दिल्ली EV पॉलिसी आने से कितनी सस्ती होंगी गाड़ियां?
दिल्ली EV पॉलिसी आने से कितनी सस्ती होंगी गाड़ियां? जानिए ड्राफ्ट में क्या-क्या शामिल
दिल्ली में आने वाली EV पॉलिसी 2.0 से इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कीमतें आधी हो सकती हैं. आइए जानें नई पॉलिसी में चार्जिंग स्टेशन, बैटरी रीसाइक्लिंग और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी में क्या बड़े बदलाव होंगे.
दिल्ली की EV पॉलिसी 2.0 तैयार
दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को और बढ़ावा देने के लिए नई EV पॉलिसी 2.0 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया हैमौजूदा पॉलिसी 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रही है, इसलिए सरकार चाहती है कि नए साल से ही नई पॉलिसी लागू हो जाए. 2020 में आई पहली पॉलिसी से उम्मीद के मुताबिक बिक्री नहीं बढ़ सकी, इसलिए नई और बेहतर पॉलिसी पर काम की जा रही है.
बैटरी रीसाइक्लिंग पर होगा बड़ा फोकस
- दरअसल, सरकार अब एक मजबूत बैटरी रीसाइक्लिंग सिस्टम बनाने जा रही है, क्योंकि EV बैटरियों की उम्र लगभग आठ साल होती है. इसलिए पहली बार इस्तेमाल की हुई बैटरियों को सुरक्षित तरीके से इकट्ठा करने से लेकर रीसाइक्लिंग तक की पूरी व्यवस्था तैयार की जाएगी. इसके साथ ही चार्जिंग नेटवर्क को भी बड़े पैमाने पर बढ़ाने की योजना है. सरकार का लक्ष्य है कि साल 2030 तक दिल्ली में 5000 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएं, जहां Fast और आसान चार्जिंग उपलब्ध हो. इसके लिए मल्टी-लेवल पार्किंग, RWA परिसर, सरकारी इमारतों और बड़ी सड़कों के किनारे स्टेशन लगाने की योजना है. सरकार का मानना है कि EV को पॉपुलर बनाने के लिए चार्जिंग का आसान होना सबसे जरूरी है.
कीमतों में राहत की उम्मीद
- नई EV पॉलिसी में शहर की छोटी गलियों, भीड़भाड़ वाले बाजारों और मेट्रो स्टेशनों के लिए नई इलेक्ट्रिक वैन चलाने का प्रस्ताव है, जिनमें सात यात्रियों और एक ड्राइवर के बैठने की जगह होगी. इससे लास्ट-माइल कनेक्टिविटी आसान होगी. साथ ही E-रिक्शा के लिए भी तय रास्तों की योजना बनाई जा रही है, ताकि उनका संचालन बेहतर हो सके. वहीं, सूत्रों के मुताबिक सरकार इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर 50% तक की छूट देने पर विचार कर रही है, जो गाड़ी की मार्केट वैल्यू के आधार पर होगी, लेकिन इस पर अंतिम फैसला कैबिनेट लेगी. अगर ऐसा होता है तो EV की कीमतें लोगों के लिए काफी कम हो सकती हैं. इस पॉलिसी से प्रदूषण कम होने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट बढ़ाने और बैटरी,चार्जिंग सेक्टर में नए रोजगार बनने की उम्मीद है.

