कठघरे में अफसरशाही…सीएम बोलते हैं कोई भी कलेक्टर बिना पैसे लिए काम ही नहीं करते ?
कलेक्टर-एसपी की वीडियो कांफ्रेंसिंग में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने जिलों के प्रशासनिक कामकाज पर तीखी टिप्पणी की। सुशासन पर बातचीत के समय उन्होंने भ्रष्टाचार व पैसों के लेन-देन का किस्सा सुनाया और कहा- सीएम बोलते हैं कि कोई कलेक्टर बिना पैसे लिए काम ही नहीं करते। मैंने उनसे कहा- ऐसी बात नहीं है। जो भी ऐसा भ्रष्टाचार कर रहा है, उन्हें हटा दीजिए।
सीएस के यह कहते ही वर्चुअल जुड़े कलेक्टर सकते में आ गए। दो बार से टल रही यह कांफ्रेंस बुधवार को हुई। सुशासन के रिव्यू में ही सामने आया कि लोगों की शिकायतों को अटेंड ही नहीं किया जा रहा। शासन में अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव और कमिश्नर के स्तर पर ही लाखों शिकायतें पेंडिंग चल रही हैं।
इसी बीच, इंदौर जिले से एक शिकायत सामने आई कि एफआईआर दर्ज नहीं हो रही। सीएस ने इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह से कारण पूछा तो वो स्क्रीन पर नहीं दिखे। उन्हें तुरंत फोन लगाया गया, वो स्विच ऑफ मिला। इस पर सीएस ने कहा- डीजीपी कैलाश मकवाना हैं मगर ऐसा लगता है कि कई जगहों के एसपी चले गए। आगे से यह ध्यान रखें कि जब तक वीडियो कांफ्रेंसिंग चलेगी, एसपी भी मौजूद रहेंगे। डीजीपी न भी रहें तो भी उन्हें बैठना है। सीएस ने कांफ्रेंस मंत्रालय के एंटी चैंबर से की।
सीएस ने कहा –
अवैध खनिज कारोबार सहित समाज विरोधी अन्य गतिविधियों को सख्ती से रोकें। भिंड, मुरैना, शहडोल, जबलपुर और नरसिंहपुर जिलों को विशेष अभियान चलाना चाहिए। – ऐसी बस्तियां जहां संकरी सड़कें हैं और मूवमेंट में समस्या आती है, ऐसे स्थानों वाले 24 जिलों में अब तक जोनल प्लान तैयार किया गया है। ऐसी 1343 गलियों और बस्तियों को संवदेनशील माना गया है और 23 जिलो में जीआईएस मैप पर अंकित किया है। शेष जिले 3 माह में काम करें। – अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विरुद्ध अपराधों को सख्ती से रोकें। ऐसे मामलों में पीड़ित पक्षकारों को निर्धारित अवधि में राहत राशि मिले।
ये फाइंडिंग –
प्रदेश में 1343 संवेदनशील गलियां, पुलिस मूवमेंट पर खतरा। – साल 2025 में 14 जिलों में नशे के खिलाफ बैठकें नहीं हुईं। – एसी-एसटी पीड़ितों को राहत देने में देरी, हजारों केस पेंडिंग। – 20 से अधिक जिलों में हिट एंड रन का एक रुपया भी मुआवजा नहीं दिया गया। – सीमांकन, बंटवारा और नामांतरण में सीधी, टीकमगढ़ और मैहर सबसे पीछे हैं। कई जिले रेड जोन में।
रिव्यू में ही सामने आई हकीकत–
लोगों की शिकायतों की ही सुनवाई नहीं हो रही
सीएस ने सुनाया किस्सा, बताया- कैसे हो रहा लेन-देन नामांतरण की एक शिकायत आई। इसमें लिखा था कि काम करने के पैसे मांगे जा रहे हैं। मैंने जांच के लिए उसे कलेक्टर को भेजा। वहां से रिपोर्ट दी गई कि शिकायत गलत है, ऐसा कुछ नहीं है। कलेक्टर की रिपोर्ट वैसी की वैसी शिकायतकर्ता को भेज दी।
शिकायतकर्ता का पलट कर जवाब आया कि एसडीएम-पटवारी आए थे और 7.50 लाख रुपए में लेन-देन तय करके गए हैं। शिकायतकर्ता द्वारा लिखी गई यह बात कलेक्टर को भेजी और जांच के लिए कहा। कलेक्टर ने एडीएम को भेजा तो शिकायतकर्ता की बात को सही पाया। ये सब क्या है?
समग्र की ई-केवाईसी में भोपाल-इंदौर फिसड्डी
- 42 विभागों की 139+ योजनाओं में ई-केवाईसी सत्यापित समग्र आईडी जरूरी हैं। पर भोपाल, इंदौर, आलीराजपुर, मऊगंज व जबलपुर फिसड्डी जिलों में शामिल रहे।
- भोपाल सबसे नीचे हैं। अभी तक 1.65 करोड़ डुप्लीकेट समग्र से बाहर हो चुके हैं। करीब 2 करोड़ की ई केवाईसी बाकी है। सीएस ने कहा- इसे जल्द पूरा किया जाए।
सीएम हेल्पलाइन… ही हेल्पलेस
एल-3 और एल-4 स्तर पर कमिश्नर, सचिव, प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव आते हैं। यही वह स्तर है, जहां जिले (एल-1) और संभाग (एल-2) स्तर पर हल न हो सकी शिकायतों का निपटारा होना चाहिए। लेकिन इस स्तर पर भी शिकायतें पेंडिंग हैं।
सीएस के सामने आई शिकायतों की हकीकत
- 100 दिन से ज्यादा पेंडिंग 1,74,013
- एल-3 व एल-4 स्तर पर पेंडिंग 2,75,219
- जिन शिकायतों को देखा ही नहीं गया 98,621
एल-3 व एल-4 स्तर पर वो शिकायतें जिनकी मियाद पूरी हो चुकी- 1,89,293
आनंदपुर धाम विवाद के बाद
अशोक नगर कलेक्टर आदित्य को हटाया, साकेत को कमान
राज्य सरकार ने आनंदपुर धाम में विवाद के बाद अशोक नगर कलेक्टर आदित्य सिंह को हटा दिया है। उन्हें भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास का संचालक नियुक्त किया है। कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) के संचालक साकेत मालवीय को अशोक नगर का नया कलेक्टर बनाया गया है। वहीं जीएडी के अपर सचिव अजय कटेसरिया को अस्थायी रूप से ईएसबी के संचालक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है।

