ग्वालियर ……अस्पतालों का गोरखधंधा !
दैनिक भास्कर के पास इन सभी 132 बंद अस्पतालों की पूरी सूची मौजूद है। ताज्जुब की बात तो यह है कि ये अस्पताल तीन तरह से बंद हुए हैं। पहली वजह: 40 अस्पतालों ने खुद बंद करने के लिए आवेदन दिया। दूसरी वजह: 45 अस्पताल रिन्यूअल के लिए आवेदन ही नहीं कर पाए। तीसरी वजह: 47 अस्पताल ऐसे रहे जिनमें हेल्थ विभाग की टीमों ने तमाम कमियां मिलने के बाद सील कर दिया।
उधर, इसी दौरान जिले में 16 नए अस्पताल भी रजिस्टर्ड हुए। पहले 440 अस्पताल थे, 132 बंद हो गए और 37 नए खुल गए। अब शहर में 345 अस्पताल संचालित हैं। खास बात यह है कि ग्वालियर में पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा अस्पताल चल रहे हैं। इसका कारण भी साफ है- यहां नर्सिंग कॉलेजों की अधिकता और कोरोना काल में आपदा में अवसर तलाशते हुए ताबड़तोड़ अस्पताल खोले गए थे।
ये 9 अस्पताल बंद हुए, लेकिन नए नाम और नए रजिस्ट्रेशन से चल रहे
बुंदेलखंड हॉस्पिटल: 8 अप्रैल 2025 को बंद किया
निदेशक: रवि रजक, पलंग संख्या- 20 क्यों बंद हुआ- रिन्यु कराने आवेदन नहीं दिया। भास्कर पड़ताल: जिस भवन में बुंदेलखंड हॉस्पिटल का संचालन होता था, अब उसी भवन में कामदगिरी हॉस्पिटल का संचालन किया जा रहा है। निदेशक भी रवि रजक हैं। अस्तपाल में एक भी मरीज भर्ती नहीं मिला।
प्रयास चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल: 20 मार्च 2025 को बंद किया
निदेशक: डॉ.राहुल गुप्ता, पलंग संख्या- 35 क्यों बंद हुआ- बंद करने खुद आवेदन दिया। भास्कर पड़ताल: अस्पताल का नाम बदलकर अब चिल्ड्रन्स मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल कर दिया गया है। उसी परिसर में संचालन हो रहा है। हालांकि यहां कुछ डॉक्टर पुराने हैं तो कुछ नए डॉक्टर भी हैं।
केएम हॉस्पिटल: 8 अप्रैल 2025 को बंद किया
निदेशक: रमन विजय सिंह, पलंग संख्या- 120 क्यों बंद हुआ- रिन्यु कराने आवेदन नहीं दिया। भास्कर पड़ताल: जिस भवन में केएम हॉस्पिटल का संचालन होता था, वहां अस्पताल जैसी गतिविधियां तो मिलीं लेकिन इसके बंद होने का दावा किया गया। स्वास्थ्य विभाग की जांच में पहले भी गड़बड़ी मिली थीं।
ओल्याई हॉस्पिटल : 8 अप्रैल 2025 को बंद किया
निदेशक: डॉ. रोजा ओल्याई, पलंग संख्या-15 क्यों बंद हुआ- रिन्यु कराने आवेदन नहीं दिया। भास्कर पड़ताल: हॉस्पिटल का नाम यथावत है। केवल निदेशक का नाम बदल दिया गया है। यहां मौजूद रिसेप्सनिष्ट ने बताया कि अब डॉ. नेसन ओल्याई निदेशक बन गए हैं। अब पलंग संख्या 9 हो गई है।
कालरा हॉस्टिपल: 13 फरवरी 2025 को बंद किया
निदेशक: डॉ.रोहित कालरा, पलंग संख्या- 15 क्यों बंद किया- कमियों में सुधार नहीं किया। भास्कर पड़ताल: पहले जिस भवन में इस अस्पताल का संचालन होता था। अब अमृत ज्योति हॉस्पिटल का संचालन किया जा रहा है। डॉ. रोहित कालरा की नाम पट्टिका अभी भी यहां लगी हुई है। संचालक बदल गए हैं।
नर्सिंग कॉलेज बंद होने से औंधे मुंह गिरे अस्पताल
विशेषज्ञों के अनुसार कुछ साल पहले जिले में 65 नर्सिंग कॉलेज थे। बड़े फर्जीवाड़े के बाद ये दो साल तक बंद रहे। इस साल सिर्फ 21 कॉलेजों को ही मान्यता मिली। जाहिर है बाकी 44 अस्पताल तो बंद होना ही थे। ये वैसे भी सिर्फ नर्सिंग कॉलेज चलाने के लिए खोले गए थे ना कि इलाज के लिए।
जिम्मेदार बोले- फर्जी अस्पतालों पर कार्रवाई
फर्जी अस्पतालों पर लगातार कार्रवाई जारी है। बिना सुविधा के अस्पतालों को बंद कराया गया है। टीम को कई जगह तो ऐसे अस्पताल मिले जहां लंबे समय से ताले तक नहीं खुले थे। लगातार नोटिस जारी कर रहे हैं। अभी 50 से ज्यादा अस्पतालों को भी खामियां दूर करने को कहा है। यदि सुधार नहीं हुआ तो ये भी बंद होंगे। -डॉ. सचिन श्रीवास्तव, सीएमएचओ, ग्वालियर

