलता है कि सरकार इस बात का पूरा ध्यान रख रही है कि नेताओं के प्रति कोई अनादर न हो.

शिष्टाचार का पाठ पढ़ाएंगे

विभागों को जनप्रतिनिधियों से संबंधित पत्राचार के लिए एक अलग रजिस्टर भी रखना होगा. इस सरकारी फैसले में निर्देश दिया गया है कि इस पत्र में दी गई शिकायतों, पूछताछ, सुझावों और आपत्तियों का जवाब दो महीने के भीतर दिया जाए. अगर इस समयावधि में जानकारी देना संभव न हो तो संबंधित अधिकारी जनप्रतिनिधि को सूचित करें. सबसे बड़ी बात यह है कि अधिकारियों और कर्मचारियों को सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों के साथ विनम्रता से पेश आने का पाठ पढ़ाया जाएगा. ऐसे पाठ पाठ्यक्रम में शामिल किए जाएंगे.

जनप्रतिनिधियों की नाराजगी के बाद फैसला

पिछले कुछ दिनों से जनप्रतिनिधि अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा रिश्वतखोरी की शिकायतें कर रहे थे. यह बात भी सामने आई थी कि सरकारी अधिकारी से शिकायत पर वह सत्तारूढ़ दलों के जनप्रतिनिधियों से भी ठीक ढंग से पेश नहीं आ रहे थे. यही नहीं उन्हें अधिकारियों से मिलने तक का समय नहीं दिया जा रहा था, इसलिए कई पुराने परिपत्रों को मिलाकर एक नया जीआर जारी किया गया है.

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