मुजफ्फरनगर..गवाही से मुकरे दंगा पीड़ित पर चलेगा मुकदमा … 2013 दंगे के दौरान दर्ज कराया था मुकदमा, अभियोजन की याचना पर घोषित किया पक्षद्रोही

मुकदमा दर्ज कराने के बाद गवाही से मुकरे दंगा पीड़ित पर ही कोर्ट ने 344 सीआरपीसी के तहत कार्रवाई का आदेश दिया है। संबंधित मुकदमे में कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में पांच आरोपियों को बरी कर दिया था।

थाना फुगाना क्षेत्र के गांव बहावड़ी निवासी नानू पुत्र सुक्कन ने 20 सितंबर 2013 को मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें आठ सितंबर 2013 को गांव के पांच व्यक्तियों के विरुद्ध घर में तोड़फोड़, आगजनी व लूट आदि का आरोप लगाया था। घटना का मुकदमा एडीजे-6 कोर्ट में चला। सुनवाई के दौरान वादी मुकदमा अपने कथन से मुकर गया। शपथ पत्र देकर उसने कोर्ट में नामजद आरोपियों के घटना को अंजाम दिये जाने की जानकारी होने से साफ इंकार कर दिया था। कहा था कि वह तो घटना से पहले ही मलकपुर कैंप चला गया था। घटना के 10-12 दिन बाद टाइपशुदा कागज पर उसके दस्तखत कराए गए थे। इस मामले में कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में पांचो आरोपियों को बरी कर दिया था।

वादी मुकदमा नानू पुत्र सुक्कन के गवाही से मुकरने को कोर्ट ने गंभीरता से लिया। अभियोजन की याचना पर एडीजे-6 कोर्ट के जज बाबूराम ने नानू को पक्षद्रोही घोषित करते हुए उसके विरुद्ध 344 सीआरपीसी के तहत कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया।

दंगो के 100 मुकदमों में 1000 से अधिक हो चुके बरी

2013 में मुजफ्फरनगर में हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद शासन ने एसआइटी का गठन किया था। जिसके बाद 510 मुकदमे दर्ज किये गए थे। जिनमें एसआइटी ने विवेचना कर 175 में चार्जशीट दाखिल की। जबकि 170 मुकदमे एक्सपंज किये गए और 165 मुकदमों में फाईनल रिपोर्ट लगा दी गई। इस दौरान कोर्ट में चले 175 मुकदमों में से करीब 100 में एक हजार से अधिक आरोपी बरी हो चुके हैं।

मुकरने पर होती रही है चश्मदीद गवाहों पर कार्रवाई

दंगो के अधिकतर मुकदमों में वादी मुकदमा व चश्मदीद अपने कथन से मुकरते रहे हैं। जिन पर कोर्ट नियमानुसार कार्रवाई करती रही है। लूट, आगजनी आदि आरोपों के गांव कुटबी के एक मुकदमे में भी वादी मुकदमा सराजुद्दीन कोर्ट में गवाही से मुकर गया था। जिसके चलते सितंबर माह में एडीजे-6 कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में 20 आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने सराजुद्दीन के विरुद्ध 344 सीआरपीसी के तहत मुकदमा चलाने के आदेश दिये थे।

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