ग्वालियर स्मार्ट सिटी:स्मार्ट वॉशरूम कैफे में टीम को चलते मिले रेस्टोरेंट !!!

स्मार्ट सिटी के दो प्रोजेक्ट अफसरों की अनदेखी में फेल होते नजर आ रहे हैं। स्थिति यह है कि पब्लिक बाइक शेयरिंग प्रोजेक्ट पहले से ही फेल हो गया था। अब जिम्मेदार अधिकारियों के निरीक्षण के अभाव में वॉशरूम को कैफे की तरह चलाने के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। निगमायुक्त संघ प्रिय के निर्देश पर शुक्रवार को स्मार्ट सिटी के इंजीनियर जब शहर में संचालित स्मार्ट वॉशरूम कैफे की पड़ताल करने के निकले तो अधिकांश में अतिक्रमण मिला।
टीम के सदस्यों को सबसे ज्यादा अतिक्रमण कलेक्ट्रेट के पीछे पेट्रोलपंप के पास बने स्मार्ट वॉशरूम, चिड़ियाघर कैंपस, हाईकोर्ट तिराहे के सामने, बैजाताल आदि जगह मिला। सिटी सेंटर में बने स्मार्ट वॉशरूम में स्टॉल तक सजा मिला। उसे हटाने के निर्देश अधिकारियों ने दिए। ग्वालियर स्मार्ट सिटी ने लोगों की सुविधा को ध्यान में रखकर स्मार्ट वॉशरूम बनाए।
उसमें स्वल्पाहार की व्यवस्था की, लेकिन जिन कंपनी ने शहर के 20 स्मार्ट वाशरूम बनाए। उन्होंने निगम की बेशकीमती जगह को घेरकर रेस्टोरेंट बना दिए। निरीक्षण दल में स्मार्ट सिटी के इंजीनियर अनिल चौहान, नागेंद्र सक्सेना, अभिषेक शर्मा आदि शामिल रहे।
9 करोड़ का प्रोजेक्ट: 2 चरण में बने 20 वॉशरूम
स्मार्ट सिटी ने 9 करोड़ के प्रोजेक्ट में 2 चरण में 10-10 स्मार्ट वॉशरूम में शहर में विभिन्न स्थानों पर बनाए है। एक वॉशरूम के लिए 700 वर्गफीट एरिया दिया। इसके संचालन करने वाले कंपनी सिर्फ 3 हजार रुपए (प्रत्येक वॉशरुम) किराया देती है।
मतलब 20 वॉशरूम से एक माह में 60 हजार रुपए मिलते है। बदले में स्मार्ट वॉशरूम चलाने वालों ने निगम के डेढ़ गुना जमीन पर अतिक्रमण कर कैफे बना लिए है। इन्हें ऐसे सजाया कि वॉशरूम का उपयोग कम रेस्टोरेंट का उपयोग ज्यादा हो।
अतिक्रमण की नपाई के बाद लगेगा जुर्माना
निगम जहां एक और सरकारी जमीन को मुक्त कराने में लगा है। वहीं स्मार्ट वॉशरूम की निगरानी करने वाले जिम्मेदारी की मिली भगत से निगम की जमीन पर अतिक्रमण हो गया। ये मामला सामने आने के बाद निगम उक्त जमीन की नपाई कराने की तैयारी में है। इससे निगम को लाखों रुपए की आय जुर्माने के रूप में मिलेगी और अतिक्रमण भी हटाया जाएगा।
जनता ने नकारा, अब IITTM में साइकिल दौड़ाने की तैयारी
ग्वालियर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कार्पोरेशन ने वर्ष 2017 में शहर में ‘पब्लिक बाइक शेयरिंग’ योजना शुरू की थी। समय पर साइकिलों का मेंटेनेंस नहीं करने, शहर में साइकिल ट्रेक नहीं होने के कारण लोगों ने इससे दूरी बना ली। अब इस प्रोजेक्ट की कबाड़ हो रही साइकिलें फिर से स्मार्ट सिटी दौड़ाने की तैयारी में है।
हाल ही में भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान (आईआईटीटीएम) ने ग्वालियर स्मार्ट सिटी से 100 साइकिलों की डिमांड की है। ये साइकिलें संस्थान के अंदर छात्र-छात्राएं चलाएंगे। वहीं ट्रिपल आईटीएम से भी बातचीत चल रही है। ये साइकिलें स्मार्ट सिटी नि:शुल्क देगी। इस तरह कंडम होती साइकिलों को स्मार्ट सिटी के अफसर फिर से चलाने की जुगाड़ में है। कुछ समय पहले इसे फिर से चालू करने के लिए ठेका देने पर चर्चा हुई। लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।
आईआईटीटीएम के डायरेक्टर प्रो.आलोक शर्मा के अनुसार संस्थान में लगभग 300-400 विद्यार्थी हैं। इनके लिए 100 साइकिलें मांगी हैं। यह साइकिलें छात्रों के जीवनशैली का हिस्सा बनेंगी।

