कार्यक्रम का उद्देश्य क्या था?
यह कार्यक्रम स्वामीनारायण संप्रदाय के पवित्र ग्रंथ ‘शिक्षापत्री’ के 200 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया था। शिक्षापत्री में 212 संस्कृत श्लोक हैं, जिन्हें भगवान स्वामीनारायण ने 1826 में लिखा था। यह ग्रंथ अनुयायियों के लिए आचरण, नैतिकता, समाज और आध्यात्मिक जीवन का मार्गदर्शन करता है। अमित शाह ने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक सनातन परंपराओं को उचित सम्मान देने वाली सरकार की प्रतीक्षा रही।
सनातन धर्म पर शाह का संदेश
अमित शाह ने कहा कि संतों के आशीर्वाद से उन्हें पूरा भरोसा है कि जो सरकार सनातन धर्म के मूल्यों को कमजोर करेगी, वह दोबारा सत्ता में नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि आज देश में ऐसी सरकार है, जो सनातन धर्म के सिद्धांतों के अनुसार शासन कर रही है और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत कर रही है।
अमित शाह ने मोदी के कार्यकाल का भी किया जिक्र
- गुजरात के बेटे नरेंद्र मोदी पिछले 11 वर्षों से देश का नेतृत्व कर रहे हैं।
- 550 साल पहले तोड़े गए राम मंदिर का निर्माण पूरा हुआ।
- सरकार के कार्यकाल में अनुच्छेद 370 और तीन तलाक हटाया गया।
- सभी धर्मों के लिए समान नागरिक संहिता की पहल की गई।
- सरकार ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को मजबूत की।
संस्कृति और परंपराओं के लिए क्या कदम उठाए गए?
- बीते 11 वर्षों में योग, आयुर्वेद, गौ संरक्षण खास ध्यान दिया गया।
- प्रमुख तीर्थ स्थलों के पुनरुद्धार पर काम किया गया।
- बद्रीनाथ और केदारनाथ का पुनर्विकास।
- काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण।
- अब सोमनाथ जैसे तीर्थों का विकास।
- ये प्रयास सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि समाज के कल्याण से जुड़े हैं।
शिक्षापत्री की अहमियत क्या है?
अमित शाह ने भगवान स्वामीनारायण को ब्रिटिश काल में समाज को दिशा देने वाला महापुरुष बताया। उन्होंने कहा कि भगवान स्वामीनारायण ने पैदल यात्रा कर समाज सुधार का कार्य किया। शिक्षापत्री को उन्होंने जीवन का नैतिक संविधान बताया, जो पारदर्शिता, अहिंसा, करुणा और कर्तव्यबोध सिखाता है। उन्होंने कहा कि कन्या शिक्षा, जातिवाद और छुआछूत के विरोध जैसे सुधार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।