आरजीपीवी में वित्तीय सिस्टम फेल..एसओपी नहीं, ऑडिट ही नहीं, रिकॉर्ड अधूरे, ऑडिटर्स बोले- रेगुलेटरी अथॉरिटी को भेजें ये मामले?

राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) ने 2 दिसंबर को कार्यपरिषद की बैठक बुलाई है। इस बैठक में फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के साथ बैलेंस शीट रखी जाएगी। 116 करोड़ रुपए से अधिक की अनियमितता फॉरेंसिक ऑडिट में उजागर हो चुकी है। ऑडिटर्स ने रिपोर्ट में कहा है कि दस्तावेजों में व्यापक विसंगतियां, टैली और बैंक स्टेटमेंट में अंतर, आंतरिक ऑडिट का अभाव और एसओपी नहीं है।
इससे यह साफ है कि आरजीपीवी में पारदर्शी वित्तीय प्रणाली है ही नहीं। फॉरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक ये सभी तथ्य इस बात की ओर संकेत करते हैं कि इन जमा राशियों से संबंधित धन के दुरुपयोग की उच्च संभावना है, ये मामले गंभीर वित्तीय अनियमितता को दर्शाते हैं। ऑडिटर्स ने ये मामला तत्काल रेगुलेटरी अथॉरिटीज के पास भेजने की सिफारिश की है।
रिपोर्ट में आब्जर्वेशन भी बताए गए हैं। इसके अनुसार कई मामलों में टैली में दर्ज राशि और बैंक स्टेटमेंट में वास्तविक राशि में अंतर पाया गया। इनकी जांच की सिफारिश भी की गई है। ऑडिटर ने कई एफडी के मामले में यह पाया कि उसकी मैच्योरिटी की तारीख और बैंक खाते में राशि आने की तारीख में अंतर है। जिसके कारण संपूर्ण ब्याज की गणना प्रभावित हुई है।
एफडी का निर्माण व मैच्योरिटी, दोनों ही रिकॉर्ड में नहीं मिले
1. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया : एफडी का निर्माण और मैच्योरिटी, दोनों ही रिकॉर्ड में नहीं मिले। ये एफडी वित्त वर्ष 2021-22 में मिले थे। 2. केनरा बैंक: टैली में में एफडी को रिन्यू दिखाया गया है, लेकिन बैंक की पुष्टि के अनुसार एफडी मैच्योर हो चुकी है और उसकी राशि बैंक स्टेटमेंट में क्रेडिट नहीं हुई है। ये एफडी वित्त वर्ष 2021-22 में मिले थे।
फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट
- विवि के पास रखे गए कागजी रिकॉर्ड और अकाउंटिंग सिस्टम में उपलब्ध डिजिटल डेटा में काफी अंतर पाया गया है।
- किताबों में ब्याज दर्ज कर दिया गया, लेकिन बैंक से संबंधित ब्याज प्रमाणपत्र नहीं लिए गए।
- केंद्रीयकृत मिलान (रीकंसीलिएशन) प्रणाली का विश्वविद्यालय में पूरी तर से अभाव है।
- ऑडिट में पाया गया कि इंटरनल ऑडिट कई मामलों में हुआ ही नहीं, यदि हुआ तो वो अनियमित था। वित्तीय रिकॉर्ड में अंतर पाए जाने पर भी समीक्षा व सत्यापन नहीं किया।
- विवि के अफसरों ने लेजर को समय पर अंतिम रूप नहीं दिया गया।

