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औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति की राजनीति !

औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति की राजनीति

इस समय देश को औपनिवेशिक विरासत से छुटकारा दिलाने के नजरिये के साथ काम कर रही भारत की सरकार न जाने क्या- क्या नया करने वाली है. औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति की इसी सनक में सात रेस कोर्स रोड का नाम ‘सात लोक कल्याण मार्ग’ किया जा चुका है। राजपथ का नाम भी बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ किया जा चुका है।प्रधानमंत्री कार्यालय को सेवातीर्थ बना दिया गया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नया कार्यालय यानि नया सेवातीर्थ बनकर लगभग तैयार है. आज से सूर्य की दिशा बदल चुकी है. देश मकर संक्रांति मना रहा है. अब किसी भी दिन प्रधानमंत्री जी इस नये सेवातीर्थ से काम शुरू कर सकते हैं।
देश की आजादी के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है, जब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का पता बदलने जा कर रहा है। नया पीएमओ नए-नवेले ‘सेवा तीर्थ’ परिसर का हिस्सा है, जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय के अलावा दो और दफ्तरों का भी कामकाज होगा। ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में कुल तीन इमारतें बनाई गई हैं।सरकार देश की दशा बदलने में भले नाकाम रही हो लेकिन सरकार ने देश को नयी संसद तो दी ही है.
खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी हफ्ते रायसीना हिल्स के पास से अपने नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ-1’से काम शुरू कर सकते हैं। यह परिसर सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है। अभी पीएमओ साउथ ब्लॉक में है। ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में पीएमओ (सेवा तीर्थ-1) के अलावा कैबिनेट सचिवालय (सेवा तीर्थ-2) और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरियट (सेवा तीर्थ-3) भी होगा, जिसके लिए अलग-अलग इमारतें बनी हैं। कैबिनेट सचिवालय पिछले साल सितंबर में ही ‘सेवा तीर्थ-2’ में शिफ्ट हो चुकी है।
आपको पता है कि 1947 में देश की आजादी के समय से ही प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से चल रहा है, जो भारत की सत्ता का केंद्र रहा है।लेकिन मोदी जी को ये नाकाफी लगा. इसीलिए उन्होने पूरे ‘सेवा तीर्थ’ परिसर पर करीब 1,189 करोड़ रुपये फूंक दिए., इसे लार्सन एंड टुब्रो ने बनाया है। ‘सेवा तीर्थ’ परिसर को ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव-1′ के नाम से भी जाना जाता है। यह पूरा परिसर 2,26,203 वर्ग फीट में फैला है।एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव-1’ के पास में ही ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव-2’ का भी निर्माण हो रहा है, जहां ‘सात लोक कल्याण मार्ग’ से प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास स्थानांतरित होने वाला है।
नए कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरियट इमारतों के निर्माण पर भी काम चल रहा है, जहां केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों का दफ्तर शिफ्ट होने वाला है। इन्हीं में से ‘कर्तव्य भवन-3’ का पिछले साल अगस्त में उद्घाटन को चुका है, जहां गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय समेत कई और मंत्रालय शिफ्ट भी हो चुके हैं।
सरकार को औपनिवेशक विरासत से मुक्ति के लिए भले ही तमाम कोशिश करना पड रही हो लेकिन देश भर में ये विरासत बिखरी पडी है. सबको न नष्ट किया जा सकता है और न समंदर में डुबोया जा सकता है, इसलिए ब्रिटिश काल के साउथ और नॉर्थ ब्लॉक के पूरी तरह से खाली होने पर यह पूरी तरह से ‘युग युगीन भारत संग्रहालय’ में बदल जाएंगे,जहां भारत की 5 हजार साल पुरानी विरासत को समेटा जा रहा है।
वैसे भारत का आंग्ल नाम इंडिया भी औपनिवेशिक विरासत ही है. सवाल ये है कि क्या सरकार ये नाम भी बदलने के लिए कोई कानून ला सकती है, या फिर इस विरासत को अभी और ढोयेगी. हमारे बुजुर्ग कहते थे कि न विरासत बदली जा सकती है और न बल्दियत. पडोसी भी नही बदला जा सकता. फिर भी कोशिश जारी है. देखिए आने वाले दिनों में देश का भविष्य भी बदलेगा या फिर केवल नाम ही बदलते रहेंगे.

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