जेल से गैंगस्टर गजानन मारणे के रिहा होने पर निकला 300 गाड़ियों का काफिला, कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ी

पुणे का एक बड़ा नाम गजानन मारणे (gangster Gajanan Marne). काम? गुंडागिरी. मौका? जेल से छूटा. चर्चा क्यों? क्योंकि जेल से छूटने की खुशी में जनाब ने एक रैली निकाली है मानो वो देश के लिए कोई जंग जीत कर आ रहा है. या फिर जैसे वो आजादी की लड़ाई में जेल गया था. आज कल यह ट्रेंड चल पड़ा है. कोई किसी अपराध की सजा पाकर बाहर आता है या किसी पर कोई आरोप सिद्ध नहीं हो पाने से उसे रिहाई मिल जाती है तो इस तरह से विजयोत्सव मनाया जाता है, मानो उसने समाज के लिए कोई बहुत बड़ा काम किया है.

पुणे के गैंगस्टर गजानन मारणे के समर्थकों की यह रैली तलोजा जेल से पुणे तक निकाली गई. इस रैली में 300 गाड़ियां और अनेक समर्थकों का जमावड़ा था. कोरोना नियमों की तो बात ही मत कीजिए. ना मास्क, ना सोशल डिस्टेंसिंग…बस पुणे का भाऊ घर आया है.

गुंडे ने बढ़ाई गर्दी, सामान्य जनता की सरदर्दी

एक गुंडे के तलोजा जेल से रिहाई पर समर्थकों के इस उत्सव और उत्साह ने कोरोना के नियमों का मजाक बनाया है. वो भी तब, जब कि महाराष्ट्र में एक बार फिर से प्रतिदिन 4000 नए केस आने शुरू हो गए हैं. ऐसे समय में गजानन मारणे जैसे गुंडे की रैली में भीड़ और जमावड़ा चिंता का कारण बन रहा है.

ऐसा नहीं है कि किसी गुंडे की रिहाई पर पहली बार रैली निकाली गई हो. अक्सर किसी बड़े दबंग की रिहाई होती है तो उसके प्रतिस्पर्धी गैंगस्टर के दिल में दहशत जमाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जाते हैं. लेकिन यह वक्त किस तरह का है? समय तो देखो, समय की चाल तो देखो. कोरोना काल और उसका संकट बढ़ाने की इजाज़त किसी को भी नहीं दी जा सकती. गैंगस्टर को रैली की इजाजत क्यों दी जा रही है? कुख्यात को विख्यात बनाने की परंपरा को हवा क्यों दी जाती है? यह अहम सवाल है.

कौन है गजानन मारणे?

गजानन मारणे पुणे शहर का एक कुख्यात गैंगस्टर है. वह तलोजा जेल में मर्डर के मामले में बंद था. न्यायालय ने उसे दोषमुक्त कर दिया है. इसी को विजयोत्सव के रूप में मनाते हुए उसके समर्थकों ने तलोजा से पुणे तक 300 गाड़ियों की रैली निकाली थी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *