ईरानी गैंग का एक और कारनामा…फाइनेंस कर्मचारियों से मिलीभगत..बदमाशों ने उनसे लोन पर ले लीं 87 बाइक, इनसे देशभर में लूट !!!
देश के कई राज्यों में वांटेड भोपाल की ईरानी गैंग का एक और कारनामा सामने आया है। गैंग ने फाइनेंस कंपनी के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से दूसरों के नाम पर 87 बाइक फाइनेंस कराईं और इन्हें बदमाशों तक पहुंचाया। इन बाइकों का इस्तेमाल बाद में देशभर में लूट और चोरी की वारदातों में किया गया।
मप्र एसटीएफ अब तक 10 बाइक बरामद कर चुकी है, जिनका इस्तेमाल आपराधिक वारदातों में हुआ। मामले में 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गैंग का मास्टरमाइंड प्रवीण पाटिल अभी फरार है। एसटीएफ के मुताबिक, यह खेल 2022 से दिसंबर 2023 के बीच चला।
इस दौरान खरगोन और बड़वानी के शोरूम से कुल 87 टू-व्हीलर खरीदे गए, जिनमें 54 बुलेट बाइक शामिल हैं। इन सभी बाइकों को चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी के कुछ कर्मचारियों की मदद से फर्जी दस्तावेजों पर फाइनेंस कराया गया।
जिन लोगों के आधार-पैन व अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, उन्हें भनक तक नहीं लगी। जब फाइनेंस कंपनी ने किश्तों के लिए नोटिस भेजे, तब पता चला। अगस्त 2024 में महाराष्ट्र के धूलिया में हुई एक लूट की जांच के दौरान खुलासा हुआ कि वारदात में जिस बाइक का इस्तेमाल हुआ, वह इसी कंपनी से ली गई थी। कंपनी के रीजनल लीगल मैनेजर नरेंद्र भाटिया की शिकायत पर अक्टूबर 2024 में एसटीएफ ने 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
सवा साल जांच के बाद 10 बाइकें बरामद हो सकीं, इनमें से 77 बाइकों की तलाश अभी जारी : करीब सवा साल चली जांच के बाद एसटीएफ ने पिछले पांच महीनों में मप्र और कर्नाटक से 10 बाइक बरामद की हैं। एसटीएफ के मुताबिक बरामद ज्यादातर बाइक लूट और चोरी की वारदातों में इस्तेमाल की गई थीं। एसटीएफ के एआईजी नवीन कुमार चौधरी के अनुसार 77 बाइक अब भी जब्त होना बाकी हैं। तलाश जारी है।
जानिए… किन वारदातों में हुआ इस्तेमाल बुलेट एमपी 46-जेडबी 9278 अक्टूबर 2024 में हबीबगंज में मोबाइल लूट में प्रयुक्त। बाइक व मोबाइल जाफर अली के पास से जब्त हुए। {बुलेट एमपी 46-जेडबी 8623 निशातपुरा में तालिब से जब्त हुई, लूट में इस्तेमाल। { बुलेट एमपी 46-जेडबी 6594, एमपी 45-4393, एमपी 46-जेडसी 3733 और एमपी 10-जेडसी 6723 कर्नाटक से बरामद हुईं। {चार बाइक समीर के कब्जे से बरामद।
बैंक से नोटिस आए तब हुआ खुलासा; एसटीएफ से शिकायत, 10 बाइक जब्त
बाइक लेने गए थे, जो कागज दिए, उनसे दूसरी गाड़ी फाइनेंस
खरगोन के ग्राम बुध निवासी चेतन यादव दूध का टैंकर चलाते हैं। वे बाइक लेने शोरूम गए थे। चेतन के मुताबिक, फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों ने सिबिल चेक करने के बहाने आधार-पैन कार्ड की जानकारी ली। तब बाइक फाइनेंस नहीं हुई। बाद में इन्हीं दस्तावेजों से मेरे नाम से बाइक फाइनेंस करा ली। किस्त भरने का नोटिस आया, तो पता चला। आधार-पैन मेरे लगे हैं। फोटो दूसरे का।
कार फाइनेंस के लिए कागज दिए थे, टू व्हीलर फाइनेंस हो गया
बड़वानी के टेमरिया निवासी सरिता के पति दिलवर कन्नौजे बताते हैं, चोलामंडलम से कार फाइनेंस करवाई है। तब कंपनी के कर्मचारी वेरिफिकेशन करने आए थे। उन्होंने मेरे और पत्नी के आधार और पैन कार्ड की फोटोकॉपी साइन करवाकर रख लिए। कुछ दिन बाद कंपनी वाले घर आए। बताया, पत्नी के नाम टू व्हीलर फाइनेंस है। जो दस्तावेज हमने कार फाइनेंस के समय लगाए, उन्हीं का इस्तेमाल किया गया।
बैंक में खाता खुलवाने के नाम पर लिए थे दस्तावेज… सेंधवा के मजदूर राकेश आर्य के दस्तावेज बैंक में खाता खुलवाने के नाम पर लिए गए थे। राकेश को बताया था- खाता खुलने के बाद हर महीने 2 हजार रुपए आएंगे।
किस आरोपी की क्या भूमिका…
प्रवीण पाटिल- मास्टर माइंड… कंपनी में सेल्स एक्जीक्यूटिव था। फर्जी दस्तावेजों पर बाइक फाइनेंस कराने के लिए 75 फाइलें बनाईं। इन्हें कंपनी के चेन्नई ऑफिस भेजा। अभी फरार। समीर अब्बास अली- फाइनेंस कंपनी में सीजर था। इस मामले में ईरानी गैंग का लीडर। इसी ने वाहनों को देशभर में पहुंचाया। कई अपराध दर्ज। प्रदीप कुशवाह- इसका काम ग्राहकों से समय पर किस्तें भरवाना था। मिलीभगत से दो से तीन किस्त भरवाईं ताकि कंपनी काे पता न चल सके। शुभम राठौर- कंपनी का सेल्स एक्जीक्यूटिव। इसने फर्जी दस्तावेजों पर 12 फाइल तैयार कीं। आमिर मंसूरी, शुभम कानूनगो, अनिरुद्ध वैष्णव- तीनों फाइनेंस कंपनी में क्रेडिट एक्जीक्यूटिव थे। कस्टमर वेरिफिकेशन का काम इनके जिम्मे था। तालिब हुसैन- भोपाल निवासी तालिब ईरानी डेरे के समीर अब्बास का साथी है। इससे लूट में इस्तेमाल बाइक बरामद हुई हैं। रिमांड पर है।
ये भी आरोपी– बड़वानी निवासी विकास सेन, मुस्तफा अली निवासी सेंधवा व जाफर अली निवासी ईरानी डेरा भोपाल।
(मामले में 11 आरोपी हैं। इनमें 2 फरार हैं, एक जेल में, एक रिमांड पर है। बाकी जमानत पर)


