कमर्शियल वाहनों को गलत सर्टिफिकेट दिया तो FIR
कमर्शियल वाहनों को गलत सर्टिफिकेट दिया तो FIR
कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच को पारदर्शी और नियंत्रित बनाने के लिए परिवहन विभाग ने अब तक का सबसे कड़ा कदम उठाया है। अब किसी भी एटीएस (स्वचालित परीक्षण केंद्र) ने गलत फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया तो उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता 2023 के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी। यह प्रावधान पहली बार लागू हुआ है।
प्रदेश में चल रहे 15 एटीएस-भोपाल, इंदौर, जबलपुर, देवास, उज्जैन, ग्वालियर सहित कई जिलों में अब आरटीओ, एआरटीओ और डीटीओ की सीधी निगरानी में आएंगे। पहले इन केंद्रों पर ऐसी निगरानी नहीं होती थी, जिस कारण अधिक शुल्क वसूली और संचालन में अनियमितताओं की शिकायतें बढ़ रही थीं।
कई वाहन मालिकों ने बताया था कि तय शुल्क से ज्यादा वसूला जा रहा है, लेकिन अधिकारियों की प्रत्यक्ष निगरानी न होने से कार्रवाई नहीं हो पाती थी।
भोपाल के आरटीओ जितेंद्र शर्मा ने कहा कि संभाग और जिला स्तर पर सुपरविजन देने का उद्देश्य यही है कि सभी एटीएस केंद्र नियमों के अनुसार काम करें। कोई वाहन मालिक अतिरिक्त शुल्क न दे। विभाग का कहना है कि इस बदलाव से पूरे प्रदेश में फिटनेस जांच अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और नियंत्रित होगी।
यदि कोई केंद्र तय शुल्क से अधिक राशि वसूलता या गलत फिटनेस पास करता पाया गया तो उस पर सीधी एफआईआर, सर्टिफिकेट रद्दीकरण और लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई होगी। निरीक्षण टीमें सभी जिलों में एटीएस केंद्रों का समय-समय पर औचक निरीक्षण करेंगी और वाहन सुधार, पुर्जों की गुणवत्ता और सेवा मानकों की जांच करके रिपोर्ट परिवहन आयुक्त को भेजेंगी।
शिकायत पर मौके पर पहुंचेंगे आरटीओ-डीटीओ
अब परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिकायत मिलते ही आरटीओ या डीटीओ मौके पर पहुंचकर सत्यापन करेंगे, और यदि अनियमितता पाई गई तो केंद्र संचालक के खिलाफ सीधी कार्रवाई होगी। यह बदलाव विभाग के सचिव मनीष सिंह द्वारा जारी आदेशों के बाद लागू हुआ है। एटीएस के रजिस्ट्रीकरण और अपील का अधिकार भी अब ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के पास होगा।

