कानपुर कमिश्नरेट पर हिंसे का दाग ….? पुलिस की नाकामी भी आई सामने

183 घंटे में पुलिस ने की 57 गिरफ्तारी, बुलडोजर गरजा और पुलिस की नाकामी भी आई सामने….

कानपुर में 3 जून यानी शुक्रवार को जुमे की नमाज बाद के बवाल हो गया। कानपुर, बनारस, नोएडा और लखनऊ में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद कानपुर पहला ऐसा शहर बना, जहां हिंसा हुई। शुक्रवार को जुमा था तो पुलिस भी अलर्ट रहती है। यह हालात तब बने जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, यूपी की गर्वनर और सीएम भी कानपुर में थे। पूरे मामले में लोकल इंटेलिजेंस यूनिट और पुलिस फेल रही।

दैनिक भास्कर ने हिंसा के 183 घंटे बाद ग्राउंड पड़ताल की तो पुलिस कमिश्नरेट की ताबड़तोड़ गिरफ्तारी और बुलडोजर गरजने से लेकर सख्त कार्रवाई करके डैमेज कंट्रोल करने का प्रयास किया है, लेकिन पुलिस की घोर लापरवाही भी सामने आई है।

हिंसा के बाद इलाके में गश्त करते पुलिस अफसर और आरएएफ के जवान।
हिंसा के बाद इलाके में गश्त करते पुलिस अफसर और आरएएफ के जवान।

9 दिन में 57 गिरफ्तारी और मकान पर बुलडोजर चला
हिंसा के बाद कानपुर पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा ने मुख्य आरोपी हयात जफर हाशमी समेत चार मुख्य आरोपियों को 24 घंटे के भीतर ही दबोच लिया। इतना ही नहीं 57 गिरफ्तारियां करके कड़ी कार्रवाई का संदेश दिया है। इसके साथ ही जिला प्रशासन और पुलिस ने मुख्य आरोपी के करीबी की बिल्डिंग भी ध्वस्त करने की कार्रवाई की है। शहर के पॉश इलाके में अवैध रूप से पांच मंजिला इमारत खड़ी कर दी थी। इसके साथ ही शनिवार को हयात जफर समेत चार मुख्य आरोपियों की रिमांड लेकर हिंसा के पीछे मकसद क्या था…? पीएफआई और सिमी जैसे बड़े संगठनों का हाथ होने का भी तलाश कर रही है।

कानपुर हिंसा में हुई 3 FIR
कानपुर में हुई हिंसा के बाद पुलिस ने मामले में बेकनगंज थाने में तीन एफआईआर दर्ज की थी। इसमें 43 लोगों को नामजद और 1000 से ज्यादा अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वाले लोगों के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज की गई। हिंसा से जुड़ी तीन एफआईआर की विवेचना एसआईटी कर रही है।

चार SIT कर रही हैं हिंसा की जांच
हिंसा की जांच के लिए कानपुर पुलिस कमिश्नर ने चार एसआईटी का गठन किया है। इसमें पहली एसआईटी डीसीपी साउथ संजीव त्यागी की अध्यक्षता में गठित की गई है। यह एसआईटी हिंसा के मामले में दर्ज मुकदमों की जांच कर आरोपियों को जेल भेजेगी। जबकि दूसरी एसआईटी एडीसीपी ईस्ट राहुल मिठास की अध्यक्षता में गठित की गई है। यह एसआईटी हिंसा स्थल के चौतरफा सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य साक्ष्य संकलन करेगी। तीसरी एसआईटी हिंसा प्रभावित क्षेत्र के आसपास पेट्रोल पंप की जांच कर रही है कि किन-किन पेट्रोल पंपों से खुले में पेट्रोल दिया गया। जिससे हिंसा के दौरान ताबड़तोड़ पेट्रोल बम दागे गए और चौथी एसआईटी सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट करने वालों की जांच कर रही है।

पुलिस की नाकामी की ये रहीं बड़ी वजहें

  • मोहम्मद पैगंबर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ बड़ा संदेश देने के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम वाले दिन रखी गई बंदी और जेल भरो आंदोलन रखा गया। पुलिस का खुफिर तंत्र इसे भांप नहीं सका।
  • शुक्रवार को जुमे की नमाज थी। बाजार बंद होने के समय भी सरकारी अफसर मुस्लिम समुदाय के आक्रोश को नहीं समझ पाए।
  • बवालियों से निपटने के लिए पुलिस के पास दंगा नियंत्रण के उपकरण भी साथ नहीं थे।
  • प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के कानपुर में होने के कारण अधिकांश फोर्स वीआईपी ड्यूटी में लगा दी गई, जबकि संवेदनशील मुद्दे को पुलिस ने नजरंदाज कर दिया।
  • जुमे की नमाज के समय भी मिश्रित आबादी वाले इलाकों में चंद पुलिसकर्मियों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी छोड़ दी गई।
  • हिंसा के मुख्य आरोपी ने कागजों में वापस लिया बंदी और जेल भरो आंदोलन, भीतर ही भीतर हिंसा भड़काने के लिए करता रहा बैठकें।
  • मौके पर मौजूद पुलिस फोर्स बैकफुट पर आ गई। उनके पास भीड़ को संभालने के लिए कोई संसाधन मौजूद नहीं थे।
  • सेंसटिव इलाका होने के बाद भी दंगा प्वाइंट पर नहीं मौजूद था पुलिस फोर्स।

चौकी इंचार्ज से लेकर DCP ने की घोर लापरवाही
हिंसा का मुख्य आरोपी गंभीर धाराओं में 9 मुकदमें होने के बाद भी रोजाना थाने, चौकी और एसीपी के पास बैठता था। इलाके के बड़े मामलों की पंचायत थाने और चौकी में वही निपटाता था। गंभीर मुकदमें होने के बाद भी हयात जफर हाशमी के खिलाफ नहीं की गई थी गुंडा एक्ट, हिस्ट्रीशीट समेत अन्य कोई बड़ी कार्रवाई। हिंसा के मुख्य आरोपी पुलिस की नाक के नीचे हिंसा भड़काने के लिए मोहल्ले-मोहल्ले में करता रहा बैठकें और वापस नहीं ली बंदी की तारीख। इसके बाद भी पुलिस को भनक नहीं लगी और जुमे की नमाज के बाद तय रणनीति के मुताबिक हिंसा भड़क उठी।

बाजार बंद होने पर भी नहीं जागे थे अफसर
कानपुर में बेकनगंज इलाके में शुक्रवार दोपहर को यह हिंसा हुई है। इससे पहले मुस्लिम इलाकों में बाजार बंद थे। लेकिन उसके बाद भी सरकारी तंत्र माहौल को नहीं भाप पाया। कि आखिर बाजार क्यों बंद हैं। जब मुस्लिम समुदाय के लोग पेट्रोल बम, ईंट और पत्थर लेकर हजारों की संख्या में सड़क पर उतर आए उसके बाद पुलिस की नींद टूटी।

खाली हाथ थी पुलिस, भारी पड़े उपद्रवी
प्रदेश की राजधानी लखनऊ से कानपुर की दूरी 90 किमी की है। पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू है। जहां अपर पुलिस महानिदेशक रैंक के अधिकारी पुलिस कमिश्नर के पद पर हैं। लेकिन जब हिंसा हुई तो पुलिस के इंतजाम की पोल भी खुल गई। सबसे पहले घटना पर पहुंची पुलिस पर न तो बॉडी प्रोटेक्टर जैकेट थी और न ही दंगा नियंत्रण वाहन। हेलमेट भी जाल वाले नहीं थे। पुलिस आरोपियों को पकड़ने लगी तो भीड़ एक सिपाही से बवाली को छुड़ाने की भी कोशिश करती रही।

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