देश के लिए युवाओं की आबादी क्यों जरूरी, ये किस राज्य में सबसे ज्यादा?
देश के लिए युवाओं की आबादी क्यों जरूरी, ये किस राज्य में सबसे ज्यादा?
भारत की गिनती आज युवा राष्ट्र में की जाती है. 1.4 अरब की भारत की आबादी में 50 फीसदी से ज्यादा संख्या 25 वर्ष से कम उम्र के युवाओं की है. युवाओं की आबादी किसी भी देश की तरक्की के जरूरी मानी जाती है. हर साल 12 जनवरी को मनाए जाने वाले नेशनल यूथ डे के साथ देश के युवा भी चर्चा में आ जाते हैं. जानिए, देश के लिए युवा क्यों हैं जरूरी है और किस राज्य में सबसे ज्यादा इनकी आबादी.
भारत आज दुनिया के सबसे युवा देशों में गिना जाता है. लगभग 1.4 अरब (140 करोड़) की आबादी वाले इस देश की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा वर्ग है. संयुक्त राष्ट्र और भारत सरकार के विभिन्न आंकड़ों के अनुसार, भारत की लगभग 65 फीसदी आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है और करीब 50 फीसदी जनसंख्या 25 वर्ष से कम आयु की है. यही कारण है कि दुनिया भारत को युवा राष्ट्र यानी Young Nation कहकर पुकारती है.
यदि संख्या के आधार पर बात करें, तो उत्तर प्रदेश भारत का वह राज्य है जहां सबसे अधिक युवा आबादी रहती है. इसकी मुख्य वजह उत्तर प्रदेश की कुल जनसंख्या का देश में सबसे ज्यादा होना है. उत्तर प्रदेश आज भारत की सबसे बड़ी लगभग 24 करोड़ की जनसंख्या वाला राज्य है. यहां 15-29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की संख्या सबसे अधिक यानी लगभग 5.5 से छह करोड़ के आसपास बताई जाती है.
इस तरह राष्ट्रीय युवा आबादी में यूपी की हिस्सेदारी लगभग 16 फीसदी है. शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास के लिहाज़ से यह राज्य युवाओं के लिए बेहद अहम है. यही वजह है कि यूपी के युवा न केवल पूरे देश में बल्कि विदेशों में भी अपनी गहरी और अमिट छाप छोड़ते आ रहे हैं.
हर साल 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाई जाती है.
राज्यों की क्या है स्थिति?
- बिहार: यहां की कुल जनसंख्या लगभग 13 करोड़ है. 15 से 29 वर्ष की उम्र के नौजवानों की संख्या लगभग 3.5 करोड़ बताई जाती है. इस तरह यहाँ युवाओं का प्रतिशत करीब 27-28 है. बिहार की औसत आयु देश में सबसे कम राज्यों में से एक है. यहां से बड़ी संख्या में युवा शिक्षा और रोजगार के लिए अन्य राज्यों में प्रवास करते हैं. यह इस राज्य की कमजोरी भी है और मजबूती भी. बिहार का युवा आज देश के हर राज्य में अपनी मौजूदगी साबित कर रहा है. पोजीशन चाहे कोई भी हो.
- मध्य प्रदेश: एमपी की कुल जनसंख्या लगभग 8.7 करोड़ है और इनमें युवा आबादी लगभग 2.1 से 2.3 करोड़ बताई जाती है. इस तरह राज्य में युवाओं का प्रतिशत करीब 25-26 के आसपास है. भारत के हृदय स्थल वाले मध्य प्रदेश में कृषि, शिक्षा और हाल के वर्षों में औद्योगिक निवेश के कारण युवा दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य बनकर उभरा है.
- महाराष्ट्र: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को अपनी गोद में समेटने वाले इस राज्य की कुल जनसंख्या लगभग 12.5 करोड़ है. यहां युवा आबादी लगभग 2.6 से 2.8 करोड़ बताई जाती है. इस तरह नौजवानों का प्रतिशत 22-23 के आसपास हुआ. महाराष्ट्र में शहरीकरण, औद्योगिक विकास और स्टार्टअप संस्कृति के कारण युवा कार्यबल की भागीदारी बहुत मजबूत है.
- गुजरात: देश को पीएम और गृह मंत्री देने वाले इस राज्य में युवा करीब 23 फीसदी है और कुल आबादी है लगभग सात करोड़. गुजरात देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों में है, यह किसी से छिपा नहीं है. यहां का लंबा समुद्री तट और पोर्ट-इन्फ्रास्ट्रक्चर युवाओं के लिए बेहतर मौके दे सकता है. गुजरात में व्यापार और उद्यमिता की संस्कृति मजबूत रही है. यहाँ का युवा व्यापार में रुचि भी रखता है. ऐसे में उपलब्ध युवा को समुचित ट्रेनिंग देकर बेहतरीन इस्तेमाल किया जा सकता है.
- राजस्थान: मरुस्थल, रेगिस्तान से लेकर राजे-रजवाड़ों वाले इस राज्य की कुल जनसंख्या लगभग 8.1 करोड़ है. इसमें युवा आबादी लगभग 2.0 से 2.2 करोड़ तक बताई जाती है. इस तरह युवाओं का प्रतिशत 26 के आसपास हुआ. राजस्थान में युवा सेना, पुलिस, प्रतियोगी परीक्षाओं और स्वरोजगार में बड़ी भूमिका निभाते हुए देखे जाते हैं. संगीत के क्षेत्र में भी यहाँ के युवाओं का योगदान महत्वपूर्ण है.
- पश्चिम बंगाल: गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर, बंकिम चंद्र चटर्जी आउए स्वामी विवेकानंद के इस राज्य की कुल जनसंख्या लगभग 10 करोड़ है. यहां युवा आबादी अपेक्षाकृत कम यानी लगभग 2.1 करोड़ है. इस तरह युवाओं का प्रतिशत करीब 22 ही है. यहां शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना के साथ युवा सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं.
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- झारखंड: खनिज संपदा से लबालब यह राज्य भी अभी युवा ही है. यहां की कुल आबादी 4 करोड़ के आसपास है. इसमें 15 से 29 वर्ष की उम्र वाले युवा करीब एक करोड़ से कुछ ज्यादा यानी लगभग एक चौथाई हैं. आदिवासी युवा आबादी के कारण सामाजिक-आर्थिक विकास में स्किलिंग और शिक्षा का प्रभाव बहुत तेज़ हो सकता है. बस राज्य एवं केंद्र सरकारों को कोशिश करना होगा.
- छत्तीसगढ़: झारखंड की ही तरह यह राज्य भी उम्र के 26 वें पड़ाव पर पहुंचा है. कुल आबादी 3.2 करोड़ तथा इसमें युवा की संख्या एक करोड़ से कम यानी लगभग एक चौथाई है. राज्य की अर्थव्यवस्था में खनिज, बिजली, स्टील, एल्यूमिनियम, सीमेंट जैसे क्षेत्रों की भूमिका बड़ी है. इनमें तकनीकी स्किल वाले युवाओं की मांग रहती है. कृषि और वन उपज आधारित आजीविका में युवा उद्यमिता बढ़ाकर ग्रामीण रोजगार बनाया जा सकता है.
- दक्षिण भारतीय राज्य: केरल में युवा प्रतिशत लगभग 18-19 है. देश के सर्वाधिक पढे-लिखे इस राज्य में औसत आयु अधिक है और बुजुर्ग आबादी बढ़ रही है. तमिलनाडु में लगभग 20 फीसदी युवा आबादी है. शिक्षा और उद्योग में यहां के युवाओं की बड़ी भागीदारी है. कर्नाटक की कुल आबादी में युवाओं की संख्या लगभग डेढ़ करोड़ है. यह राज्य आईटी का हब है और यहां युवाओं के लिए बड़ी संभावनाएं हैं. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की स्थिति भी कमोवेश कर्नाटक जैसी ही है. दोनों ही राज्यों में युवा आबादी 20 फीसदी से ज्यादा है. ये राज्य भी खुद में अपार संभावनाएं लिए हुए हैं.
- पूर्वोत्तर भारत के राज्य: असम, मिज़ोरम, मेघालय, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा और मिजोरम में युवाओं की संख्या 2025 फीसदी के आसपास है. इन राज्यों की जनसंख्या भले कम है लेकिन यहां के युवा निर्णायक भूमिका में हैं. वे संगठित होकर कुछ भी कर सकते हैं. पूर्वोत्तर के आंदोलन युवाओं की मौजूदगी और उपादेयता की पुष्टि करते हैं. उन्हें सही दिशा में मिले तो हालात बदलने का कूबत रखते हैं. सरकारों को इस दिशा में सोचना होगा.
राज्यों में युवा क्यों जरूरी?
- डेमोग्राफिक डिविडेंड: कामकाजी उम्र की जनसंख्या बढ़ने पर उत्पादन, कर-आधार और बचत बढ़ सकती है.
- स्किलिंग का त्वरित रिटर्न: 1529 आयु वर्ग में प्रशिक्षण देने से रोजगार और उत्पादकता पर तेजी से असर दिखता है.
- माइग्रेशन और रेमिटेंस: कुछ राज्यों में बाहरी रोजगार से आय आती है. यदि सुरक्षित, कुशल माइग्रेशन हो, तो लाभ बढ़ता है.
- टेक-एडॉप्शन: युवा डिजिटल सेवाओं, फिनटेक, ई-गवर्नेंस, और नई तकनीकों को जल्दी अपनाते हैं.
- सामाजिक परिवर्तन: शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और नागरिक भागीदारी में युवा निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
भारत के लिए युवा आबादी क्यों है महत्वपूर्ण?युवा आबादी किसी भी देश के लिए आर्थिक विकास की रीढ़ बन सकती है. नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति की ताकत है. रक्षा, विज्ञान, खेल और तकनीक का भविष्य सँवारने की क्षमता इसी युवा पीढ़ी में है. यदि सही शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर दिए जाएं, तो यही युवा जनसांख्यिकीय लाभांश को आर्थिक शक्ति में बदल सकते हैं.
नेशनल यूथ डे किस महापुरुष को समर्पित है?नेशनल यूथ डे भारत के महान विचारक, दार्शनिक और समाज सुधारक स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी के अवसर पर मनाया जाता है. भारत सरकार ने 1984 में यह निर्णय लिया कि साल 1985 से हर साल 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाएगा. यह दिन युवाओं को प्रेरित करने, उनके विचारों को दिशा देने और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित करने के लिए समर्पित है. स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में हुआ था.
आज के भारत में नेशनल यूथ डे का महत्वआज जब भारत स्टार्टअप हब बन रहा है. डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया जैसे अभियानों पर काम कर रहा है. अंतरिक्ष, खेल और तकनीक में नई ऊंचाइयां छू रहा है तो इसके पीछे सबसे बड़ी भूमिका युवा शक्ति की ही है. नेशनल यूथ डे युवाओं को प्रेरणा देता है. उन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों का एहसास कराता है. स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से जोड़ता है.

