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यूपी विधानसभा चुनाव के बाद होंगे पंचायत चुनाव !

यूपी विधानसभा चुनाव के बाद होंगे पंचायत चुनाव
OBC आयोग की रिपोर्ट आने में लगेंगे 6 महीने, पार्टियों की भी तैयारी नहीं

यूपी में पंचायत चुनाव समय पर होते नहीं दिख रहे। इलाहाबाद हाईकोर्ट में सरकार ने ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए आयोग बनाने का आश्वासन दिया है। इस आश्वासन और राजनीतिक दलों की चुनावी तैयारी के मद्देनजर साफ है कि अब यूपी में पंचायत चुनाव, विधानसभा चुनाव 2027 के बाद ही कराए जाएंगे।

प्रदेश सरकार के एक मंत्री ने भी नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पंचायत चुनाव समय पर नहीं होंगे। विधानसभा चुनाव के बाद चुनाव कराए जाएंगे।

क्या है पूरा मामला, राजनीति के जानकार क्या कहते हैं…यूपी में पंचायत चुनाव इसी साल होने हैं, लेकिन ओबीसी आयोग के गठन को लेकर ये टलते दिख रहे हैं।

यूपी में पंचायत चुनाव इसी साल होने हैं, लेकिन ओबीसी आयोग के गठन को लेकर ये टलते दिख रहे हैं।

यूपी में पंचायत चुनाव 2021 में हुए थे। इस आधार पर ग्राम प्रधानों, ग्राम पंचायत सदस्यों, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल 2 मई को खत्म हो जाएगा। पंचायत चुनाव अप्रैल से जून 2026 तक प्रस्तावित है।

पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर भी बयान भी दे रहे कि पंचायत चुनाव समय पर ही कराए जाएंगे। लेकिन, चुनाव को लेकर पंचायतीराज विभाग से लेकर राजनीतिक दलों का रुख बता रहा है कि चुनाव प्रस्तावित अवधि में नहीं कराए जाएंगे।

क्यों टलते दिख रहे पंचायत चुनाव?

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अभी मामला ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए आयोग गठन में फंसा है। इसमें करीब 6 महीने समय लग सकता है। पंचायत चुनाव अगर प्रस्तावित अवधि अप्रैल से जून- 2026 तक नहीं कराए गए तो उसके बाद शासन, प्रशासन, भारत निर्वाचन आयोग और राजनीतिक दल विधानसभा चुनाव की तैयारी में व्यस्त हो जाएंगे। सभी के लिए पंचायत चुनाव से कई गुना अधिक महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव है। ऐसे में विधानसभा चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव होना लगभग तय है।

पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के एक पदाधिकारी ने भी बताया कि पार्टी की अभी पंचायत चुनाव की जमीनी तैयारी नहीं है। कुछ महीने पहले तैयारी शुरू हुई थी। लेकिन, उसके बाद अब कोई चर्चा या तैयारी बैठक तक नहीं हो रही है।

राजनीतिक दल भी नहीं चाहते समय पर चुनाव

मौजूदा परिस्थिति में भाजपा, सपा और कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दल भी नहीं चाहते कि समय पर चुनाव कराए जाएं। वहीं, योगी सरकार के ज्यादातर मंत्री भी समय पर चुनाव कराने के पक्ष में नहीं है।

उनका मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव कराने से गांवों में राजनीतिक टकराव बढ़ जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, पिछले दिनों पार्टी और सरकार में भी पंचायत चुनाव टालने पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है।

राजनीतिक विश्लेषक आनंद राय भी मानते हैं कि पंचायत चुनाव सिंबल पर नहीं होने के कारण एक ही पार्टी के कई कार्यकर्ता आमने-सामने चुनाव लड़ते हैं। इससे उनके बीच राजनीतिक रंजिश बढ़ती है।

आनंद राय का कहना है कि पंचायत चुनाव में मनमाफिक प्रत्याशी का चयन नहीं होने पर कार्यकर्ता दूसरे दलों से टिकट लेकर पार्टी को कमजोर कर सकते हैं। इसका असर विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है। जिला पंचायत सदस्य और क्षेत्र पंचायत सदस्य के चुनाव में अगर पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहता है तो इसका सीधा असर विधानसभा चुनाव पर भी पड़ेगा।

अब बड़ा सवाल यह कि पंचायतीराज मंत्री ऐसा बयान क्यों दे रहे कि समय पर चुनाव कराए जाएंगे। इसे लेकर राजनीतिक विश्लेषक अखिलेश बाजपेयी कहते हैं कि पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बयान के पीछे राजनीतिक वजह है।

राजभर और भाजपा के पदाधिकारी नहीं चाहते कि अभी से पंचायत चुनाव टालने की घोषणा कर दी जाए। ऐसा करने से चुनाव की तैयारी में जुटे कार्यकर्ता न केवल मायूस होंगे, बल्कि वह धरातल पर तैयारी भी बंद कर देंगे।

कार्यकाल मई में खत्म… फिर पंचायतें कैसे चलेंगी?

पंचायत राज विभाग के सूत्रों के मुताबिक, अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत में रिसीवर नियुक्त कर दिए जाएंगे। जब तक पंचायत चुनाव नहीं होते, तब तक रिसीवर ही पंचायतीराज की त्रिस्तरीय संस्थाओं का संचालन करेंगे।

हालांकि, अपर महाधिवक्ता कुलदीपपति त्रिपाठी कहते हैं- सरकार ने हाईकोर्ट में कहा है कि पंचायत चुनाव से पहले ओबीसी आयोग का गठन कर लिया जाएगा। सरकार आयोग का गठन कर नियमानुसार आरक्षण निर्धारित करने के बाद ही चुनाव कराएगी। लेकिन, पंचायत चुनाव की तारीख को लेकर कोई बात नहीं की है। सरकार ने कहा कि आयोग बनाने की तैयारी है।

समय पर चुनाव कराने के लिए कोर्ट की राह भी खुली

राज्य निर्वाचन आयोग के पूर्व अपर आयुक्त जेपी सिंह मानते हैं कि पंचायत चुनाव को लेकर दावेदारों के पास हाईकोर्ट जाने की राह खुली रहती है। पंचायत चुनाव में थोड़ा-बहुत देरी तो हो सकती है, लेकिन ज्यादा लंबे समय तक चुनाव टालना मुश्किल होगा।

कोई भी पक्ष हाईकोर्ट में याचिका दायर कर देगा तो सरकार को कोर्ट में बताना होगा कि किस ठोस आधार पर चुनाव टाला जा रहा है? अगर सरकार कोई ठोस वजह नहीं बताती, तो हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट चुनाव कराने को लेकर आदेश भी दे सकते हैं।

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