चंबल में यहां जाने से अफसर-पुलिस भी डरते हैं !!!
इसी गली में वन विभाग यानी डीएफओ ऑफिस है, लेकिन उधर का आलम भी कुछ सख्त नहीं है। जब कभी वन विभाग- पुलिस और माफिया का आमना-सामना हुआ, हंगामा जरूर बरपा, लेकिन न तो खनन रुका न ही माफिया की दबंगई कम हुई।
माफिया के कारनामों को उजागर करने दैनिक भास्कर की टीम चंबल नदी पहुंची। यहां 100 से ज्यादा वाहन कतार में अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। पढ़िए रिपोर्ट…
पहले चंबल नदी की तीन तस्वीरें देखिए…



अपनी बारी का इंतजार करती ट्रैक्टर-ट्रॉली
…. चंबल नदी स्थित राजघाट पर पहुंची तो यहां का नजारा अचंभित करने वाला था। रेत खनन को लेकर जो बातें बताई जाती थीं, हकीकत तो उससे कहीं ज्यादा थी। नदी के किनारे जेसीबी से लेकर ट्रैक्टर-ट्रॉली लाइन से खड़ी थीं। एक-एक कर जेसीबी की मदद से रेत ट्रॉलियों में लोड हो रही थी। यह सबकुछ रात में नहीं, भरी दोपहरी में करीब 3 बजे हो रहा था।
राजघाट के दोनों तरफ माफिया चंबल नदी के सीने को छलनी कर रहे थे। यह सबकुछ इतनी सहजता से हो रहा था, मानो इन्हें शासन-प्रशासन का डर ही नहीं। 100 से ज्यादा वाहन अवैध रेत ले जाने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
लोग बोले- दिन-रात बेखौफ चलता है काम
राजघाट से लगी चंबल सफारी है, यहां वन अमला भी तैनात रहता है। बावजूद यह नजारा काफी चौंकाने वाला था। टीम सीधे तो माफिया के बीच नहीं गई, लेकिन इस काले धंधे से जुड़े लोगों से ऑफ कैमरा बात की तो उन्होंने कहा- यह कोई एक दिन का काम तो है नहीं। दिन-रात यहां यह सब चलता है। कोई भी हो, यहां आने के पहले सोचता है।
वहीं, ग्रामीण कहते हैं- राज घाट नेशनल हाईवे-44 पर स्थित है। यह चंबल नदी के जरिए मुरैना एमपी और धौलपुर राजस्थान को जोड़ता है। इस रास्ते से नेताओं से लेकर बड़े अधिकारी तक गुजरते हैं, लेकिन माफिया में इनका कोई भय नहीं दिखता।
आपको एक नजर में दिखने वाले 100 से ज्यादा वाहन हकीकत में बहुत कम हैं। यहां के हालात इतने खराब हैं कि दिनभर में 1 हजार से ज्यादा वाहन अवैध रेत लेकर यहां से निकलते हैं।
रेत की सबसे अधिक डिमांड उत्तर प्रदेश के आगरा में होती है। इसके अलावा राजस्थान के धौलपुर, बाड़ी, सैंया सहित एमपी के ग्वालियर में भी रेत यहां से जाती है।

NGT की याचिका पर कोर्ट ने खनन रोकने दिए थे आदेश
चंबल नदी में घड़ियाल और जलीय जीव संरक्षण के लिए रेत खनन बंद हो, इसके लिए एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने हाईकोर्ट (ग्वालियर बेंच) में एक याचिका दायर की थी।
याचिका पर सुनवाई करते साल 2008 में हाईकोर्ट ने चंबल घड़ियाल सेंचुरी में जलीय जीव संरक्षण और विलुप्त होती घड़ियाल प्रजाति के संरक्षण के लिए रेत खनन पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी।
हाई कोर्ट ने इसे रोकने के लिए एक टास्क फोर्स बनाने के भी आदेश दिए थे। वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस विभाग को यहां संयुक्त कार्यवाही करना था। टास्क फोर्स को मजबूत करने के लिए हाईकोर्ट के निर्देश पर एसएएफ की एक कंपनी भी वन विभाग को सौंपी गई थी, ताकि वह रेत खनन पर लगाम लग सके।
हांलाकि जिस धंधे को रोकने के लिए इतना सब हुआ, वह बढ़ता ही गया। कोर्ट के आदेश के बाद भी रेत माफिया ने इस अवैध धंधे को जारी रखे हुए हैं।

पहले बात पुलिस की- एसपी ऑफिस सहित 6 थाने-चौकी, फिर भी माफिया बेखौफ
लोग कहते हैं, चंबल नदी में रेत माफिया की दबंगई इतनी है कि पुलिस उनके वाहनों को रोकना तो दूर साइड तक लगाने का कहने से कतराती है। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि चंबल नदी से रेत खनन के बाद लोड हुए ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली को एक पुलिस चौकी, 6 थानों और एसपी कार्यालय से होकर गुजरना होता है।
चंबल यानी राजघाट से गाड़ी के निकलते ही सबसे पहले हाईवे पर बॉर्डर चेकिंग के लिए सराय छोला थाने की अल्ला बेली चौकी पड़ती है। इसके बाद सराय छोला थाना, सिविल लाइन थाना, ट्रैफिक थाना, एसपी कार्यालय, स्टेशन रोड थाना और बानमौर थाना क्रॉस करना होता है।
इतने थानों के सामने हो होकर माफिया की गाड़ियां रेत लेकर तेजी से सड़क पर दौड़ती हैं, लेकिन इस पर कार्रवाई करने वाला कोई नहीं दिखता है। ग्रामीण तो साठगांठ के आरोप भी लगाते हैं। सूत्रों की माने तो ट्रक के 20 हजार रुपए महीना और ट्रैक्टर-ट्रॉली के 5 से 7 हजार रुपए महीना फिक्स है।

चार थानों के टीआई से बात… एक ने भी सख्त कार्रवाई नहीं की
अल्ला बैली चौकी और थाना सराय छोला प्रभारी एसआई केके सिंह सवाल : अवैध रेत से भरे वाहन आपके थाने के सामने से गुजरते हैं, कार्रवाई क्यों नहीं होती? जबाव : फोन काटा।
सिविल लाइन थाना प्रभारी उदयभान यादव सवाल : अवैध रेत से भरे वाहन आपके थाने के सामने से गुजरते हैं, कार्रवाई क्यों नहीं होती? जबाव: हमारा थाना समय-समय पर कार्रवाई करता है। दिसंबर में दो रेत के ट्रैक्टर और दो पत्थर के ट्रैक्टर पकड़े थे। यह काम मूल रूप से माइनिंग और फॉरेस्ट विभाग का है। पुलिस के पास बहुत काम रहता है। अन्य विषयों पर भी पुलिस काम करती है। मूल विभाग को हमारा जो सहयोग चाहिए वह हम करेंगे।
बानमौर थाना प्रभारी टीआई दीपेंद्र यादव सवाल : अवैध रेत से भरे वाहन आपके थाने के सामने से गुजरते हैं, कार्रवाई क्यों नहीं होती? जबाव : पुलिस द्वारा समय-समय पर कार्रवाई की गई है। कई ज्वाइंट कार्रवाई रेत पर की है, पत्थर पर की है लेकिन मुख्य कार्रवाई संबंधित विभागों को करनी चाहिए जो कि नहीं की जाती। हमसे जो सहयोग चाहिए करेंगे। पुलिस हमेशा तत्पर रहती है।
स्टेशन रोड थाना प्रभारी कुलदीप राजपूत
रेत पर कार्रवाई पिछले दो तीन महीने में दो बार की है। दो ट्रैक्टर भी पकड़े। इन पर कार्रवाई करने पर लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बनती है, जिससे हमको सोच समझकर कार्रवाई करनी होती है।
अवैध परिवहन के रास्ते में वन अमले की दो चौकी, एक नाका, डिपो और DFO ऑफिस
माफिया की लोडेड गाड़ियां विभिन्न थानों के साथ-साथ वन विभाग के कार्यालय को भी नेशनल हाईवे पर क्रॉस करते हैं। इसी रोड पर राजघाट पर बनी चंबल सफारी की चौकी, देवरी घड़ियाल सेंचुरी, वन डिपो, चेकिंग नाका और फिर मुख्य वन मंडल अधिकारी कार्यालय और निवास भी पड़ता है।
डीएफओ कार्यालय के पास बड़ी मंडी
चंबल में रेत माफिया की दबंगई का एक और नमूना देखने को मिला है। आपको अवैध रेत की मंडी डीएफओ कार्यालय के पास ही लगी दिख जाएगी। डीएफओ कार्यालय और अवैध रेत की मंडी के बीच सिर्फ 200 मीटर का फासला है। नेशनल हाईवे-44 किनारे पर मौजूद इस मंडी से खुलेआम रेत का व्यापार हो रहा है।
डीएफओ हरिश्चंद्र बघेल से इस संबंध में बात करना चाहा कि कार्यालय से कुछ दूरी पर अवैध रेत के ट्रैक्टर ट्रॉली की मंडी लगती है, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं होती। लेकिन उनका फोन बंद था।

पिछले साल राजघाट पर ही सीएम ने छोड़े थे घड़ियाल
करीब एक साल पहले 17 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मुरैना पहुंचे थे। उन्होंने राजघाट पर घड़ियाल छोड़े थे। उन्होंने घाट को सुंदर बनाने के साथ ही पर्यटकों की सुविधा के लिए और भी कई घोषणाएं की थीं।
पिछले महीने 27 दिसंबर को फिर से मुख्यमंत्री का मुरैना दौरा तय हुआ था। सीएम यहां फिर से घड़ियाल को रिलीज करने आने वाले थे, हालांकि बाद में दौरा कैंसिल हो गया था।
पुलिस और वन विभाग के अपने तर्क
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार जिला स्तर पर टास्क फोर्स का गठन हुआ है। कलेक्टर इस समिति के अध्यक्ष हैं। समिति में माइनिंग, पुलिस और वन विभाग के लोग शामिल हैं। सभी संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हैं। पिछले साल बहुत अधिक कार्रवाई की गई थी।
माफिया इतने बेखौफ कि पुलिसवाले को डंपर से कुचल दिया
- साल 2015 : मुरैना पुलिस की टीम रेत माफिया को पकड़ने गई थी। सड़क किनारे रेत से भरे डंपर को रोकने पर ड्राइवर ने पीछे करके वाहन चलाया, जिससे पास खड़े हेड कॉन्स्टेबल धमेंद्र चौहान वाहन के नीचे दब गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
- साल 2018 : मुरैना जिले के सराय छोला थाने में रेत माफिया ने पुलिस द्वारा पकड़े गए रेत से भरे वाहनों को छुड़ाने के लिए हमला किया था। हमलावर थाने में घुसे और फायरिंग की। पुलिस वाहनों में आग लगा दी। इसके बाद ट्रक और ट्रैक्टर-ट्रॉली को छुड़ाकर ले गए।
- साल 2018 : चंबल नदी से अवैध रेत भरकर आ रही ट्रैक्टर-ट्रॉली को ड्यूटी पर तैनात डिप्टी रेंजर सूबेदार सिंह कुशवाहा ने रोकने की कोशिश की। एक ट्राॅली तो आगे निकल गई, लेकिन पीछे से आ रही दूसरी ट्रॉली ने उन्हें कुचल दिया। साथी अस्पताल लेकर गए, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया।
- साल 2021 : वन विभाग की एसडीओ श्रद्धा पांढ़रे पर ग्रामीणों ने हमला किया। हमलावर बंदूक, लाठी, डंडा व फरसा लेकर आए। फायरिंग की और विभाग की पकड़ से अवैध रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली को छुड़ाकर ले गए। बताया गया कि श्रद्धा पांढ़रे पर दो महीने में 9वां हमला था।
- दिसंबर 2025 : सबलगढ़ में वन विभाग ने चंबल किनारे रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की। रेत माफिया के गुर्गों ने वन विभाग की टीम पर हमला किया। फायरिंग और पथराव हुआ, जिसमें अमले की गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गईं। दो वनकर्मियों को पत्थर भी लगे।

