ईडी के कहने पर दोबारा हुई बंद केस की पड़ताल, निकला 2000 करोड़ का घोटाला …21 आरोपियों में भाजपा नेता के बेटों के नाम शामिल !!!!
ईडी के कहने पर दोबारा हुई बंद केस की पड़ताल, निकला 2000 करोड़ का घोटाला; क्या है पूरा मामला?
राजस्थान में मिड डे मील घोटाले का खुलासा हुआ है। पहले पुलिस ने केस बंद कर दिया था, लेकिन ईडी के कहने पर दोबारा जांच शुरू हुई। अब राजस्थान पुलिस की एसीबी ने 2000 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले के सबूत पाए हैं। यह घोटाला कोरोना काल में बच्चों को घर पर खाद्य सामग्री पहुंचाने से जुड़ा है। नई एफआईआर दर्ज कर आरोपियों पर कार्रवाई की जा रही है।

नई दिल्ली। पुलिस किसी केस की जांच बंद कर दे और फिर उसमें 2000 करोड़ रुपये का घोटाला निकल आए। ऐसा कम ही होता है। लेकिन राजस्थान में ऐसा हुआ है। राजस्थान पुलिस ने मिड डे मिल घोटाले के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए अदालत में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी।
लेकिन ईडी के कहने पर इसकी दोबारा जांच शुरू हुई तो राजस्थान पुलिस को ही 2000 करोड़ रुपये के घोटाले के सबूत मिल गए। अब राजस्थान पुलिस ने नई एफआइआर दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। दरअसल मामला कोरोना काल में राजस्थान के 66,341 शिक्षण संस्थानों में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले 62.67 लाख छात्रों को मिड डे मिल देने का है।
कोरोना के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे। इसे देखते हुए बच्चों को घर पर ही खाद्य सामग्री और उससे खाना बनाने में लगने वाले खर्च को पहुंचाने का फैसला किया गया था। मार्च 2020 से मार्च 2022 तक यह प्रक्रिया चली। लेकिन बच्चों को मिड डे मिल नहीं मिलने की बहुत सारी शिकायतें मिलने के बाद राजस्थान पुलिस ने अलग-अलग एफआइआर दर्ज कर इसकी जांच शुरू कर दी।
राजस्थान पुलिस की एफआइआर को आधार बनाते हुए ईडी ने इस मामले में मनी लांड्रिंग की जांच भी शुरू कर दी। लेकिन 2023 में राजस्थान विधानसभा चुनाव के ठीक पहले राजस्थान पुलिस ने घोटाले के सबूत मिलने का हवाला देते हुए इन मामलों में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी। जबकि ईडी की जांच रही और उसमें घोटाले के ठोस सबूत मिले।
एसीबी को पड़ताल की जिम्मेदारी
ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जांच एजेंसी के अनुरोध और ठोस सबूतों को देखते हुए राजस्थान के डीजीपी ने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को इसकी पड़ताल की जिम्मेदारी सौंपी। खुद राजस्थान पुलिस की एसीबी ने इस मामले में खाद्य सामग्री को मंहगे दामों में खरीदने से लेकर बच्चों को वितरित किये बिना ही सप्लायर को पूरा भुगतान किये जाने तक बड़े पैमाने पर धांधली के सबूत खोज लिए।
एसीबी के अनुसार इसमें 2000 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले के सबूत मिले हैं। राजस्थान पुलिस की एफआइआर के बाद ईडी की मनी लांड्रिंग का केस भी मजबूत हो गया है और आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून और मनी लांड्रिंग रोकथान कानून दोनों तहत कार्रवाई हो सकेगी।
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कोविड-19 महामारी के दौरान स्कूल बंद रहने की अवधि में राज्य में मिड-डे-मील योजना में 2000 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस घोटाले में कॉनफैड (CONFED), केंद्रीय भंडार और निजी फर्मों से जुड़े 21 नामजद आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू की। यह मामला साल 2023 से चल रहा है।
घोटाले में चौंकाने वाले नाम भी सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार मामले में गहलोत सरकार के पूर्व मंत्री और भाजपा नेता राजेंद्र यादव के बेटे और रिश्तेदारों के नाम भी हैं। यादव के बेटे मधुर यादव और त्रिभुवन यादव भी इसमें शामिल हैं। वहीं कुछ रिश्तेदारों के नाम भी एफआईआर में हैं, जो फर्म का अलग-अलग काम संभालते हैं।
दरअसल, कोरोना काल में स्कूली विद्यार्थियों को खाना उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने कॉनफैड के माध्यम से दाल, तेल, मसाले आदि के कॉम्बो पैक की सप्लाई की थी। दावा किया गया था कि यह सामान FSSAI और एगमार्क मानकों के अनुरूप है और राज्य के स्कूलों तक डोर-स्टेप डिलीवरी के जरिए पहुंचाया गया।
योजना में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलने पर ACB ने प्राथमिक जांच शुरू की। इसके बाद विस्तृत जांच की गई। जांच के दौरान कई मामलों में वास्तविक खरीद और आपूर्ति किए बिना ज्यादा दरों पर फर्जी बिल प्रस्तुत करने की जानकारी भी सामने आई।

नियमों में बदलाव कर चहेती फर्मों को पहुंचाया फायदा ACB की जांच में सामने आया कि मिड-डे-मील योजना से जुड़े अधिकारियों और कॉनफैड के कुछ अधिकारियों ने मिलीभगत कर नियमों में बदलाव किए। इसके चलते योग्य और पात्र फर्मों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, जबकि चहेती निजी फर्मों को अनुचित फायदा पहुंचाते हुए टेंडर आवंटित किए गए।
जांच में यह भी पाया गया कि टेंडर प्राप्त फर्मों ने आगे अवैध रूप से सब-लेटिंग (दूसरी फर्म को काम सौंपना) कर दी। इससे फर्जी आपूर्तिकर्ताओं और ट्रांसपोर्टरों का संगठित नेटवर्क तैयार किया गया।

बिना आपूर्ति फर्जी बिल, सरकारी भुगतान जांच के दौरान कई मामलों में यह तथ्य सामने आया कि वास्तविक खरीद और आपूर्ति किए बिना ही ज्यादा दरों पर फर्जी बिल प्रस्तुत किए गए। उन्हीं के आधार पर भुगतान उठा लिया गया। धोखाधड़ी, जालसाजी और साठगांठ के चलते सरकारी खजाने को करीब 2000 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है।
इन 21 नामजद आरोपियों पर मामला दर्ज ACB ने कॉनफैड से जुड़े अधिकारियों सांवतराम सहायक लेखाधिकारी, राजेन्द्र मैनेजर (नागरिक आपूर्ति), लोकेश कुमार बापना मैनेजर (नागरिक आपूर्ति), प्रतिभा सैनी असिस्टेंट मैनेजर, योगेंद्र शर्मा मैनेजर (आयोजना), राजेंद्र सिंह शेखावत मैनेजर, रामधन बैरवा गोदाम कीपर मार्केटिंग सेक्शन, दिनेश कुमार शर्मा सुपरवाइजर मार्केटिंग सेक्शन के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
वहीं कंवलजीत सिंह राणावत, मधुर यादव, त्रिभुवन यादव, सतीश मूलचंद व्यास, दीपक व्यास, रितेश यादव सहित केंद्रीय भंडार से जुड़े अधिकारियों में शैलेश सक्सैना रीजनल मैनेजर, बी.सी. जोशी डिप्टी मैनेजर, चंदन सिंह असिस्टेंट मैनेजर के खिलाफ भी नामजद मामला दर्ज किया है।
इस पूरे घोटाले में निजी फर्में. मैसर्स तिरूपति सप्लायर्स, मैसर्स जागृत इंटरप्राइजेज, मैसर्स एमटी इंटरप्राइजेज, मैसर्स साई ट्रेडिंग के प्रोपराइटर सहित अन्य संबंधित व्यक्ति शामिल रहे।

आरोपियों की भूमिका, वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों की जालसाजी की जांच जारी
एसीबी की ओर से मामले में आरोपियों की भूमिका, वित्तीय लेन-देन, दस्तावेज की कूटरचना और सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। एविडेंस, रिकॉर्ड की जांच और अन्य अनुसंधानात्मक कार्रवाई जारी है। दोष सिद्ध होने पर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
2024 में भाजपा में शामिल हुए हुए थे यादव
राजेंद्र यादव पूर्ववर्ती गहलोत सरकार में गृह राज्य मंत्री थे। साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले वे भाजपा में शामिल हो गए थे। जयपुर के कोटपूतली के रहने वाले राजेंद्र यादव लंबे समय से राजनीति में हैं। साथ ही वे कारोबारी भी हैं। यादव के मंत्री रहने के दौरान ही उनके आवास और ठिकानों पर इनकम टैक्स की रेड हुई थी।
जयपुर, कोटपूतली और उत्तराखंड सहित कुछ अन्य राज्यों में स्थित ठिकानों पर इनकम टैक्स की टीम ने छापे मारे थे। पूर्व मंत्री राजेंद्र यादव पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। वे दो बार कोटपूतली से कांग्रेस के विधायक रहे।

