मध्य प्रदेश

फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाने …25 से ज्यादा जिलों में सुविधा बंद ???

फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाने कोई 100, कोई 150KM दूर जा रहा
25 से ज्यादा जिलों में सुविधा बंद; वाहन चालक बोले- नया सिस्टम तो बनाते

मध्य प्रदेश में पिछले एक महीने से गाड़ी मालिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वजह है कि जिलों में RTO कार्यालयों में वाहनों की फिटनेस जांच और फिटनेस सर्टिफिकेट का बनना बंद होना।

अब भोपाल, ग्वालियर जैसे बड़े शहरों और संभाग मुख्यालयों पर ही सर्टिफिकेट बन रहे हैं। ऐसे में छोटे जिलों के वाहन मालिकों को सर्टिफिकेट बनवाने सैकड़ों किमी की दूरी तय करनी पड़ रही है।

वाहन मालिकों से बात कर उनकी परेशानियों के बारे में समझा। 

गुना परिवहन कार्यालय में वाहनों की फिटनेस की जांच नहीं की जा रही है।
गुना परिवहन कार्यालय में वाहनों की फिटनेस की जांच नहीं की जा रही है।

27 से ज्यादा जिलों में नहीं बन रहे फिटनेस सर्टिफिकेट

दरअसल, करीब दो महीने से प्रदेश के 27 से ज्यादा जिलों में RTO कार्यालयों में वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट बनना बंद हो गए हैं। कार्यालयों में न तो वाहनों की फिटनेस की जांच हो पा रही है और न ही फिटनेस सर्टिफिकेट बन पा रहे हैं।

केवल संभाग स्तर पर अब यह काम हो रहा है। इस कारण वाहन मालिकों को फिटनेस जांच और सर्टिफिकेट के लिए संभाग मुख्यालयों पर जाना पड़ रहा है। इससे सर्टिफिकेट लेने में ज्यादा समय लग रहा है। साथ ही ज्यादा पैसा भी उनका खर्च हो रहा है।

ऑटोमैटिक फिटनेस टेस्टिंग स्टेशन बनाने की तैयारी

दरअसल, भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वार वाहन फिटनेस व्यवस्था को संभाग स्तर पर केंद्रीकृत करने की तैयारी की जा रही है। इसी क्रम में जिला स्तर पर फिटनेस कार्य बंद कर दिया गया है।

भविष्य में यह जिम्मेदारी ऑटोमैटिक फिटनेस टेस्टिंग स्टेशन पर कराए जाने को तैयारी है। निजी एजेंसियों को यह काम देने की तैयारी चल रही है। लेकिन, यह नई व्यवस्था पूरी तरह लागू होने से पहले ही पुराना सिस्टम बंद कर दिया गया है। इस कारण अव्यवस्था की स्थिति बन गई है। स्थिति यह है कि कई जिलों से वाहन मालिकों को सर्टिफिकेट के लिए सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है।

जैसे गुना के वाहन मालिकों को भोपाल, इंदौर या ग्वालियर जाकर फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाना पड़ रहा है। इसी तरह शिवपुरी, श्योपुर के वाहन मालिकों को ग्वालियर, अशोकनगर के वाहन मालिकों को भोपाल या ग्वालियर जाना पड़ रहा है। इसी तरह की स्थिति विंध्य, मालवा, निमाड़, महाकौशल के जिलों की भी है।

कमर्शियल और निजी वाहन मालिक फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए संभाग मुख्यालय जा रहे हैं।
कमर्शियल और निजी वाहन मालिक फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए संभाग मुख्यालय जा रहे हैं।

ट्रांसपोर्टर बोले- व्यवस्था ठप होने से बढ़ी परेशानी

प्रदेश के 27 से ज्यादा जिलों में यह व्यवस्था पूरी तरह ठप्प हो गई है। ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में लगे लोगों का कहना है कि जल्द कोई समाधान नहीं निकाला गया, तो अव्यवस्था की स्थिति बन सकती है। सरकार को नई व्यवस्था लागू करने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। यदि जल्द ही नई नीति या स्थाई समाधान लागू नहीं किया गया, तो आने वाले समय में स्थिति गंभीर हो सकती है।

ऑटो चालक मोहम्मद अनीश ने बताया कि समस्या यह है कि अब इस काम के लिए भोपाल या ग्वालियर जाना पड़ेगा। हम चाहते हैं कि फिटनेस यहीं RTO ऑफिस में ही हो। यहां काफी समय से फिटनेस और परमिट नहीं बन रहे हैं। बाहर जाएंगे तो गाड़ी रखनी पड़ेगी। 500 रुपए को रोजगारी मारी जाएगी। दो-पांच सौ रुपए अलग से खर्च होंगे।

कमल सिंह परिहार ने बताया कि समस्या तो आएगी, अभी नहीं तो बाद में आएगी। गाड़ी चेकिंग होगी तो और दिक्कत आएगी। फिटनेस बनवाने जाना है तो गाड़ी भी बाहर ही ले जाना पड़ेगी। बाहर ले जाते समय अगर गाड़ी पकड़ी हो गई तो और ज्यादा समस्या होगी। हम चाहते हैं कि गुना में ही बन जाए तो ठीक रहेगा। बिना फिटनेस के गाड़ी पकड़ी जाती है, तो पांच हजार का चालान किया जाता है।

नरेश ने बताया कि गुना में गाड़ियां बहुत हो चुकी हैं। बेरोजगारी भी है। मजदूरी तो है नहीं यहां, न फैक्ट्री हैं, न प्लांट हैं। न हम बाहर जाएंगे, न कहीं जाएंगे। वहां 50- 60 हजार रुपए लगाने थोड़ी जाएंगे।

प्रायवेट बस और ट्रकों मालिकों को भी फिटनेस जांच के लिए परेशानी हो रही है।
प्रायवेट बस और ट्रकों मालिकों को भी फिटनेस जांच के लिए परेशानी हो रही है।

कार-बाइक जैसे प्राइवेट वाहनों के लिए नियम

भारत में निजी वाहनों (Private Vehicles) के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट की प्रारंभिक वैधता पंजीकरण (Registration) की तारीख से 15 साल तक होती है। इसके बाद, इस फिटनेस प्रमाण पत्र को हर 5 साल में रिन्यू (नवीनीकरण) कराना जरूरी होता है। यह नियम कार और बाइक जैसे व्यक्तिगत वाहनों के लिए लागू होता है।

वहीं, नए व्यावसायिक (कमर्शियल) वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाण पत्र शुरुआती 2 साल के लिए मान्य होता है। इसके बाद, 8 साल पुराना होने तक इसे हर 2 साल में रिन्यू कराना अनिवार्य है। 8 साल से अधिक पुराने वाहनों के लिए फिटनेस का नवीनीकरण हर साल कराना होता है।

ये होता है फिटनेस सर्टिफिकेट

वाहनों का फिटनेस सर्टिफिकेट (FC) क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) द्वारा जारी एक अनिवार्य दस्तावेज है, जो यह प्रमाणित करता है कि आपका वाहन सड़क पर चलने के लिए सुरक्षित, यांत्रिक रूप से फिट और प्रदूषण मानकों के अनुरूप है। यह निजी वाहनों के लिए 15 वर्ष बाद और कमर्शियल वाहनों के लिए फिटनेस की अवधि समाप्त होने पर रिन्यू कराना अनिवार्य होता है।

चार पॉइंट में समझिए क्यों अहम है फिटनेस सर्टिफिकेट

  1. सुरक्षा : अच्छी तरह से मेंटेन किया गया वाहन टूटने की संभावना कम होती है, जिससे सड़क पर दुर्घटना या रुकावट आ सकती है। फिटनेस सर्टिफिकेट यह सुनिश्चित करता है कि वाहन सुरक्षा मानकों को पूरा करते हैं और खराब होने की संभावना कम होती है।
  2. पर्यावरणीय प्रभाव : फिटनेस सर्टिफिकेट में उत्सर्जन पर नियमित जांच भी शामिल होती है, जिससे हवा के प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
  3. कानूनी अनुपालन : अपने वाहन के लिए मान्य फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त करना कानूनी आवश्यकता है।
  4. बीमा : कई बीमा पॉलिसी कि लिए मान्य फिटनेस सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है। इसके बिना, दर्घटना के मामले में आपका बीमा कवरेज अमान्य हो सकता है।
गुना आरटीओ कार्यालय में सर्टिफिकेट नहीं बन रहे हैं।
गुना आरटीओ कार्यालय में सर्टिफिकेट नहीं बन रहे हैं।

इन जगहों पर हो रही फिटनेस जांच…इतने दूर हैं सेंटर

  • इंदौर केंद्र: धार- 62.6 किमी, खरगोन- 127 किमी।
  • भोपाल केंद्र: सीहोर- 38.4 किमी, रायसेन- 47 किमी, विदिशा-57.1 किमी, राजगढ़- 145 किमी, गुना- 211 किमी (प्रदेश में सर्वाधिक दूरी)
  • ग्वालियर केंद्र: मुरैना- 40.6 किमी, भिंड-78 किमी, दतिया- 77 किमी, शिवपुरी- 116 किमी।
  • उज्जैन केंद्र: आगर मालवा-77.2 किमी, रतलाम- 107 किमी।
  • जबलपुर केंद्र: मंडला- 92.8 किमी, दमोह- 107 किमी, नरसिंहपुर- 111 किमी, सिवनी-145 किमी, डिंडौरी- 158 किमी।
  • सतना केंद्र: रीवा- 56.6 किमी, पन्ना-73.1 किमी, कटनी- 116 किमी, उमरिया- 176 किमी, शहडोल-210 किमी।
  • सिंगरौली केंद्र: सीधी- 106 किमी
  • देवास केंद्र: शाजापुर-61.5 किमी, खंडवा- 116 किमी, हरदा- 174 किमी।

गुना ARTO बोले-नई व्यवस्था शुरू हो रही है

इस मामले में ARTO ज्ञानेंद्र वैश्य ने बताया कि अभी बाहर ही बन रहे हैं। वाहन मालिक जहां से चाहे वहां बनवा सकता है। अभी नई व्यवस्था शुरू होने वाली है।

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