आने वाले सालों में बढ़ेंगे हीट स्ट्रेस के दिन, मानसून के पहले उमस भरी गर्मी बढ़ेगी
आने वाले सालों में बढ़ेंगे हीट स्ट्रेस के दिन, मानसून के पहले उमस भरी गर्मी बढ़ेगी
भारत में जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले सालों में असहनीय गर्मी और हीट स्ट्रेस के दिनों में भारी वृद्धि होगी। एक अध्ययन के अनुसार, 2041-2070 तक हर साल 50 से अधिक हीट स्ट्रेस वाले दिन हो सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य, कृषि और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। तटीय और उत्तरी क्षेत्रों में खतरा अधिक है, और शहरों में तापमान 7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। इससे गरीबों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए जोखिम बढ़ेगा।
- 2041-2070 तक भारत में 50+ हीट स्ट्रेस दिन संभव।
- बढ़ती गर्मी से स्वास्थ्य, कृषि, अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर।
- शहरी क्षेत्रों में तापमान 7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने की आशंका।
वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में दावा किया है कि 2041–2070 तक देश में 27 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हीट इंडेक्स वाले दिनों की संख्या साल में 50 दिन से ज्यादा हो सकती है। जबकि अत्यधिक खतरनाक स्तर 32 डिग्री वाले दिनों की संख्या 5 दिन या इससे ज्यादा हो सकती है। अध्ययन में शामिल आईआईटी रुड़की के डिपार्टमेंट ऑफ हाइड्रोलॉजी के वैज्ञानिक डॉक्टर अंकित अग्रवाल कहते हैं कि 1971–2000 के औसत की तुलना में आने वाले सालों में लोगों को असहनीय गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। गर्मी बढ़ने से न केवल स्वास्थ्य जोखिम बढ़ेंगे, बल्कि खेती, बिजली की मांग, कामकाज और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर भी गंभीर असर पड़ेगा। भारत में विशेष तौर पर तटीय तथा उत्तरी इलाकों में हीट स्ट्रेस बेहद खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है।
हीट वेव को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इससे आपकी जान भी जा सकती है। दिल्ली मेडिकल काउंसिल की साइंफिक कमेटी के चेयरमैन डॉक्टर नरेंद्र सैनी के मुताबिक हमारे शरीर के ज्यादातर अंग 37 डिग्री सेल्सियस पर बेहतर तरीके से काम करते हैं। जैसे जैसे तापमान बढ़ेगा इनके काम करने की क्षमता प्रभावित होगी। बेहद गर्मी में निकलने से शरीर का तापमान बढ़ जाएगा जिससे ऑर्ग्रेगन फेल होने लगेंगे। शरीर जलने लगेगा, शरीर का तापमान ज्यादा बढ़ने से दिमाग, दिल सहित अन्य अंगों की काम करने की क्षमता कम हो जाएगा। यदि किसी को गर्मी लग गई है तो उसे तुरंत किसी छाया वाले स्थान पर ले जाएं। उसके पूरे शरीर पर ठंडे पानी का कपड़ा रखें। अगर व्यक्ति होश में है तो उसे पानी में इलेक्ट्रॉल या चीनी और नमक मिला कर दें। अगर आसपास अस्पताल है तो तुरंत उस व्यक्ति को अस्पताल ले जाएं।
इंटीग्रेटेड रिसर्च एंड एक्शन फॉर डेवलपमेंट के डिप्टी डायरेक्टर रोहित मगोत्रा के मुताबिक 21वीं सदी में हीट वेव की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ने की संभावना है। हाल ही में आई 6 वीं आईपीसीसी रिपोर्ट में पृथ्वी की सतह के 2.0 डिग्री फ़ारेनहाइट (1.1 डिग्री सेल्सियस) के आसपास गर्म होने पर चेतावनी दी गई है। इससे भविष्य में वैश्विक औसत तापमान और हीटवेव में वृद्धि होगी।
हीटवेव का ऐलान इन स्थितियों में होता है
आईएमडी के मुताबिक जब किसी जगह का तापमान मैदानी इलाकों में 40 डिग्री सेल्सियस, तटीय क्षेत्रों में 37 डिग्री सेल्सियस और पहाड़ी क्षेत्रों में 30 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाता है। जब किसी जगह पर किसी ख़ास दिन उस क्षेत्र के सामान्य तापमान से 4.5 से 6.4 डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान दर्ज किया जाता है, तो मौसम एजेंसी हीट वेव की घोषणा करती है। यदि तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री सेल्सियस अधिक है, तो आईएमडी इसे ‘गंभीर’ हीट वेव घोषित करता है। आईएमडी हीट वेव घोषित करने के लिए एक अन्य मानदंड का भी उपयोग करता है, जो पूर्ण रूप से दर्ज तापमान पर आधारित होता है। यदि तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाता है, तो विभाग हीट वेव घोषित करता है। जब यह 47 डिग्री को पार करता है, तो ‘गंभीर’ हीट वेव की घोषणा की जाती है।
जलवायु परिवर्तन के चलते पूरी दुनिया में गर्मी बढ़ी है। मौसम वैज्ञानिक समरजीत चौधरी कहते हैं कि पूरी दुनिया में जलवायु परिवर्तन के चलते मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। कई अध्ययन इस बात की आशंका जता रहे हैं कि आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ेगी। वहीं एक्स्ट्रीम वेदर कंडीशन देखने को मिलेगी। ऐसे में हालात की गंभीरता को देखते हुए कदम उठाए जाने की जरूरत है। यूरोप की कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा के मुताबिक मार्च 2024-फरवरी 2025 के दौरान तापमान 1990-2020 के औसत से 0.71 डिग्री सेल्सियस अधिक और पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.59 डिग्री सेल्सियस अधिक था।
पांच दिन की हीटवेव पर बढ़ जाती हैं 33.3 फीसदी तक मौतें
भारत सहित दुनिया के कई वैज्ञानिकों की ओर से ‘भारत में मृत्यु दर पर हीटवेव का प्रभाव’ विषय पर देश देश 10 बड़े शहरों के डेटा पर अध्ययन किया गया। इन शहरों में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, अहमदाबाद, पुणे, वाराणसी, शिमला और कोलकाता शामिल थे। वैज्ञानिकों ने पाया कि किसी शहर में हीटवेव जैसी स्थितियां एक दिन दर्ज होती हैं तो दैनिक मृत्यु दर में 12.2% की वृद्धि होती। यदि हीटवेव की स्थिति लगातार दो दिन बनी रहती है तो दैनिक मृत्यु दर 14.7% तक बढ़ जाती है। तीन दिन लगातार हीटवेव रहने पर ये 17.8% तक बढ़ जाती है। लगातार पांच दिनों तक अत्यधिक गर्मी की स्थिति दर्ज की जाती है तो मृत्यु दर 33.3% तक बढ़ सकती है। भारत सरकार की ओर से संसद में 2023 में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक 2023 में, आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में लू या हीटवेव से मौतें हुई। सबसे ज्यादा मौतें केरल में दर्ज की गईं। 2023 में 30 जून तक लू से 120 मौतें दर्ज की गईं, जो देश में ऐसी मौतों की सबसे ज्यादा संख्या है।
