दिल्लीबड़ी ख़बर

ईरान पर कैसे हमला कर सकता है अमेरिका, क्या है पूरा प्लान…

ईरान पर कैसे हमला कर सकता है अमेरिका, क्या है पूरा प्लान…मैप से समझिए

ईरान में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों और बढ़ती मौतों के बीच अमेरिका ने कड़ी चेतावनी दी है. ट्रंप के पास सीमित या बड़े हवाई हमले करने समेत 4 विकल्प है. अगर हमला होता है तो भी अमेरिका के पास 4 रास्ते खुले हैं. जानते हैं अमेरिका, ईरान पर किस तरीके से हमला कर सकता है.

ईरान पर कैसे हमला कर सकता है अमेरिका, क्या है पूरा प्लान...मैप से समझिए

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन बढ़ते जा रहे हैं, 31 प्रांतों में 500 से ज्यादा सरकार-विरोधी प्रदर्शन हो चुके हैं. इस दौरान हुई हिंसा और झड़प में 646 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को मारता रहा, तो हम ऐसे लेवल पर हमला करेंगे जो उन्होंने कभी नहीं देखे. आइए समझते हैं अमेरिका, ईरान पर कैसे हमले कर सकता है…

1. सीमित हवाई हमलेअमेरिका सीमित हवाई हमलों का सहारा ले सकता है. इस दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की फैसिलिटीज, इंटेलिजेंस मिनिस्ट्री, की बिल्डिंग और कमांड सेंटर को निशाना बना सकता है. इसका यह फायदा होगा कि अमेरिकी सैनिकों के लिए कम जोखिम भरा होगा, आम नागरिकों के हताहत होने की संभावना कम होगी. ये हमले खाड़ी सहयोगियों को शामिल किए बिना किए जा सकते हैं. लेकिन इससे ईरान में राष्ट्रवादी भावना भी भड़क सकती है और लोग अमेरिका के खिलाफ जा सकते हैं.

2. बड़े स्तर पर हवाई हमलेअमेरिका कई ईरानी मिलिट्री फैसिलिटीज पर बड़े पैमाने पर हमले कर सकता है. IRGC के सभी अहम ठिकानों, पुलिस स्टेशन, जेलें, मॉनिटरिंग सेंटर, मिसाइल प्रोडक्शन फैसिलिटीज और इंटरनेट रोकने वाले ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि पेंटागन ने स्पष्ट किया कि कोई भी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है.

3. साइबर और सीक्रेट ऑपरेशनइसका मकसद बिना सीधी लड़ाई के शासन को कमजोर करना है. ईरानी मिलिट्री और सरकारी नेटवर्क पर साइबर हमले हो सकते हैं. देश में इंटरनेट एक्सेस और एलन मस्क की स्टारलिंक सर्विस बहाल की जा सकती है. ईरान ने देश में स्टारलिंक सर्विस पर आंशिक रोर लगाई है. 2021 में ईरान के गैस स्टेशनों पर साइबर हमला हुआ था. ईरान ने अमेरिका और इजराइल पर इसका आरोप लगाया था. 2019 में CIA ने ईरानी वेपन सिस्टम पर साइबर हमला किया था. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रंप की प्रतिक्रिया एकतरफा हमले तक सीमित नहीं होगी.

4. कूटनीतिक और आर्थिक दबावUN सिक्योरिटी काउंसिल ने सितंबर 2025 में स्नैपबैक सिस्टम के तहत 2015 से पहले वाले प्रतिबंध फिर से लागू किए है. ईरान पर पहले से ही ढेर साले अमेरिकी प्रतिबंध हैं. लेकिन इससे ज्यादा फायदा मिलता नहीं दिख रहा है.

किस रास्ते से होगा हमला?Iran Gfx1

1. खाड़ी देशों से हमला (कुवैत, UAE, कतर, बहरीन)

अगर हमला खाड़ी देशों के रास्ते होता है, तो इसके लिए अमेरिका के कई बड़े सैन्य अड्डे पहले से मौजूद हैं. कुवैत में अली अल सलेम एयर बेस और कैंप आरिफजान हैं. कैंप आरिफजान अमेरिकी सेना का सबसे बड़ा अड्डा माना जाता है. कुवैत की ईरान से दूरी करीब 250 किमी है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अल धफरा एयर बेस है, जहां F-35 और F-22 जैसेलड़ाकू विमान तैनात हैं और यह ईरान से फारस की खाड़ी के पार लगभग 200 किमी दूर है.

कतर में अल उदीद एयर बेस है, जो अमेरिकी सेंटकॉम का हेडक्वार्टर और मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है. यहां 10 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. यह ईरान से करीब 350 किमी दूर है. जून 2025 में ईरान ने इस अड्डे पर मिसाइल हमला किया था.

वहीं बहरीन में नेवल सपोर्ट एक्टिविटी है, जो अमेरिका की फिफ्थ फ्लीट का हेडक्वार्टर है. ईरान से इसकी दूरी लगभग 250 किमी है. हालांकि समस्या यह है कि जून 2025 के युद्ध के बाद खाड़ी देश काफी डरे हुए हैं. गल्फ न्यूज के मुताबिक, इन देशों ने अमेरिका से सैन्य कार्रवाई न करने की अपील की है, क्योंकि उन्हें भी ईरान की ओर से जवाबी हमलों का डर सता रहा है.

2. समुद्री मार्ग से हमला

अमेरिका अपने एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स का इस्तेमाल कर सकता है. इस समय USS हैरी एस ट्रूमैन पहले से ही क्षेत्र में तैनात है, जबकि USS कार्ल विंसन को हाल ही में वहां भेजा गया है. ये दोनों एयरक्राफ्ट कैरियर फारस की खाड़ी के बाहर तैनात हैं, लेकिन इसकी मिसाइले और लड़ाकू विमान ईरान तक पहुंचने में सक्षम है. इस रणनीति का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें किसी भी खाड़ी देश की जमीन या सैन्य अड्डों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा.

3. इजराइल के साथ मिलकर हमला

जून 2025 में अमेरिका और इजराइल ने मिलकर हमला किया था. इजराइल ने ईरान के एयर डिफेंस को कमजोर किया, फिर अमेरिकी B-2 बॉम्बर्स ने न्यूक्लियर फैसिलिटीज पर हमला किया. इजराइली PM बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में ट्रंप से मुलाकात में राउंड 2 स्ट्राइक्स पर भी चर्चा की है.

Iran Gfx 2

4. लंबी दूरी के हमले: B-2 बॉम्बर

B-2 स्पिरिट स्टेल्थ बॉम्बर्स का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो भारतीय महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया से उड़ान भर सकते हैं या फिर सीधे अमेरिका के मिसूरी से हवा में फ्यूल भरते हुए मिशन पूरा कर सकते हैं. ये बॉम्बर ईरान के रडार सिस्टम को चकमा देने में सक्षम हैं. इसके अलावा, टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, जिन्हें फारस की खाड़ी में तैनात पनडुब्बियों से दागा जा सकता है. इन मिसाइलों की रेंज 16 सौ किमी से ज्यादा होती है.

UK और यूरोप से होकर बड़ी संख्या में अमेरिकी फ्यूल टैंकर्स और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट्स की मूवमेंट्स देखी गई हैं. यह लंबी दूरी से हवाई हमले की तैयारी का संकेत हो सकता है. कतर के अल उदीद एयरबेस के पास KC-135 रिफ्यूलिंग टैंक देखे गए हैं. यह अमेरिकी वायुसेना का हवा से हवा में ईंधन भरने वाला टैंकर विमान है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *