माफिया का जंगलराज …?

चोरी की 50 बाइक पर 20 से 25 की उम्र के 100 लड़के, दिनदहाड़े सागौन चीरतीं मशीनें और 400 सिल्लियों का डेली टारगेट …

विदिशा जिले का लटेरी वन क्षेत्र। 33 हजार हेक्टेयर में यहां सागौन ही सागौन। और उसकी बेहिसाब तस्करी में लगा माफिया। तस्करों की जुर्रत ऐसी कि पहले रात में कुल्हाड़ी से लकड़ी काटते थे।

अब दिनदहाड़े मशीनें लकड़ियां चीर रही हैं और इन्हें लादे चोरी की बिना नंबर की बाइक धड़ल्ले से आ-जा रही हैं। यही नहीं, यहां से ये लकड़ी 32 किमी दूर मप्र के सुठालिया ही नहीं, 120 किमी दूर राजस्थान तक में बेची जा रही है। तस्करी को अंजाम देने के लिए बाकायदा राजस्थान के ट्रेंड माफिया की मदद ली जा रही है। हालात ये हैं कि जंगल की हिफाजत के जिम्मेदार वन विभाग ने तो जंगल में पेट्रोलिंग छोड़ दी है। परिवार को दूसरे शहरों में भेज दिया है। विदिशा के डीएफओ अजय पांडे कहते हैं कि माफिया बहुत हावी हो रहे हैं। इन्हें रोकने को फोर्स मांगा है। अभी हमारी टीमें जंगल में नहीं जा रही हैं।

माफिया का डर ऐसा कि वन विभाग ने पेट्रोलिंग बंद की, वर्दी पहनना भी छोड़ा

लगभग 50 बाइक। किसी पर भी नंबर नहीं। इन पर 80 से 100 लड़के। उम्र 20 से 25 साल। बाइक पर बंधी लकड़ी की सिल्लियां। कहीं सिल्लियां पकड़े बाइक की पिछली सीट पर बैठे लड़के। तस्वीर वीरप्पन के चंदन तस्करी के जंगल के फिल्मी सीन से लगभग मिलती-जुलती। गांव के एक छोर पर हम छिपकर खड़े हो गए। तभी वहां से एक के बाद एक किसी चुनावी रैली की तरह बाइकें बाहर निकलती हैं। सब की सब सिल्लयों से लदीं। हम गिनती करते हैं, फिर 35-40 के बाद थक कर बंद कर देते हैं।

 ये 100 लड़के जब जंगल में जाते हैं तो कम से कम 350 से 400 पेड़ एक दिन में काटने का टारगेट रखते हैं और ये जो इनकी बाइक हैं ये सब भोपाल-इंदौर से चुराई हुई हैं। ज्यादातर होंडा शाइन और स्पलेंडर हैं। 125 सीसी की। ताकि वजन उठा सकें। ये युवा एक साथ जंगल में एंट्री करते हैं। 10 से ज्यादा युवा जंगल के एंट्री प्वॉइंट पर निगरानी करते हैं। इस दौरान यदि वन विभाग की टीम वहां पहुंच जाती है तो ये युवा अपने साथियों को अलर्ट कर देते हैं। जंगल में जरा सी आहट होने पर पहले गोफन और बाद में धारदार हथियार से हमला कर देते हैं। इन्हें भगाने को वन विभाग की टीमें सिर्फ हवाई फायरिंग करती हैं और जान बचाकर भाग खड़ी होती हैं।

मप्र में सागौन फर्नीचर का सबसे बड़ा ठिकाना

लटेरी से सुठालिया की दूरी 32 किमी। और सुठालिया सागौन के फर्नीचर कारोबारियों का सबसे बड़ा ठिकाना। यहां तस्कर रोज 100 बाइक पर 400 सिल्लियों को लाकर सौदा करते हैं। एक अवैध सिल्ली की कीमत 800-1000 होती हैं। कई तस्कर लटेरी से सुठालिया होते हुए राजस्थान के मनोहर थाना भी पहुंचते हैं। दूरी है 120 किमी और सिल्ली की कीमत यहां आकर दोगुनी हो जाती है, यानी 2000 रुपए। जंगल से सागौन कट रहा है तो जाता कहां है? वन अधिकारी कहते हैं- ‘आप सुठालिया जाइए। वहां लकड़ी तो छोड़िए, सागौन का इतना फर्नीचर मिलेगा कि पूरे प्रदेश की सभी दुकानों पर नहीं मिलेगा।’ पिछली बार यहां 15 साल पहले कार्रवाई हुई थी। सुठालिया पहुंचे तो गली के मुहाने पर ही बड़े-बड़े सीसीटीवी कैमरे लगे मिले। तीन मंजिला घर के बड़े-बड़े हॉल में हर तरह का सागौन का फर्नीचर। पहले पूछताछ हुई और फिर फोन रखवा लिए। वन विभाग के मुताबिक विदिशा जिले में ही पिछले 5 साल में सागौन के 25769 पेड़ जब्त कर चुके हैं। इनमें से सिर्फ 18577 पेड़ लटेरी के जंगलों से कट गए और चोरी की 206 बाइक जब्त की। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक विदिशा में 2011 से 2021 में 12%, गुना में 30% से ज्यादा जंगल कम हो गया है।

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