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क्या सचमुच मिलेगी ‘तारीख पर तारीख ‘ से मुक्ति ?

क्या सचमुच मिलेगी ‘तारीख पर तारीख ‘ से मुक्ति ?

सोशल मीडिया की लगाम कसने का सुझाव देने के लिए मै बीते दिनों भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की आलोचना कर चुका हूँ, लेकिन पद सम्हालने के छह दिन बाद ही मै उनकी सराहना भी करना चाहता हूँ क्योंकि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कुछ प्रभावी होने वाले बड़े बदलाव किए हैं जो 1 दिसंबर 2025 से प्रभावी होंगे। इन बदलावों का उद्देश्य मौखिक मेंशनिंग, अर्जेंट लिस्टिंग और मामले की सुनवाई टालने की प्रक्रिया में सुधार करना शामिल है, ताकि फाइलिंग को सुव्यवस्थित किया जा सके, अनावश्यक अर्जेंट मेंशनिंग कम हो, और व्यक्तिगत स्वतंत्रता व तात्कालिक अंतरिम राहत से जुड़े मामलों की तेजी सुनवाई सुनिश्चित की जा सके।
सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में चार सर्कुलर जारी किए गए हैं। व्यक्तिगत लिबर्टी व डेमोलेशन जैसे मामले में केस तुरंत लिस्ट होगा। वहीं बिना ठोस वजह तारीख या स्थगन नहीं होगा। अब तारीख पर तारीख नहीं चलेगी.लिस्टिंग और मेंशनिंग से जुड़े सर्कुलर बताते हैं कि मामलों की लिस्टिंग के लिए याचिकाकर्ताओं को अब मुख्य न्यायाधीश के सामने मौखिक मेंशनिंग करने की आवश्यकता नहीं होगी। जिन मामलों में तात्कालिता होगी उन्हें दो कार्यदिवस के भीतर सूचीबद्ध कर लिया जाएगा। चीफ जस्टिस के सामने अब मौखिक मेंशनिंग नहीं होगी और सीनियर वकील अब मेंशन नहीं करेंगे।
अदालत ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष मौखिक मेंशनिंग पर रोक लगा दी है, सिवाय उन मामलों के जिन्हें विशेष रूप से अनुमति दी गई हो। अब कोई भी वरिष्ठ वकील किसी भी पीठ के समक्ष मामलों की मेंशनिंग नहीं कर सकेंगे। इसके स्थान पर, युवा जूनियर वकीलों को मौखिक मेंशनिंग के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
आपको पता है कि भारत की न्यायपालिका तारीख पर तारीख के लिए बदनाम हो चुकी है, बल्कि इसे जुमले के तौर पर फिल्मी संवाद तक मान लिया गया है. लेकिन अब यह सुनिश्चित किया गया है कि जब व्यक्तिगत स्वतंत्रता और तात्कालिक अंतरिम राहत से जुड़े सभी नए मामलों को दो कार्यदिवस के भीतर खुद ब खुद लिस्ट किया जाएगा। इनमें नियमित जमानत व अग्रिम जमानत, जमानत रद्द करने के मामले, मृत्युदंड से जुड़े मामले, हेबियस कॉर्पस याचिकाएं (बंदी प्रत्यक्षीकरण), बेदखली या कब्जे से संबंधित मामले, डेमोलेशन से संबंधित मामले और कोई ऐसा मामला जिसमें तत्कालीक तौर पर अंतरिम आदेश की जरूरत हो।

नये परिपत्र के मुताबिक ऐसे मामलों को तमाम खामियों व त्रुटियां दूर होने और वेरिफिकेशन के बाद लिस्ट कर दिया जाएगा और इन मामलों में अब मौखिक मेंशनिंग की जरूरत नहीं होगी। मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को सत्यापित किए गए अन्य नए मामलों को अगले सोमवार को सूचीबद्ध किया जाएगा। जबकि शुक्रवार, शनिवार और सोमवार को सत्यापित किए गए मामलों को अगले शुक्रवार को सूचीबद्ध किया जाएगा।
जिन मामलों में तात्कालिक अंतरिम आदेशों की वजह से सुनवाई को निर्धारित तिथि से पहले लाने की आवश्यकता होती है, उनमें पक्षकारों को निर्धारित प्रपत्र और तत्कालीन आवश्यकता का पत्र, पिछले कार्यदिवस में दोपहर 3 बजे तक (शनिवार को 11:30 बजे तक) मेंशनिंग ऑफिसर को देना होगा। अपवाद के तौर पर केवल अग्रिम जमानत, मृत्युदंड, हेबियस कॉर्पस और अत्यावश्यक बेदखली/ध्वस्तीकरण के मामले ही मान्य होंगे।
अब अग्रिम जमानत, मृत्युदंड, हेबियस कॉर्पस, बेदखली/कब्जा और डेमोलेशन जैसे मामलों लिए फॉर्म और आवश्यकता दस्तावेज सुबह 10:30 बजे से पहले जमा करना आवश्यक है। मेंशनिंग ऑफिसर इन प्रपत्रों और पत्रों को रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल लिस्टिंग) को मुख्य न्यायाधीश के आदेश हेतु भेजेंगे। पत्र में विशेष रूप से यह उल्लेख होना चाहिए कि मामला निर्धारित तिथि तक प्रतीक्षा क्यों नहीं कर सकता।
माननीय अदालत ने दोहराया है कि नियमित सुनवाई वाले मामलों की मेंशनिंग बिल्कुल नहीं की जा सकती। केवल अर्जेंट जरूरी वाले राहत या शीघ्र सुनवाई के लिए आवेदन किए जा सकते हैं, और उन्हें मेंशनिंग ऑफिसर के माध्यम से प्रक्रिया में लाया जाएगा।उम्मीद की जाना चाहिए कि मुख्य न्यायाधीश की इस पहल से हमारी न्यायपालिका की तस्वीर कुछ न कुछ जरूर बदलेंगी. मुमकिन है कि इन बदलावों में भी कुछ खामी हो लेकिन उनके बारे में समय आने पर विचार किया जाएगा.

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