नई दिल्ली। देश में प्राइवेट जेट की डिमांड बढ़ती जा रही है। पहले प्राइवेट जेट लग्जरी लाइफस्टाइल के बारे में बताता था, लेकिन अब इसका इस्तेमाल बिजनेस से लेकर एंबुलेंस सेवाओं में भी किया जा रहा है।

विमानन नियामक डीजीसीए के मुताबिक, देश में इस समय 445 प्राइवेट जेट हैं। इनके लिए 133 नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर हैं, जो चार्टर्ड पैसेंजर, कार्गो और एयर एंबुलेंस चलाते हैं।

प्राइवेट जेट की बढ़ रही डिमांड

विमानन नियामक डीजीसीए के मुताबिक, देश में इस समय 445 प्राइवेट जेट हैं। इनके लिए 133 नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर हैं, जो चार्टर्ड पैसेंजर, कार्गो और एयर एंबुलेंस चलाते हैं।

भारत में इस समय 214 एयरप्लेन और 220 हेलीकॉप्टर सेवा में हैं। देश में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है। 2021 से लेकर 2024 तक, इस सेक्टर में 25 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है।

प्राइवेट जेट का तीसरा सबसे बड़ा मार्केट- भारत

भारत में प्राइवेट जेट की मासिक उड़ानें तीन गुना बढ़कर 2,400 से ज्यादा हो गईं हैं। वहीं देखा जाए तो एक तरफ जहां भारत में इनकी डिमांड बढ़ी है, चीन में इनकी मांग घटती जा रही है।

एशियन स्काई ग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक, प्राइवेट जेट मार्केट में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। चीन और ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत इस सेक्टर में तीसरे नंबर पर आ गया है।

भारत में प्राइवेट जेट की बढ़ती मांग की वजह अर्थव्यवस्था का तेजी से बढ़ना है। देश में अमीरों की संपत्ति में हो रहे इजाफे और बेहतर एयर इंफ्रास्ट्रक्चर ने इनकी मांग को और बढ़ाया है।