ईरानी डेरा…..50 गुंडे और बदमाश रिकॉर्ड में वांटेड, इनमें 15 फरार ईरानियों पर देशभर में अपराध दर्ज

निशातपुरा स्थित अमन कॉलोनी में शनिवार-रविवार की रात पुलिस की छापामार कार्रवाई के दौरान पकड़े गए 22 गुंडे-बदमाशों व 10 महिला आरोपियों को जेल दाखिल करने में पुलिस को दो दिन लग गए। कार्रवाई के बाद 50 से अधिक ईरानी गुंडे-बदमाश अब भी पुलिस रिकॉर्ड में वांटेड हैं।
इनमें 15 फरारशातिर बदमाश शामिल हैं, जिनके खिलाफ देश के कई शहरों में गंभीर अपराध दर्ज हैं। इधर, पुलिस ने ईरानी डेरे से जब्त बाइक और मोबाइल के मालिकों की तलाश शुरू कर दी है। बाइक के इंजन-चेचिस नंबर और मोबाइल के आईएमईआई नंबर से असली मालिकों की सर्चिंग शुरू की गई है।
लंबे समय से फरार चल रहे ईरानियों की धरपकड़ के लिए डीसीपी जोन-04 मयूर खंडेलवाल के नेतृत्व में 400 से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने ईरानी डेरे को घेरा था। विरोध में ईरानियों ने पथराव किया। इसके बाद पुलिस ने डेरे से गुंडे-बदमाशों व महिलाओं को गिरफ्तार किया था।
सभी 32 आरोपियों के मेडिकल कराने के बाद कोर्ट पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया था। जेल दाखिला रात 12 बजे तक चला। 10 को वापस लाना पड़ा था, जिन्हें सोमवार को जेल भेजा गया।
नकली पिस्टल, वाहनों की फर्जी नंबर प्लेट, यूएस डॉलर जब्त किए थे
कार्रवाई के दौरान ईरानी डेरा से पुलिस ने बिना नंबर की महंगी 21 बाइक, 51 मोबाइल फोन, एक एप्पल का टेबलेट, 9 यूएस डॉलर, एक ईरानी रियाल राशि 10 हजार, फर्जी पत्रकार होने संबंधी माइक तथा आईडी, एक नकली पिस्टल, कई राज्यों की वाहनों की फर्जी नंबर प्लेट जब्त की हैं।
बाइक के इंजन और चैचिस नंबर वाहन निर्माता कंपनियों को भेजकर वाहन मालिकों की जानकारी मांगी गई है। पुलिस को आशंका है कि बाइक चोरी की हैं, जिन्हें अलग-अलग स्थान से चोरी किया गया है। रजिस्ट्रेशन नंबर से इन मोटर साइकिलों के चेन लूट, मोबाइल लूट एवं अन्य अपराध में शामिल होने का पता चलेगा।
इसके अलावा मोबाइल के आईएमईआई नंबर भी सर्च किए जा रहे हैं। नेफीस से बदमाशों का रिकॉर्ड भी निकाला गया। इसमें ईरानियों ने कई शहरों में अपने नाम भी बदले।
8 साल में 5 बार हमला.… एडिशनल पुलिस कमिश्नर अवधेश गोस्वामी का कहना है कि पिछले आठ साल में कार्रवाई के दौरान ईरानियों ने पुलिस पर चार से पांच बा र हमला किया है। पुलिस ने गिरफ्तार ईरानियों का नेफीस से रिकॉर्ड खंगाला है।
इसमें खुलासा हुआ है कि इन शातिर बदमाशों ने दूसरे राज्यों में वारदात की। पुलिस ने जब इन्हें गिरफ्तार किया तो आरोपियों ने अपने नाम बदल लिए थे। फिंगर प्रिंट के मिलान से फर्जी नामों का पता चला है। नेफीस से सात बदमाशों का अन्य राज्यों में भी रिकॉर्ड प्राप्त हुआ है। गिरफ्तार आरोपी जिन राज्यों या शहरों में वांटेड हैं, वहां की पुलिस को सूचित किया गया है।
कई मामलों में इन बदमाशों का रिकॉर्ड और नाम बदला मिला
मीसम अली को जीआरपी भोपाल ने चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया तो उसने अपना नाम मीसा अली लिखाया था। शाबिर अली को नासिक, महाराष्ट्र पुलिस ने पकड़ा तो उसने अपना नाम जाफर अली निवासी भूसावल बताया था। इसी तरह मोहम्मद सैयद के खिलाफ मुंबई के अलग-अलग थानों में धोखाधड़ी के पांच मुकदमे दर्ज हैं, जिसमें आरोपी का नाम इकबाल सुलैफा जाफरी निवासी पनेखान भिवंडी, महाराष्ट्र दर्ज है।
मास्टर माइंड जुबेर अली के खिलाफ दिल्ली, विदिशा और नर्मदापुरम में धोखाधड़ी एवं चोरी के तीन अपराध दर्ज हैं। दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड में उसका अपना नाम मुख्तार हुसैन निवासी बालगंज बस्ती होशंगाबाद दर्ज है। विदिशा पुलिस के रिकॉर्ड में जुबेर ईरानी और नर्मदापुरम के रिकॉर्ड में जावेर उर्फ मुरवार लिखा है।
तालिब अली के खिलाफ भोपाल में दो मुकदमे दर्ज हैं, जिसमें एक अपराध में उसने अपना नाम सालीग अली लिखाया है। रिजवान हुसैन के खिलाफ ठाणे, नर्मदापुरम और सीहोर में चार अपराध दर्ज हैं। नूरजहां गुलाम अब्बास को लूट के मामले में नर्मदापुरम में सजा हुई थी।
