हादसों में 35 हजार मौतें पैदल यात्रियों की …481 ब्लैक स्पॉट्स पर बढ़ाएंगे सुरक्षा ???
भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सड़क हादसों में लगातार बढ़ती पैदल यात्रियों की मौतों को देखते हुए नए डिजाइन के फुटपाथ और सुरक्षित रोड क्रॉसिंग विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वर्ष 2023 में देश में सड़क दुर्घटनाओं में हुई कुल मौतों में से करीब 20.4 प्रतिशत यानी 35,221 मौतें पैदल यात्रियों की थीं। सड़क हादसों में कमी लाने और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित सड़क ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से सोमवार दोपहर मप्र परिवहन आयुक्त के कैंप कार्यालय में अहम बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा ने की। इसमें प्रदेश के सड़क नेटवर्क से जुड़े सभी प्रमुख विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
सभी प्रमुख एजेंसियां हुईं शामिल : बैठक में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), नगरीय निकाय, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और मप्र सड़क विकास निगम के अधिकारी मौजूद रहे। इन विभागों के पास प्रदेश की सबसे अधिक सड़कों का प्रबंधन है। इसके अलावा पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और एनआईसी के नोडल अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया।
आईआरसी मानकों पर होंगे फुटपाथ और क्रॉसिंग
बैठक में तय किया गया कि फुटपाथ और रोड क्रॉसिंग के डिजाइन इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) के मापदंडों के अनुरूप तैयार किए जाएंगे। योजना को अंतिम रूप देने के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजा जाएगा, ताकि आवश्यक स्वीकृति प्राप्त की जा सके।
ब्लैक स्पॉट्स पर रहेगा खास फोकस
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024 के दौरान प्रदेशभर में 481 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां सड़क हादसों की आशंका अधिक रहती है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और दुकानदारों को बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) की ट्रेनिंग देने का निर्णय लिया गया है, साथ ही डायल-112 व 108 एंबुलेंस सेवाओं के ड्राइवरों को एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) और सीपीआर की बेसिक ट्रेनिंग देने पर भी सहमति बनी।
पैदल यात्रियों की सुरक्षा.\
..2026 तक हादसों में कमी का लक्ष्य अधिकारियों के अनुसार यह पूरी कवायद वर्ष 2026 तक सड़क हादसों में प्रभावी कमी लाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। बेहतर सड़क डिजाइन, प्रशिक्षित रिस्पॉन्स सिस्टम और स्थानीय लोगों की भागीदारी से पैदल यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत करने की योजना है।
क्यों जरूरी है पैदल यात्रियों की सुरक्षा
- पैदल यात्री सड़क पर सबसे ज्यादा असुरक्षित श्रेणी में आते हैं
- फुटपाथ और सुरक्षित क्रॉसिंग न होने से हादसों का खतरा बढ़ जाता है
- हादसे के बाद शुरुआती 10-15 मिनट में सही मदद मिलने पर जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है
भारत में सड़क हादसे (2023)
कुल मौतें:- 1,72,890 दो-पहिया वाहन चालकों/सवारों की मौतें – 54,000 पैदल यात्रियों की मौतें:- 35,221 (20.4%)
2022 की तुलना में बढ़ोतरी 7.3 प्रतिशत
हादसों में शामिल प्रमुख वाहन
- दो-पहिया वाहन: – 28.26%
- कार, टैक्सी और वैन: – 24.78%

