मध्य प्रदेश

गजब है इंदौर पुलिस! पिता नहीं मिला तो बेटे को पहना दी हथकड़ी..30 घंटे तक हिरासत में रखा?

गजब है इंदौर पुलिस! पिता नहीं मिला तो बेटे को पहना दी हथकड़ी, 30 घंटे तक हिरासत में रखा; कोर्ट ने मांगा जवाब

इंदौर हाई कोर्ट ने चंदन नगर SHO को 4 दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है. यह मामला पॉक्सो आरोपी के बेटे की अवैध हिरासत और मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा है. याचिका में पुलिस पर बिना स्पष्ट आधार हिरासत में रखने और जबरन पूछताछ का आरोप है.

गजब है इंदौर पुलिस! पिता नहीं मिला तो बेटे को पहना दी हथकड़ी, 30 घंटे तक हिरासत में रखा; कोर्ट ने मांगा जवाब

मध्य प्रदेश की इंदौर हाई कोर्ट ने चंदन नगर थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को 4 दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं. दरअसल, मामला उस याचिका से जुड़ा है जो पास्को केस के आरोपी संजय दुबे के पुत्र राजा दुबे की ओर से दायर की गई थी. जानकारी के अनुसार, कुछ दिनों पहले चंदन नगर पुलिस ने एक पास्को प्रकरण में संजय दुबे को गिरफ्तार किया था. लेकिन प्रकरण दर्ज होने के तुरंत बाद ही संजय दुबे पुलिस की गिरफ्त से फरार होने में सफल हो गया था. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संजय दुबे के बेटे राजा दुबे को हिरासत में ले लिया.

याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने उन्हें बिना किसी स्पष्ट आधार के थाने में हथकड़ी लगाकर घंटों बैठाए रखा, जो उनकी वैधानिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है. राजा दुबे ने अदालत में यह दावा भी किया है कि पुलिस ने उनसे जबरन पूछताछ की और उन्हें उस अपराध में शामिल करने का प्रयास किया, जिससे उनका कोई संबंध नहीं था. याचिका में यह भी कहा गया है कि पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी की जानकारी समय पर परिजनों को नहीं दी, जो गिरफ्तारी की अनिवार्य प्रक्रिया के विपरीत है.

आरोप सही पाए गए तो होगा एक्शन

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने चंदन नगर थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को निर्देश दिए कि वे व्यक्तिगत रूप से 4 दिसंबर को अदालत में प्रस्तुत हों. साथ ही अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि पुलिस स्टेशन के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरों की वह फुटेज भी पेश की जाए, जिसमें राजा दुबे को हिरासत में रखने की अवधि और स्थिति स्पष्ट होती हो. अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह पुलिसिया कार्रवाई गंभीर लापरवाही और अधिकारों के दुरुपयोग की श्रेणी में आएगी.

कोर्ट की तरफ से क्या कहा गया?

कोर्ट ने मामले को संवेदनशील मानते हुए पुलिस प्रशासन से पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी प्रदर्शित करने की अपेक्षा जताई है. अब 4 दिसंबर को पुलिस अधिकारी की उपस्थिति और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हाई कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा. यह मामला पुलिस की कार्यशैली और हिरासत संबंधी प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़ा करता है.

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