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चमचागिरी की काबिलियत से खेल रहे ठेके का खेल…

सुना है क्या: चमचागिरी की काबिलियत से खेल रहे ठेके का खेल… और साहबों पर गिरेगी गाज तो माननीय का हुआ मोहभंग

यूपी के स्वास्थ्य महानिदेशालय में डॉक्टर चमचागिरी की काबिलियत से कई साल से ठेके और टेंडर के काम में लगे हुए हैं और अब तो वो खुलकर बोलने भी लगे हैं। वहीं, नोएडा कांड में कई और साहबों पर गाज गिर सकती है। वहीं, मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच एक माननीय तो दिल्ली तक की दौड़ लगाते रहते हैं। 
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सुना है क्या/suna hai kya ,,,,

यूपी के स्वास्थ्य महानिदेशालय में डॉक्टर चमचागिरी की काबिलियत से कई साल से ठेके और टेंडर के काम में लगे हुए हैं और अब तो वो खुलकर बोलने भी लगे हैं। वहीं, नोएडा कांड में कई और साहबों पर गाज गिर सकती है। वहीं, मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच एक माननीय तो दिल्ली तक की दौड़ लगाते रहते हैं।

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चमचागिरी की विशेषज्ञता
स्वास्थ्य महानिदेशालय में कई ऐसे डॉक्टर हैं जो विशेषज्ञ मर्ज के हैं लेकिन चमचागिरी की काबिलियत की वजह से अपना काम छोड़कर कई साल से टेंडर और ठेके के काम में लगे हैं। विभाग के कई मुखिया आए लेकिन कोई उन्हें इलाज के काम में नहीं लगा सका। अब तो वे सीना ठोक कर कहने लगे हैं कि उनके बिना टेंडर का काम कोई कर ही नहीं सकता। बेचारे महानिदेशालय के मुखिया भी चुप हैं। वह सिर्फ इतना बोलते हैं कि अब उनके जाने का समय आ गया है। विभाग में इस बात की खूब चर्चा है कि नए मुखिया इन विशेषज्ञों से काम ले पाते हैं या नहीं।और साहबों पर गाज का खतरा
अपने लख्ते जिगर को एक पिता अपनी आंखों के सामने मौत के मुंह में जाते देख तड़पता रहा लेकिन सिस्टम हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। दिल दहला देने वाली इस घटना की गूंज पूरे देश में है। केवल एक जेई के सिर पर ठीकरा फोड़ अपनी नौकरी बचाने में जुटे बड़े अफसर भी निशाने पर आ गए हैं। एक का तबादला करने के बाद अब घोटालों की फाइल खुलने जा रही है जिसकी चपेट में दो नौकरशाह आ रहे हैं। चर्चा है कि अभी कई और विकेट गिरने वाले हैं। कार्रवाई की जद में आने वाले कई साहबों ने बचाव का जुगाड़ तंत्र साधना शुरू कर दिया है।

क्यों हुआ माननीय का मोहभंग
सूबे के युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने वाले महकमे में माननीय की बेरुखी आजकल चर्चा में है। दरअसल, पिछले दिनों महकमे में हुए प्रमोशन घोटाले के आरोपों में घिरने के बाद से ही माननीय उखड़े-उखड़े हैं। कुछ महीनों से उन्होंने न तो महकमे में बैठक की और न ही कोई फरमान जारी किया। सूबे की राजधानी में उनका प्रवास भी कम रहता है। रहते भी हैं तो किसी को भनक नहीं होती। मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा के बाद से माननीय सहमे से रहने लगे हैं। वह दिल्ली दरबार के चक्कर लगाते दिख रहे हैं। माननीय के रुख को देखते हुए लोग कहने लगे हैं कि उन्हें महकमे से वैराग्य हो गया है।

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