मध्य प्रदेश

आपने तो इंदौर की राष्ट्रीय बेइज्जती करवा दी:अब सोचिए…ये घटना इंदौर पर धब्बा है या आप?

आपने तो इंदौर की राष्ट्रीय बेइज्जती करवा दी:अब सोचिए…ये घटना इंदौर पर धब्बा है या आप?
आपने तो इंदौर की राष्ट्रीय बेइज्जती करवा दी। अब सोचिए- ये घटना इंदौर पर धब्बा है या आप? दूषित पानी से मौतों के 18 दिन बाद राहुल गांधी इंदौर आए। भाग-दौड़ कर परिवारों से मिले। मृतकों के परिजन की राहत राशि में डेढ़-डेढ़ लाख और जुड़ गए। लेकिन इन सबसे अलग कुछ और भी मिला है।

देश का नंबर-1 शहर और दूषित पानी से मौतें… स्वच्छता में अव्वल इंदौर…और पानी में मिली गंदगी जानें ले गई। देश का पहला वाटर प्लस शहर और यहीं पर पानी से 24 मौतें हो गईं। ये तीन बातें देश ही नहीं, दुनियाभर में इंदौर की बेइज्जती करवा रही हैं। जिस इंदौर के कसीदे पढ़े जा रहे थे, अब उसके हर मॉडल पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

फिर चाहे बात यहां की स्वच्छता की हो या स्मार्ट सिटी की। सब घेरे में है। इस घटना को इंदौर की छवि पर धब्बा बताया जा रहा है। लेकिन दिल पर हाथ रखिए। अपनी करतूतें याद करिए। दोनों पार्टियों की तरफ से मची राजनीतिक गंदगी को देखिए। …और फिर कबूल कीजिए कि सिर्फ ये घटना इंदौर पर धब्बा नहीं है, आप भी वैसा ही धब्बा हैं।

माफ कीजिएगा इस तरह के शब्दों का उपयोग करना पड़ रहा है। लेकिन एक इंदौरवासी होने के नाते ये गुस्सा मेरे जेहन में है। और सिर्फ मेरे ही नहीं, हर उस इंदौरी के जेहन में होगा, जो अपने शहर से प्यार करता है। जो सिर्फ सिस्टम की चूक से मौतें होते हुए देख रहा है। 10 साल तक बच्चे की मन्नत मांगने और 5 महीने में उसे खो देने वाले पिता…उसकी मां में भी यही गुस्सा होगा।

उर्मिला जी, नंदलाल जी, गोमती जी, ताराबाई, गीताबाई, अरविंद जी के साथ ही उन सभी 24 परिवारों में भी यही गुस्सा होगा। उन 3 परिवारों में होगा, जिनके मां-पिता कई दिनों से वेंटिलेटर पर कृत्रिम सांसों के भरोसे हैं। लेकिन सिर्फ आपमें नहीं दिखता। न प्रशासन में, न निगम में। न भाजपा में और न कांग्रेस में। यहां चल रहे हैं सिर्फ बयान, बचाव, चुप्पी और चुप कराने की दादागीरी।

7 जनवरी की रात महापौर पुष्यमित्र भार्गव सरकारी वाहन से संघ कार्यालय पहुंचे थे।
7 जनवरी की रात महापौर पुष्यमित्र भार्गव सरकारी वाहन से संघ कार्यालय पहुंचे थे।

…और भी कुछ है जो पूछना है, लेकिन क्या जवाब दे पाएंगे?

दे पाएं तो बताइए- स्वास्थ्य से जुड़ी इतनी बड़ी त्रासदी के बाद भी स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल कहां हैं? शहर के सांसद शंकर लालवानी कहां हैं? जल त्रासदी है, तो जल मंत्री तुलसी सिलावट कहां हैं? बाकी विधायक गोलू शुक्ला, मालिनी गौड़, महेंद्र हार्डिया, मधु वर्मा, मनोज पटेल, उषा ठाकुर कहां हैं?

विपक्ष की वो ताकत कहां है, जो सरकार की नाक में दम कर दे। जो इंसाफ दिलाने के लिए लड़ पड़े। हक दिलाकर ही माने। कहीं कोई नहीं है। और शहर-प्रदेश की इन शख्सियतों के अलावा भागीरथपुरा के नल में ठीक से अब भी पानी नहीं है। सांसें छीन लेने वालों पर सख्त एक्शन की गारंटी तक नहीं है।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का मीडियाकर्मी को अपशब्द कहते वीडियो सामने आया था।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का मीडियाकर्मी को अपशब्द कहते वीडियो सामने आया था।

ये धब्बा ज्यादा चुभ रहा…क्योंकि हम नंबर-1 हैं

आपको बता नहीं सकते ये धब्बा कितना चुभ रहा है। पता है क्यों? क्योंकि हम नंबर-1 हैं। हमेशा से नंबर-1 रहे हैं। ये हमारी आदत में शुमार है। हमें इस पर गर्व है। हर इंदौरी को इस पर गर्व है। और वो इसके लिए हर कीमत चुकाता है। बस यही सब है जिससे आपकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि सबकुछ ठीक रहे। लेकिन ये जिम्मेदारी भी आपसे निभाई नहीं गई। और अब भी सिर्फ पर्दा डालने का ही काम हो रहा है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भागीरथपुरा में प्रभावितों के घर पहुंचे थे।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भागीरथपुरा में प्रभावितों के घर पहुंचे थे।

आइए सरकार! अब शहर को जवाबदारों पर कार्रवाई में नंबर-1 बनाइए

इन मौतों, राष्ट्रीय बेइज्जती और बर्बाद सिस्टम के लिए जो-जो जिम्मेदार हैं, उन्हें अब भी क्यों बचाया जा रहा है? जबकि समझ आ रहा है कि ये गैर इरादतन नहीं…जानकर किया गया कृत्य है। तो उन अफसरों पर सीधे FIR क्यों नहीं हुई? जानबूझकर टेंडर रोकने वाले अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं? शिकायतें मिलने के बाद भी सब होते हुए देखने वाले पार्षद पर एक्शन क्यों नहीं? अब तो सख्त होइए सरकार।

हर इंदौरवासी आपसे मांग करता है कि इस बार हर जिम्मेदार को सबक सिखाइए। ऐसी कार्रवाई कीजिए कि हम गर्व से कह सकें…ये इंदौर है। सरकार यहां लापरवाहों को नहीं बख्शती। कोई भी हो, सजा मिलती है। ये शहर कार्रवाई करने में भी नंबर-1 है। शब्द और तीखे हैं…लेकिन मेरे प्रदेश मेरे शहर से जुड़े हैं। उसके मान से जुड़े हैं। हर इंदौरवासी से जुड़े हैं। धन्यवाद।

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