मध्य प्रदेश

SAF में 3 करोड़ का घोटाला, 200 गुना भत्ता निकाला !

SAF में 3 करोड़ का घोटाला, 200 गुना भत्ता निकाला:जबलपुर में जवानों ने ट्रैवल अलाउंस में की गड़बड़ी; ASI, मृत कॉन्स्टेबल सहित 15 पर FIR

जबलपुर में स्पेशल आर्म्ड फोर्स (SAF) की छठी बटालियन से जुड़ा ट्रैवलिंग अलाउंस (TA) घोटाला अब और बड़ा हो गया है। पहले करीब 2 करोड़ रुपए का बताया जा रहा यह घोटाला बढ़कर लगभग 3 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

मामले में रांझी थाना पुलिस ने मंगलवार को यहां पदस्थ एएसआई, मृत आरक्षक समेत कुल 15 कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318-4, 338, 336-3, 340-2, 316-5 और 61-2 के तहत केस दर्ज किया है। घोटाले का मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड बताए जा रहे एलडीसी बाबू सत्यम शर्मा लंबे समय से फरार है।

2018-19 से चल रहा घोटाला

  • मामला तब सामने आया, जब अधिकारियों को अनियमितताओं की भनक लगी।
  • शुरुआती जांच में टीए शाखा में तैनात एलडीसी बाबू सत्यम शर्मा और आरक्षक अभिषेक झारिया के नाम सामने आए।
  • सत्यम शर्मा लंबे समय से फर्जी टीए बिल बनाकर राशि हड़प रहा था। बिल में आरक्षकों को जिले से बाहर ड्यूटी पर दिखाया जाता, जबकि वे वास्तविक रूप से जबलपुर में मौजूद रहते थे।
  • भुगतान होने से पहले आने वाला ओटीपी भी सत्यम शर्मा के द्वारा लिया जाता था।
  • राशि का एक हिस्सा वह खुद और अपने सहयोगियों में बांट देता था।
  • घोटाला 2018-19 से चल रहा था। नवंबर 2025 में घोटाला सामने आया। अब तक लगभग 3 करोड़ रुपए की हेर-फेर हुई।
  • अभिषेक झारिया के बैंक खाते में 582 टीए बिल के माध्यम से लगभग 55 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए, जबकि उनकी 7 साल की सैलरी और एरियर केवल 26 लाख रुपए थे।जबलपुर का एसएएफ छठी बटालियन का कार्यालय।

200 गुना ज्यादा रकम, 12 आरक्षकों को TA से 10-10 लाख

SAF में आरक्षकों का शुरुआती वेतन 23-25 हजार रुपए महीना होता है। कोष एवं लेखा आयुक्त के निर्देश पर जब स्टेट फाइनेंस इंटेलिजेंस सेल ने जांच की तो पता चला कि कुछ के बैंक खातों में उनकी सैलरी से 200 गुना ज्यादा रकम पड़ी है। 12 आरक्षकों के खातों में सिर्फ TA बिल से 10 लाख रुपए से जमा मिले।

स्टेट फाइनेंस इंटेलिजेंस सेल की जांच में पता चला है कि छठी बटालियन एसएएफ रांझी, जबलपुर में यात्रा भत्ता देयक, चिकित्सा भत्ता देयक और एफवीसी देयकों से कर्मचारियों को अत्यधिक राशि का भुगतान किया गया है।

निलंबन के बाद अभिषेक ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दी

टीए कांड खुलते ही सत्यम और अभिषेक दोनों सस्पेंड कर दिए गए। शर्म और दबाव में अभिषेक ने 12 नवंबर को ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी कर ली। उधर, सत्यम जांच शुरू होते ही गायब हो गया और फिर छिंदवाड़ा में उसकी शादी का कार्ड सामने आया। इसमें वेन्यू छिंदवाड़ा और डेट 22 नवंबर लिखी थी। शादी की जानकारी उसने विभाग को नहीं दी।

इस तरह से लगाया जाता था टीए बिल।
इस तरह से लगाया जाता था टीए बिल।

एक बैंक खाते में कई बार हुआ भुगतान

सेल की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अभिषेक झारिया को लगभग 55 लाख रुपए का भुगतान 582 यात्रा भत्ता देयकों के माध्यम में किया गया। यह भुगतान 2018-19 से अब तक की अवधि में हुआ है, जबकि अब तक अभिषेक को वेतन और एरियर से 26 लाख रुपए का भुगतान हुआ है, यानी टीए भत्ते से मिले रुपए वेतन की तुलना में लगभग 210 प्रतिशत अधिक हैं।

इसी प्रकार नीतेश कुमार पटेल को वेतन भत्तों में इसी अवधि में 102 वेतन एवं वेतन एरियर देयकों में 24.67 लाख दिए गए, जबकि यात्रा भत्तों में 335 देयकों से 30.51 लाख का भुगतान हुआ है। इस प्रकार उसे भी वेतन से अधिक भुगतान यात्रा भत्तों में किया गया है।

 

दो मोर्चों पर जांच हुई– SAF कमांडेंट ने 3 सदस्यीय टीम, कलेक्टर ने 6 सदस्यीय कमेटी बनाई

SAF कमांडेंट सिद्धार्थ चौधरी की जांच कमेटी ने 20 से ज्यादा आरोपियों के बयान दर्ज किए। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने जिला पंचायत CEO अभिषेक गहलोत के नेतृत्व में 6 सदस्यीय विशेष टीम गठित की। इसके बाद 20 से अधिक आरक्षकों के खाते फ्रीज कर दिए गए।

जांच में यह भी सामने आया है कि SAF का बाबू सत्यम शर्मा 50% से अधिक का लालच देकर अभिषेक के खाते में रुपए ट्रांसफर कराता था। यह भी पता चला है कि जांच के घेरे से बचने के लिए सत्यम खाते में राशि न लेकर कैश लेता था। जांच के समय सत्यम के खाते में करीब 2 लाख 60 हजार रुपए मिले।

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