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ASP अनुज चौधरी समेत 20 पर होगी FIR…CJM कोर्ट ने दिया आदेश !!!

ASP अनुज चौधरी समेत 20 पर होगी FIR
संभल हिंसा में युवक को गोली मारने का आरोप; CJM कोर्ट ने दिया आदेश

संभल हिंसा में ASP अनुज चौधरी समेत 20 अज्ञात पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश हुए हैं। यह आदेश मंगलवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर की कोर्ट ने दिया।

आरोप है कि हिंसा के दौरान पुलिसकर्मियों ने एक युवक को गोली मार दी थी। युवक के पिता ने कोर्ट में याचिका लगाई थी। आरोपियों में इंस्पेक्टर अनुज तोमर भी शामिल हैं। अनुज चौधरी हिंसा के वक्त संभल CO थे। अब वे फिरोजाबाद में ASP ग्रामीण हैं।

इंस्पेक्टर अनुज तोमर के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने के आदेश हुए हैं।
इंस्पेक्टर अनुज तोमर के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने के आदेश हुए हैं।

अब जानिए पूरा मामला…

टोस्ट बेचने निकला था युवक

नखासा थाना क्षेत्र के मोहल्ला खग्गू सराय अंजुमन निवासी यामीन ने CJM कोर्ट में 6 फरवरी, 2025 को याचिका दायर की थी। यामीन ने बताया- उनका बेटा आलम 24 नवंबर, 2024 को रस्क (टोस्ट) बेचने घर से निकला था। शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में पहुंचने पर पुलिस ने उसे गोली मार दी थी।

यामीन ने तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी और संभल कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 12 पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया था। 9 जनवरी, 2026 को कोर्ट में मामले पर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सभी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए। मंगलवार को मामला सामने आया, तब लोगों को जानकारी हुई।

संभल हिंसा के बाद एसपी केक बिश्नोई ने फोर्स के साथ इलाके में गश्त किया था।
संभल हिंसा के बाद एसपी केक बिश्नोई ने फोर्स के साथ इलाके में गश्त किया था।

यामीन के वकील चौधरी अख्तर हुसैन ने बताया- उनके मुवक्किल के बेटे ने पुलिस से छिपकर अपना इलाज कराया। कोर्ट से पूर्व सीओ अनुज चौधरी और पूर्व इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR की मांग की गई थी।

अख्तर हुसैन ने मंगलवार शाम को आदेश की जानकारी मिलने की पुष्टि की, हालांकि देर शाम आदेश जारी होने के कारण उन्हें अभी तक कोर्ट का लिखित आदेश नहीं मिला है।

इंस्पेक्टर अनुज तोमर चंदौसी कोतवाली के प्रभारी

वर्तमान में अनुज चौधरी फिरोजाबाद के अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के पद पर तैनात हैं, जबकि अनुज तोमर संभल की कोतवाली चंदौसी के थाना प्रभारी हैं। संभल हिंसा के दौरान अनुज चौधरी सीओ संभल थे। बाद में उनका प्रमोशन होकर वे ASP बन गए। अनुज चौधरी संभल हिंसा और “52 जुम्मे होली एक” वाले बयान को लेकर काफी चर्चा में रहे थे।

संभल में आयोजित धार्मिक यात्रा में अनुज चौधरी शामिल हुए थे। उस समय वह सीओ थे।
संभल में आयोजित धार्मिक यात्रा में अनुज चौधरी शामिल हुए थे। उस समय वह सीओ थे।

24 नवंबर को सर्वे के दौरान हिंसा में 4 की हुई थी मौत

संभल की जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष ने दावा किया था ये पहले हरिहर मंदिर था, जिसे बाबर ने 1529 में तुड़वाकर मस्जिद बनवा दिया। इसे लेकर 19 नवंबर, 2024 को संभल कोर्ट में याचिका दायर हुई। उसी दिन सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह ने मस्जिद के अंदर सर्वे करने का आदेश दिया।

कोर्ट ने रमेश सिंह राघव को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया। उसी दिन शाम 4 बजे सर्वे के लिए टीम मस्जिद पहुंच गई। 2 घंटे सर्वे किया। हालांकि, उस दिन सर्वे पूरा नहीं हुआ। इसके बाद 24 नवंबर को सर्वे की टीम जामा मस्जिद पहुंची। मस्जिद के अंदर सर्वे हो रहा था।

इसी दौरान बड़ी संख्या में लोग जुट गए। भीड़ ने पुलिस टीम पर पत्थर फेंके। इसके बाद हिंसा भड़क गई। इसमें गोली लगने से 4 लोगों की मौत हो गई थी। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, चर्चित सीओ अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर सहित 29 पुलिसकर्मी घायल हुए।

हिंसा के बाद पुलिस ने 3 महिलाओं सहित 79 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया था। संभल कोतवाली एवं थाना नखासा में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई।

सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क, सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल सहित 40 लोगों के खिलाफ नामजद और 2750 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। 18 जून को SIT ने 1128 पन्नों में सांसद बर्क सहित 23 लोगों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। हालांकि, सपा विधायक के बेटे सुहैल इकबाल का नाम चार्जशीट में शामिल नहीं है।

24 नवंबर, 2024 को संभल में मस्जिद के सर्वे को लेकर हिंसा हुई थी।
24 नवंबर, 2024 को संभल में मस्जिद के सर्वे को लेकर हिंसा हुई थी।

सांसद बर्क बोले- ऐतिहासिक फैसला : वहीं संभल से सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया है. उन्होंने लिखा है, कानून से ऊपर कोई नहीं, न वर्दी, न ओहदा. संभल हिंसा के दौरान एक युवक को गोली मारने के मामले में तत्कालीन CO समेत 12 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने का CJM कोर्ट का आदेश एक ऐतिहासिक फैसला है.

यह आदेश साफ संदेश देता है कि अफसर हो या आम नागरिक, कानून तोड़ने वाला बच नहीं सकता. संभल हिंसा में जिन अधिकारियों ने कानून की सीमा लांघी है, अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है, न्यायपालिका के जरिये इंसाफ जरूर मिलेगा. जुल्म के खिलाफ और हक के लिए लड़ते रहेंगे. इंसाफ देर से सही, मगर मिलेगा जरूर. इंशा अल्लाह.

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