मेरी हत्या चाहने वालों से सुरक्षा कैसे मांगें !!!
जो मेरी हत्या करना चाहते हैं, उनसे हम कैसे कहें कि हमारी सुरक्षा करो। हमने अपनी बात कोर्ट के सामने रख दी है। जो लोग खुद अपराधी हैं, बताइए…वो हमारी शिकायत कर रहे हैं। आशुतोष खुद गो हत्यारों के संपर्क में है।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य और शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य के खिलाफ कोर्ट में वाद दायर किया है। उन्होंने 2 शिष्यों के यौन शोषण का आरोप लगाया गया है।
कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित किया है। 21 फरवरी को तय होगा कि शंकराचार्य के खिलाफ FIR होगी या केस डिसमिस हो जाएगा। इस दौरान उठ रहे तमाम सवालों पर ……… ने वाराणसी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से बातचीत की।
सवाल. यौन उत्पीड़न के आरोपों पर क्या कहेंगे?
शंकराचार्य. देखिए, जो व्यक्ति हमारे ऊपर आरोप लगा रहा है, उसका खुद का आपराधिक इतिहास रहा है। मीडिया में पहले भी खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं कि वह गो-तस्करी और गोहत्या से जुड़े लोगों के संपर्क में रहा है। उस पर यह भी आरोप लगा कि वह ट्रकों को पार कराने के लिए रिश्वत देते हुए पकड़ा गया था।
ऐसे व्यक्ति द्वारा हम पर आरोप लगाया जाना, अपने आप में बहुत कुछ कहता है। हमने पहले ही कहा था कि हमारे खिलाफ जो भी अभियान चल रहा है, वह इसलिए है, क्योंकि हम गोरक्षा की बात कर रहे हैं और गोहत्या बंद करने का नारा उठा रहे हैं। आज वही लोग सक्रिय हैं, जिनका हित गोहत्या से जुड़ा है।
सवाल. क्या यह आपके खिलाफ साजिश है?
शंकराचार्य. हम ऐसा मानते हैं कि जो भी हमले हो रहे हैं, वह विचारधारा के कारण हो रहे हैं। जब आप गोमाता की रक्षा की बात करेंगे, तो स्वाभाविक है कि गोहत्या से जुड़े तत्व विरोध करेंगे। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है।
सवाल. क्या सरकार से अतिरिक्त सुरक्षा की मांग करेंगे?
शंकराचार्य. हमने आज तक किसी से सुरक्षा की मांग नहीं की। नागरिकों की सुरक्षा करना राज्य का दायित्व है। अगर राज्य को लगता है कि सुरक्षा बढ़ानी चाहिए, तो वह उनका निर्णय है। हम किसी से सुरक्षा मांगने नहीं जाएंगे।
हमारा विश्वास ईश्वर में है। शास्त्रों में कहा गया है- जाको राखे साइयां, मार सके ना कोय। हमारी सुरक्षा हमारे सनातन धर्मी समाज और भगवान पर आस्था से होती है। जो मेरी हत्या करना चाहते हैं, उनसे हम कैसे कहें कि हमारी सुरक्षा करो
सवाल. क्या धर्मक्षेत्र में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ गया है?
शंकराचार्य. धर्म और राजनीति के संबंध पर चिंतन की जरूरत है। ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ शक्तियां धर्मक्षेत्र को अपने प्रभाव में लेना चाहती हैं। हिंदू परंपरा में धर्माचार्य और शासक की भूमिकाएं अलग-अलग रही हैं। अगर राजनीतिक शक्ति स्वयं को धार्मिक नेतृत्व का भी केंद्र बनाने लगे, तो यह संतुलन के लिए उचित नहीं है। इस पर समाज को विचार करना चाहिए।
सवाल. 2027 के विधानसभा चुनाव को आप कैसे देखते हैं?
शंकराचार्य. हम किसी विशेष वर्ष या चुनाव से प्रेरित होकर काम नहीं करते। हमारा स्पष्ट मत है कि जो भी मुख्यमंत्री बने, वह कानून का पालन करने वाला हो और अपनी प्रजा को पुत्र-पुत्री के समान समझे। अहंकार, प्रतिशोध या दमन की भावना रखने वाला व्यक्ति राज्य के लिए उचित नहीं हो सकता। उत्तर प्रदेश एक उर्वर भूमि है- यहां योग्य और कर्मठ लोगों की कमी नहीं है। अवसर मिलना चाहिए।
सवाल. क्या मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं?
शंकराचार्य. हम व्यक्ति विशेष पर नहीं, सिद्धांत पर बात करते हैं। हमारा मानना है कि लोकतंत्र में कोई भी पद किसी एक व्यक्ति के लिए आरक्षित नहीं होता। समाज में अनेक योग्य लोग हैं। नेतृत्व का मूल्यांकन जनता करती है।
सवाल. आपने पहले केशव मौर्य की सराहना की थी?
शंकराचार्य. उस समय उनका जो बयान आया था, वह संतुलित और समझदारी भरा लगा, इसलिए हमने स्वागत किया। यह किसी राजनीतिक समर्थन का प्रश्न नहीं था, बल्कि परिस्थिति के अनुरूप एक प्रतिक्रिया थी। उसके बाद इस विषय में कोई विशेष संवाद नहीं हुआ।

