भोपाल नगर निगम के 75 इंजीनियर को बनाया BLO सहायक, कमिश्नर की बड़ी कार्रवाई!
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भोपाल नगर निगम कार्यालय।
Bhopal Nagar Nigam Commissioner Sanskriti Jain Action: मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काम तेजी से चल रहा है। इसी बीच भोपाल नगर निगम (Bhopal Municipal Corporation) के 75 इंजीनियरों के लिए एक चौंकाने वाला आदेश जारी हुआ है। निगमायुक्त संस्कृति जैन (Commissioner Sanskriti Jain) ने उन्हें बीएलओ (booth level officer) का सहायक नियुक्त किया है।
यह फैसला उन इंजीनियरों की काम में लापरवाही और रिपोर्टिंग न देने के कारण लिया गया है। अब ये इंजीनियर मतदाता गणना और डिजिटाइजेशन में भी काम करेंगे। कमिश्नर का यह आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है।
75 इंजीनियर बनाए गए बीएलओ सहायकभोपाल नगर निगम के 75 इंजीनियरों के लिए निगमायुक्त संस्कृति जैन ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को समय पर पूरा करने के लिए इन इंजीनियरों को बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) का सहायक बनाया गया। यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि इन इंजीनियरों ने अपने नियमित कार्यों में कोई ठोस प्रगति नहीं दिखाई। निगमायुक्त ने स्पष्ट किया कि सिविल कार्यों में धीमी गति और काम में लापरवाही के कारण यह कड़ा कदम उठाया गया है। साथ ही काम में लापरवाही अब नहीं बख्शी जाएगी।
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75 इंजीनियरों की मिली नई जिम्मेदारीनिगम के कुल 75 इंजीनियरों में 5 सहायक यंत्री और 70 सब-इंजीनियर शामिल हैं। अब इनकी जिम्मेदारी केवल सिविल, जलकार्य और इलेक्ट्रिकल कार्यों तक सीमित नहीं रहेगी। इन्हें सुबह से लेकर रात तक वोटर्स से गणना फार्म इकट्ठा कर उसे डिजिटल फॉर्म में भरना होगा। इसके साथ ही, इंजीनियरों को मतदान केंद्रों पर जाकर रिपोर्टिंग का काम भी करना होगा।
मतदाता गणना और रिपोर्टिंग की जिम्मेदारीनिगम के कुल 75 इंजीनियरों में 5 सहायक यंत्री और 70 सब-इंजीनियर शामिल हैं। अब इनकी जिम्मेदारी केवल सिविल, जलकार्य और इलेक्ट्रिकल कार्यों तक सीमित नहीं रहेगी। इन्हें सुबह से लेकर रात तक वोटर्स से गणना फार्म इकट्ठा कर उसे डिजिटल फॉर्म में भरना होगा। इसके साथ ही, इंजीनियरों को मतदान केंद्रों पर जाकर रिपोर्टिंग का काम भी करना होगा।
अब इंजीनियरों को अपने विभागीय काम के साथ-साथ विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े काम करना होगा। उन्हें मतदान केंद्रों पर लैपटॉप लेकर जाना होगा और हर दो घंटे में अपनी प्रगति की रिपोर्ट देनी होगी।
लापरवाही को लेकर इंजीनियरों पर एक्शनदरअसल, निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने इंजीनियरों से उनके काम का हिसाब मांगा, लेकिन उन्हें न तो तैयार एस्टीमेट, न बुकिंग और न ही फील्ड में काम की स्थिति की सही जानकारी मिली। कोई भी इंजीनियर स्पष्ट जवाब नहीं दे सका।

