2 करोड़ का अवॉर्ड…409 करोड़ का खर्च…जिनके नाम गबन में आए, उन अफसरों को ही दी जिम्मेदारी!!!!
जल संचयन जन भागीदारी अभियान में हुए फर्जीवाड़े की पर्तें एक के बाद एक खुलती जा रही हैं। राष्ट्रपति से अवॉर्ड लेने वाले खंडवा कलेक्टर और सीईओ …… के खुलासे के बाद सवालों में घिरे हुए हैं। शासन स्तर से दो अलग-अलग कमेटियां जांच कर रही हैं।
अब तक जो निकलकर सामने आया, उसमें जमीनी स्तर पर काम हुआ नहीं और पोर्टल पर उन कामों के होने की फोटो अपलोड कर दी गईं। पड़ताल में यह भी सामने आया है कि देश में अव्वल आने के लिए नंबर बढ़ाने का टारगेट सेट किया गया था।
खंडवा जिला प्रशासन ने अभियान के तहत कुल एक लाख 29 हजार 41 जल संरचनाओं का विकास किए जाने का दावा किया। इन जल संरचनाओं पर करीब 409 करोड़ रुपए का खर्च किया जाना सरकार को बताया, लेकिन इन्हीं दावों पर सवाल उठ गए।
पंचायत को शर्तों के साथ टारगेट दिए गए। कई कामों की जिम्मेदारी उन इंजीनियरों को दे दिए गए, जिनके दामन पर कहीं न कहीं दाग लगे, यानी किसी न किसी काम में गबन के उन पर आरोप लगे।
….. इस मामले में उन अधिकारियों की पड़ताल की, जो इस अभियान में अहम जिम्मेदारी निभा रहे थे, हालांकि इन पर गबन के आरोप भी कभी न कभी लगे, पढ़िए यह रिपोर्ट….
वे इंजीनियर, जिन्हें टारगेट की मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा गया
नाम नहीं छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि, कलेक्टर ऋषव गुप्ता और सीईओ जिला पंचायत डॉ. नागार्जुन बी गौड़ा ने अवॉर्ड लाने के लिए टारगेट बेस्ड काम किया। उन्होंने जिन्हें काम की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी, उनमें से कई अधिकारी और इंजीनियर्स पर पहले भी गबन के आरोप लगे हैं।

इन अधिकारियों के प्रमोशन, नियुक्ति ने सिस्टम पर उठाए सवाल
- डीके कैथवास, ईई-आरईएस : लंबे समय से खंडवा जिले में ही पदस्थ। सहायक यंत्री से कार्यपालन यंत्री के पद पर प्रमोशन और पोस्टिंग भी खंडवा में ही। पुनासा जनपद में सहायक यंत्री रहते हुए घाट घोटाले में नाम सामने आया। जहां पानी नहीं था, वहां घाट निर्माण को स्वीकृति दे दी। घोटाला सामने आया तो खुद ने जांच की और खुद पर ही भ्रष्टाचार के आरोप तय भी कर दिए।
- पंकज कुमार डाले, जनपद सीईओ : छैगांवमाखन जनपद पंचायत के सीईओ हैं। पूर्व में मनरेगा के जिला प्रभारी रह चुके हैं। संविदाकर्मी होने के बाद भी सीईओ जिला पंचायत डॉ. नागार्जुन बी गौड़ा ने सीईओ का चार्ज दिया। विवाद गहराया तो सफाई दी कि सिर्फ प्रशासकीय चार्ज दिया गया है। वित्तीय प्रभार अन्य अधिकारी के पास रहेंगे।
- गौरव रघुवंशी, सहायक यंत्री : जिला पंचायत अध्यक्ष पिंकी वानखेड़े का आरोप है कि उपयंत्री गाैरव रघुवंशी को नियमों के खिलाफ जाकर प्रमोशन दिया गया। रघुवंशी की सेवा अवधि महज 7 साल की है, बावजूद उन्हें सहायक यंत्री के पद प्रमोट करके खंडवा जनपद पंचायत का तकनीकी मुखिया बना दिया गया।
- निकिता मंडलोई, संयुक्त कलेक्टर : राज्य प्रशासनिक सेवा में संयुक्त कलेक्टर हैं। दूसरी बार खंडवा जनपद पंचायत के सीईओ का चार्ज मिला है। जिला पंचायत में एडिशनल सीईओ का पद भी है। वहीं, निकिता मंडलोई ही जल संचयन अभियान की जिला नोडल अधिकारी थीं।

अब समझिए नंबर बढ़ाने के टारगेट काे…
पंचायतों से जुड़े सूत्रों की माने तो जल संरक्षण के कामों को लेकर प्रत्येक ग्राम पंचायत का टारगेट सेट किया गया था। टारगेट ऐसा कि पहले काम स्वीकृत कराओ, उसे पोर्टल पर दर्शाओ, थोड़ी-बहुत राशि निकालो और फिर उस काम को क्लोज कर दो। यानी ज्यादा पैसा खर्च मत करो और काम अधूरा छोड़ दो। बस पोर्टल पर उसे प्रगतिरत बता दो, ताकि वह गिनती में आ जाए।
इस टारगेट को ऐसे समझ सकते हैं कि, एक ग्राम पंचायत ने चार खेत तालाब के काम स्वीकृत करा लिए, जिनकी लागत 6-6 लाख रुपए थी, उन्हें स्टार्ट किया और महज एक-दो मस्टरोल (करीब 10% राशि) निकाले और काम में तकनीकी खामी बताकर उसे क्लोज कर दिया।
इन चार कामों की फोटो पोर्टल पर अपलोड करा दी गई। अवॉर्ड नॉमिनेशन के दौरान काम को प्रगतिरत बता दिया। बाद में उसे क्लोज कर दिया, ताकि अब कोई पैसा नहीं निकल पाए।
16 तरह से ज्यादा काम बताए, 409 करोड़ खर्च किए
जल संचयन, जनभागीदारी अभियान के तहत खंडवा जिला प्रशासन ने एक लाख 29 हजार 41 कामों के लिए खर्च का ब्यौरा भी दिया है। इन कामों पर करीब 409 करोड़ रुपए खर्च बताया गया है। पानी बचाने के लिए करीब 16 से ज्यादा प्रकार के काम बताए गए।
रूफटॉप रैन वाटर हार्वेस्टिंग, डगवैल रिचार्ज, रिचार्ज पीट, गली प्लग, ड्राय बोर रिचार्ज, खेत तालाब, नाला ट्रेंच, बोरी बंधान, मेड बंधान सहित जीर्णोद्वार कार्य, स्टाप और चेक डैम निर्माण जैसे प्रोजेक्ट हैं।
| योजना | कार्य | लागत |
| रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग | 39,000 | 39 करोड़ |
| डगवेल रिचार्ज | 23,750 | 59 करोड़ |
| रिचार्ज पिट | 13,826 | 11 करोड़ |
| गली प्लग | 11,280 | 16.92 करोड़ |
| हैंडपंप रिचार्ज | 6,528 | 13 करोड़ |
| ड्राय बोर रिचार्ज | 750 | 1.5 करोड़ |
| खेत तालाब | 1,500 | 39 करोड़ |
| नाला ट्रेंच | 3,269 | 57 करोड़ |
| बोरी बंधान | 3,960 | 1.98 करोड़ |
| मेड बंधान | 7,455 | 18 करोड़ |
| जीर्णोद्धार | 2,462 | 25 करोड़ |
| रिचार्ज शाफ्ट | 1,500 | 3.75 करोड़ |
| कंटूर खाई | 68 | 86 लाख |
| स्टॉप / चेक डैम | 58 | 3.48 करोड़ |
| छोटे तालाब | 4,800 | 72 करोड़ |
| नाली कार्य | 2,275 | 45.5 करोड़ |
| कुल | 1 लाख 29 हजार | 409 करोड़ |
| स्रोत-अवॉर्ड से पहले जिला प्रशासन ने राज्य और केंद्र शासन को भेजी लिस्ट। |
पंचायतों से सड़क-नाली, पेयजल का पैसा खर्च कराया
जल संरक्षण के कामों पर बताए गए खर्च के 409 करोड़ रुपए का ज्यादातर हिस्सा ग्राम पंचायतों के अधिकार क्षेत्र का है, जिसमें 5वां वित्ता और 15वां वित्त जैसे मद से काम कराना बताया गया है।
इस मद की राशि से ग्राम पंचायतें सीसी रोड़, नाली निर्माण, दुकान निर्माण, हाट बाजार विकास, पेयजल आपूर्ति व सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे कामों पर पैसा खर्च करती हैं, लेकिन पंचायतों से जल संरक्षण के काम कराए गए, जो कि प्रारंभिक पड़ताल अनुसार- ईमानदारी से नहीं किए गए।
चंदा नहीं मिला, जनभागीदारी से सिर्फ बोरी बंधान
जिला प्रशासन द्वारा अपने दावे में कहा गया कि प्रत्येक काम में जनभागीदारी निहित है, लेकिन इस काम में किसी भी व्यक्ति, संस्था या संगठन ने एक रुपए का चंदा नहीं दिया है।
प्रशासन ने बोरी बंधान जैसे कार्य के लिए एकमात्र जनभागीदारी का दावा किया है, यह इसलिए भी, क्योंकि गांव-गांव में बोरी बंधान के कार्य मप्र शासन की जन अभियान परिषद के द्वारा किए गए हैं। बाकी अधिकांश काम सीएसआर फंड और मनरेगा से कराए गए हैं।

दीवार पर पाइप लगाकर बता दिया रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
जल संचयन अभियान के तहत हुए फर्जीवाड़े में खेत, खलिहान तो दूर की बात है, सरकारी भवनों पर भी फर्जीवाड़ा किया गया है। ग्रामीणों को प्रेरित करने के लिए जिन ग्राम पंचायतों ने अपनी बिल्डिंगों पर रूफटाप रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए हैं, उसकी असलियत ही कुछ और है।
स्टेट हाईवे पर स्थित ग्राम मांडला (हरसूद जनपद) में सरकारी स्कूल पर सिर्फ पाइप लगा था। भास्कर रिपोर्टर ने देखा तो छत पर न मुंडेर थी और ना ही जमीन में गड्ढा था। सिर्फ दीवार पर पाइप लगाकर उसे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बता दिया गया। इसकी फोटो तक खिंचवा ली गई।
कार्रवाई के डर से अब खोदने लगे गड्ढे
इधर, छैगांवमाखन जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत संगवाड़ा में फर्जीवाड़ा सामने आया, तब जिम्मेदारों की नींद खुली। कार्रवाई के डर से आनन-फानन में अब खेतों पर जाकर डगवैल के गड्ढे खुदवाएं जा रहे हैं, जबकि पूर्व में ही डगवैल निर्माण की राशि निकाली जा चुकी है।
ग्रामीण गोपाल राजपूत ने बताया कि, गांव में किसानों को डगवैल के नाम से सिर्फ 14-14 हजार रुपए दिए गए थे, जबकि कार्य की कुल लागत 25 हजार रुपए थी। दैनिक भास्कर के खुलासे के बाद पंचायत के सचिव और रोजगार सहायकों ने गड्ढे खुदवाना शुरू कर दिए हैं।

सवाल : कुछ गलत नहीं हुआ तो इन पर कार्रवाई क्यों
….के खुलासे के बाद जांच में यह सामने आया कि कुछ शिक्षकों ने अपने घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए बिना ही AI से तैयार फर्जी फोटो और पड़ोसी मकानों की निकासी पाइपलाइन को वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बताकर “कैच द रेन” पोर्टल पर अपलोड कर दिया।
जांच के बाद 4 शिक्षकों को निलंबित किया गया है, जबकि अन्य के खिलाफ वेतन वृद्धि रोकने और वेतन कटौती की कार्रवाई की गई है। कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि निर्देशों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
ओंकारेश्वर हायर सेकंडरी स्कूल के प्राचार्य जगदीश मुनेवर के निलंबन का प्रस्ताव आयुक्त शिक्षा विभाग को भेजा गया है। दिनेश चौहान, सरिता सोलंकी और भारती यादव की दो-दो वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने का प्रस्ताव आयुक्त लोक शिक्षण, भोपाल को भेजा गया है। हालांकि इस मामले में सवाल उठ रहे हैं कि जब कुछ गलत ही नहीं हुआ तो फिर इन पर कार्रवाई क्यों की गई।
भास्कर ने खुलासा किया, जांच के आदेश हुए, तो खंडन करने लगे
…. के खुलासे के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने 28 दिसंबर को सीनियर आईएएस दिनेश कुमार जैन के नेतृत्व में जांच दल गठित कर दिया था। वहीं, दूसरा जांच दल मनरेगा परिषद के द्वारा मुख्य अभियंता केएस मिर्धा के नेतृत्व में 29 दिसंबर काे सुबह गठित किया गया।
29 दिसंबर को दोपहर 12 बजे सीईओ जिला पंचायत डॉ. नागार्जुन बी गौड़ा ने प्रेसवार्ता ली। उन्होंने प्रेसवार्ता में फर्जीवाड़े के खुलासे का खंडन किया। कहा कि भ्रामक खबरें फैलाई जा रही है। सवाल यह उठता है कि जब शासन स्तर से मामले की जांच की जा रही थी, तब प्रशासन ने खंडन किया।

इंजीनियर श्वेताली लुक ने कहा-जबरन आरोपी बनाया
हरसूद की इंजीनियर श्वेताली लुक का कहना हैं कि, भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में हमें जबरन आरोपी बनाया गया था। फिलहाल सभी को कोर्ट से स्टे मिला हुआ है, मामला न्यायालय में है इसलिए मैं ज्यादा कुछ टिप्पणी नहीं करूंगी।
वहीं मेरे कार्यक्षेत्र की शाहपुरा ग्राम पंचायत की बात करूं तो वहां पूर्व से ही जल संरक्षण के कामों में धांधली चली आ रही थी। मेरी पोस्टिंग तो बहुत बाद में हुई थी। हमने जांच टीम के सामने भी पूरी सच्चाई रखी, इसीलिए कुछ पंचायतकर्मी मेरे ऊपर गलत आरोप लगा रहे है। आरईएस विभाग के पास वर्तमान में 70 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट प्रगतिरत है।
मनरेगा अधिकारी खान बोले-जिसकी गलती होगी वह भुगतेगा
कार्यपालन यंत्री दीलिप कैथवास का कहना है कि भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला कोर्ट तक गया था। फैसला हमारे पक्ष में आया है। उसी के आधार पर शासन ने प्रमोशन दिया और फिर कार्यपालन यंत्री का प्रभार मिला।
मनरेगा अधिकारी गुलरेज खान ने बताया कि, मनरेगा से जुड़े सभी कार्य मापदंड के अनुसार काम पूरे किए जाएंगे। बारिश के चलते काम अधूरे रह गए थे। हरवंशपुरा में जांच टीम आई थी, जो रिपोर्ट आएगी और जिसकी गलती होगी वह भुगतेगा।
पुनासा जनपद के इंजीनियर राजेश झारोला से संपर्क किया, लेकिन उनका मोबाइल फोन स्वीच ऑफ आया। वहीं लेखाधिकारी शैलेंद्र बाथम ने फोन रिसीव नहीं किया।
