ग्वालियर में 52 छोटे अस्पताल हो जाएंगे आयुष्मान योजना से बाहर ?

इसका सीधा असर उन छोटे और मझोले अस्पतालों पर पड़ेगा जो अब तक इस योजना के तहत लाखों गरीब और जरूरतमंद मरीजों का इलाज कर रहे थे। इस आदेश के लागू होने के बाद शहर के 52 छोटे अस्पताल आयुष्मान योजना से बाहर हो जाएंगे।
छोटे अस्पताल करते हैं सबसे ज्यादा इलाज: राज्यभर के लगभग 90% निजी अस्पताल अभी एंट्री लेवल एनएबीएच पर ही कार्यरत हैं। ये वही अस्पताल हैं जहां आयुष्मान कार्ड धारकों की सबसे ज्यादा भीड़ होती है। इन अस्पतालों पर ग्रामीण और शहरी गरीबों का सीधा भरोसा है।
जिले में 20 सरकारी और 71 प्राइवेट हॉस्पिटलों में आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को इलाज मिल रहा है। इनमें से 39 अस्पताल ही ऐसे हैं जो एनएबीएच प्रमाणित हैं। वर्तमान में 52 अस्पताल एनएबीएच प्रमाणित नहीं हैं।
वहीं दूसरी ओर फुल एनएबीएच वाले अस्पताल ज्यादातर कॉरपोरेट या फाइव स्टार हॉस्पिटल होते हैं, जहां गंभीर या विशेष बीमारियों का इलाज होता है और आमतौर पर वहां आयुष्मान कार्ड के माध्यम से इलाज कराना मुश्किल होता है।
फुल एनएबीएच की अनिवार्यता 1 अप्रैल 2026 से होगी लागू
मरीजों को कैसे मिलेगी मदद?
योजना से छोटे अस्पतालों के हटने से जो मरीज आयुष्मान कार्ड के जरिए मुफ्त इलाज ले पा रहे हैं, उन्हें निजी अस्पतालों में मजबूरन पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। सरकारी अस्पतालों की सीमित सुविधा और भीड़ के कारण आम आदमी का स्वास्थ्य सिस्टम से भरोसा उठ सकता है।
क्या होता है एनएबीएच? एनएबीएच यानी नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स भारत सरकार की एक संस्था है जो अस्पतालों की गुणवत्ता जांचने और उन्हें प्रमाणित करने का काम करती है। इसका उद्देश्य मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देना है। इसमें दो स्तर होते हैं-
- एंट्री लेवल एनएबीएच: न्यूनतम आवश्यक गुणवत्ता मापदंड।
- फुल एनएबीएच: अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता, जिसमें भारी खर्च और प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।
सरकार का आदेश तर्क संगत नहीं: नर्सिंगहोम एसोसिएशन
नर्सिंगहोम एसोसिएशन का कहना है कि जिन प्राइवेट अस्पतालों में आयुष्मान योजना के लिए अनुबंध किया है 1 अप्रैल से फुल एनएबीएच अनिवार्यता का जो आदेश जारी किया है। वह तर्क संगत नहीं है। यह आदेश कुछ अस्पतालों को ही लाभ पहुंचाने के लिए किया जाना प्रतीत होता है।
सभी अस्पताल संचालक मार्च तक मान्यता ले लें
सभी हॉस्पिटल संचालक मार्च तक एनएबीएच की मान्यता अनिवार्य रूप से प्राप्त कर लें। जिन हॉस्पिटल में अभी आयुष्मान कार्ड से इलाज की सुविधा है वे भी एनएबीएच की मान्यता जरूरी है। -डॉ. प्रबल प्रताप सिंह, जिला स्वास्थ्य अधिकारी 2 (आयुष्मान योजना)
आयुष्मान: निजी अस्पतालों के लिए NABH सर्टिफिकेट अनिवार्य: कोर्ट
मप्र हाई कोर्ट ने आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों के लिए एनएबीएच सर्टिफिकेट अनिवार्य किए जाने के राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराया है। कोर्ट ने इस अनिवार्यता को लागू नहीं करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने कहा कि सरकार का उद्देश्य आम जनता को गुणवत्तापूर्ण और मानकीकृत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
ऐसे नीतिगत फैसलों में न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जबलपुर, भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में संचालित निजी अस्पतालों को एनएबीएच मानकों का पालन करना होगा। याचिका में तर्क दिया गया था कि इस शर्त से छोटे अस्पताल बंद हो सकते हैं। हालांकि कोर्ट ने कहा कि यदि किसी अस्पताल को इस अनिवार्यता पर आपत्ति है, तो वह स्वयं पक्षकार बनकर अदालत के समक्ष आ सकता है।

