अफसोस ये सम्मान लौटा भी नहीं सकते:अमिताभ बच्चन, कैलाश खेर को मिला एक ऐसा सम्मान जिसे अब लोग दुआ करते हैं कि मुझे न मिले
यूपी का यश भारती सम्मान। जिसे पाने वालों की फेहरिस्त में अमिताभ बच्चन, नसीरूद्दीन शाह, शुभा मुद्गल, कैलाश खेर, नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे दिग्गज कलाकार शामिल हैं। अखिलेश सरकार में इस सम्मान को देने में जो दरियादिली दिखाई थी। उसे देखकर ये तो सभी जानते थे कि सरकार किसी की भी आए, इस सम्मान पर सवाल जरूर उठेंगे। ऐसा ही हुआ, जब यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार आई। जांच बैठी, तो चुनिंदा लोगों को मिला सम्मान ही जस्टिफाई हो सका।
समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने 28 साल पहले जिस यश भारती सम्मान को शुरू किया था। वह विधानसभा चुनाव 2022 में फिर सुर्खियों में है। योगी सरकार में बंद हो चुके इस सम्मान को अखिलेश यादव ने दोबारा शुरू कराने का ऐलान किया है।
कहते हैं यादव परिवार का जिस पर दिल पसीजा वह यूपी का ‘यश भारती’ हो गया। इन्हीं कारणों से जहां बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन ने यूपी सरकार की पेंशन लौटाई, वहीं फिल्म बाहुबली और बाहुबली-2 के डायलॉग और गाने लिखने वाले मनोज मुंतशिर ने तो यहां तक कह दिया था कि यश भारती सम्मान मिलने से लोग मुझ पर हंसते हैं।

सैफई के ग्राम प्रधान, सपा आयोजन की मंच संचालिका तक को दिया गया ये सम्मान
जो यश भारती सम्मान हरिवंश राय बच्चन, अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन, जया बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन, शुभा मुद्गल, रेखा भारद्वाज, रीता गांगुली, कैलाश खेर, अरुणिमा सिन्हा, नवाज़ुद्दीन सिद्द़ीकी़, नसीरूद्दीन शाह, रविंद्र जैन, भुवनेश्वर कुमार जैसी हस्तियों को दिया गया। उसी यश भारती सम्मान की मानकों की उपेक्षा समझने के लिए हम एक उदाहरण आपके सामने रखते हैं। अखिलेश सरकार ने दर्शन सिंह यादव को भी ये सम्मान दिया था। उनकी अहमियत सिर्फ इतनी थी कि वो सैफई के ग्राम प्रधान हुआ करते थे।
यश भारती के सम्मान समारोह में मंच संचालन करने वाली अर्चना सतीश का नाम तो सम्मान समारोह के दौरान ही जोड़ दिया गया था। वह भी सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने 5 साल तक इस कार्यक्रम का मंच संचालन किया था।
कई वरिष्ठ साहित्यकार ये सम्मान मिलने का इंतजार ही करते रह गए। लेकिन ‘क्रांतिदूत मुलायम’ किताब लिखने वाले राम सिंह यादव को यश भारती सम्मान दे दिया गया। शिखा नाम की एक महिला को सिर्फ इसलिए यश भारती सम्मान दिया गया, क्योंकि उन्होंने सपा के कार्यक्रमों का मंच संचालन अच्छा किया था। अखिलेश सरकार में मुख्य सचिव रहे आलोक रंजन की गायिका पत्नी सुरभि रंजन को भी यश भारती सम्मान दिए जाने पर खूब विरोध हुआ था।
ये कैसा मजाक.. 250 में सिर्फ 2 ही सम्मान लायक मिले
2017 में जब योगी आदित्यनाथ यूपी के सीएम बने, तो उन्होंने 1993 से 2016 तक यश भारती सम्मान लेकर 50 हजार रुपए पेंशन पाने वाले 250 लोगों की जांच कराई। आयकर रिटर्न, सरकारी नौकरी में कार्यरत होना, किसी अन्य स्रोतों से आय, जैसे मानकों के आधार पर की गई इस जांच में पता चला कि सिर्फ 2 ही लोग इस पेंशन के लिए पात्र थे। गायक गुलशन भारती और पर्वतारोही यस्थवी अस्थाना।
योगी सरकार ने पुरस्कार और पेंशन के अपात्रों का सम्मान, तो वापस नहीं लिया, लेकिन पेंशन बंद कर दी। जो पात्र थे उनकी पेंशन आधी कर दी। इस तरह की गड़बड़ियों के चलते योगी सरकार ने दिसंबर 2020 में यश भारती सम्मान देना बंद कर दिया। योगी ने इसकी जगह पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर राज्य संस्कृति पुरस्कार देना शुरू किया। पुरस्कार की राशि 11 लाख से घटाकर अधिकतम 5 लाख कर दी गई।

मुलायम सिंह यादव ने शुरू किया था सर्वोच्च सम्मान
मुलायम सिंह यादव ने 1994 में यश भारती पुरस्कार शुरू किया था। तब पुरस्कार पाने वालों को सम्मान पत्र के साथ एकमुश्त एक लाख रुपए दिया जाता था। 2006 में मायावती सरकार के समय इन पुरस्कारों को बंद किया गया। 2012 में अखिलेश यादव सीएम बने, तो उन्होंने 2015 में यह पुरस्कार फिर से शुरू कर दिए। इस बार पुरस्कार की राशि बढ़ाकर 11 लाख रुपए कर दी गई। साथ ही यश भारती सम्मान पाने वाले व्यक्ति को आजीवन 50 हजार रुपए पेंशन दिए जाने का प्रावधान भी जोड़ दिया।
पुरस्कार बांटने के लिए लोन तक लेना पड़ा
यश भारती सम्मान के लिए बार-बार सूची जारी करना। गलत नाम आना, आखिरी समय तक नाम जोड़े जाना और चयन प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने को लेकर शास्त्रीय गायक रामेश्वर प्रसाद मिश्र, धर्मनाथ मिश्र, तबला वादक इलमास हुसैन, उपशास्त्रीय गायिका सुनीता झिंगरन, कथक नृत्यांगना सुरभि सिंह और कव्वाली गायक हैदर बख्श सहित कलाकारों-साहित्यकारों ने यश भारती पर सवाल उठाए थे।
अमिताभ के बेटे अभिषेक बच्चन को यश भारती दिए जाने का भी खूब विरोध हुआ। एक बार इतने पुरस्कार बांट दिए गए कि आवंटित राशि कम पड़ गई। जिसके कारण संस्कृति विभाग को लखनऊ विकास प्राधिकरण से पांच करोड़ रुपए कर्ज तक लेना पड़ा।
पांच साल पहले दिए पुरस्कारों से समझें गड़बड़ी
- 2016-17 में यश भारती सम्मान पाने के लिए 310 आवेदन आए।
- सरकार के संस्कृति निदेशालय ने इनमें से 94 नाम आगे बढ़ाए।
- शासन ने 24 अक्टूबर 2017 को सिर्फ 54 लोगों को यश भारती से सम्मानित करने की स्वीकृति दी।
- 25 अक्टूबर 2017 को 11 नए नाम जोड़कर कुल 65 नाम तय हुए।
- 27 अक्टूबर को यह लिस्ट 65 के बजाए 73 लोगों तक पहुंच गई, क्योंकि इसमें 8 नाम 26 अक्टूबर की रात को जोड़ दिए गए।
- 27 अक्टूबर को शासन ने फिर 9 नए नाम जोड़ दिए।
- 29 नवंबर को दो नाम और इसी लिस्ट में जोड़ दिए गए।
- एक दिसंबर को सम्मान समारोह में कुल 84 लोगों को यश भारती सम्मान दिया गया।